बारिश ने बढ़ाई अरहर की टेंशन! जलभराव से बचाएं फसल, विभाग ने बताए जरूरी उपाय

अगस्त की लगातार बारिश से अरहर की फसल पर जलभराव और फफूंदजनित रोगों का खतरा बढ़ गया है. कृषि विभाग ने किसानों को खेत से पानी निकालने, खरपतवार नियंत्रित करने और फसल की नियमित निगरानी की सलाह दी है. समय पर सावधानी बरतकर नुकसान को कम किया जा सकता है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 22 Aug, 2026 | 05:24 PM

Arhar Farming: अगस्त महीने में लगातार हो रही बारिश ने किसानों को राहत के साथ नई चिंता भी दी है. जिले में इस महीने अब तक करीब 313 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है. अधिक बारिश का असर उन फसलों पर पड़ सकता है, जिनके खेतों में लंबे समय तक पानी जमा रहता है. खासकर अरहर की फसल में जलभराव से जड़ों को नुकसान और फफूंदजनित रोगों का खतरा बढ़ सकता है. ऐसे में कृषि विभाग ने किसानों को अभी से खेतों की निगरानी करने और जल निकासी की उचित व्यवस्था करने की सलाह दी है.

अरहर की फसल पर बढ़ा बारिश का खतरा

अरहर की खेती  के लिए प्रमुख क्षेत्रों में शामिल है. यहां की स्थानीय अरहर अपनी खुशबू और स्वाद के लिए जानी जाती है और इसकी मांग आसपास के क्षेत्रों में भी रहती है. इस वर्ष भी किसानों ने बड़े क्षेत्र में अरहर की बुआई की है. लगातार बारिश के कारण अब उन खेतों में समस्या बढ़ सकती है, जहां पानी निकासी की व्यवस्था ठीक नहीं है. खेत में लंबे समय तक पानी जमा रहने से अरहर की जड़ों को पर्याप्त हवा नहीं मिल पाती. इससे पौधों की बढ़वार प्रभावित होने के साथ फफूंदजनित रोगों का खतरा भी बढ़ सकता है.

इन खेतों में किसानों को ज्यादा सावधानी की जरूरत

कृषि विभाग के अनुसार, जिन किसानों ने बुआई के समय बीज उपचार किया है और खेत की मेड़ या ऊंचे स्थान पर अरहर लगाई है, उनकी फसल को जलभराव से नुकसान की आशंका अपेक्षाकृत कम हो सकती है. वहीं, बिना बीज उपचार के अरहर की बुआई करने वाले और खेत के निचले हिस्से में फसल लगाने वाले किसानों को अधिक सतर्क रहने की जरूरत है. किसानों को खेत में पानी जमा नहीं होने देना चाहिए. इसके लिए बारिश के पानी को बाहर निकालने के लिए छोटी नालियां बनाकर जल निकासी की व्यवस्था की जा सकती है.

खरपतवार और फफूंद रोग पर रखें नजर

बारिश के बाद अरहर के खेतों में खरपतवार तेजी  से बढ़ सकते हैं. इससे फसल के साथ पानी, पोषक तत्व और जगह के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ती है. कृषि विभाग ने किसानों को समय पर खरपतवार नियंत्रण करने की सलाह दी है. कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार, आवश्यकता पड़ने पर पेंडीमेथालिन का इस्तेमाल किया जा सकता है. वहीं लगातार नमी और बारिश के कारण फफूंदजनित रोगों की आशंका दिखाई देने पर उचित फफूंदनाशक का प्रयोग किया जा सकता है. कार्बेंडाजिम का 2 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर छिड़काव करने की सलाह दी जाती है. मेनकोजेब या अन्य उपयुक्त फफूंदनाशक भी फसल की स्थिति के अनुसार इस्तेमाल किया जा सकता है.

जल निकासी के साथ पौधों की मजबूती पर दें ध्यान

कृषि विभाग ने किसानों को बारिश के दौरान खेत  की नियमित निगरानी करने की सलाह दी है. खेत में पानी जमा होने पर तत्काल निकासी की व्यवस्था करना जरूरी है. साथ ही खरपतवार को नियंत्रित करते रहें, ताकि पौधों को पर्याप्त पोषक तत्व मिल सकें. अरहर की बुआई के समय पोटाश का उचित मात्रा में प्रयोग पौधों को मजबूत बनाने और प्रतिकूल मौसम की स्थिति का सामना करने में मदद कर सकता है. हालांकि, किसी भी कीटनाशक या फफूंदनाशक का इस्तेमाल फसल की स्थिति देखकर और स्थानीय कृषि विभाग या कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार ही करना बेहतर है. समय पर जल निकासी और रोगों की निगरानी से किसान बारिश के कारण होने वाले संभावित नुकसान को काफी हद तक कम कर सकते हैं.

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