खाली मेड़ बनेगी कमाई की मशीन! ये 5 पौधे बचाएंगे फसल, बढ़ाएंगे मुनाफा

खेत की खाली मेड़ अब सिर्फ सीमा नहीं, कमाई का जरिया बन सकती है. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार करौंदा, अरंडी, नींबू, बबूल और लेमनग्रास लगाने से जंगली जानवरों से फसल की सुरक्षा के साथ फल, बीज और तेल से अतिरिक्त आय भी मिल सकती है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 22 Aug, 2026 | 06:38 PM

खेत की मेड़ को अक्सर किसान केवल खेत की सीमा मानकर खाली छोड़ देते हैं, जबकि यही जगह अतिरिक्त आय और फसल सुरक्षा का मजबूत जरिया बन सकती है. कृषि विशेषज्ञ डॉ. प्रमोद कुमार के अनुसार, यदि किसान मेड़ पर सही पौधों का चयन करें तो आवारा पशुओं और जंगली जानवरों से फसल की सुरक्षा के साथ फल, बीज और सुगंधित फसलों से अतिरिक्त कमाई भी कर सकते हैं. करौंदा, अरंडी, नींबू, बबूल और लेमनग्रास इसके लिए बेहतरीन विकल्प माने जाते हैं.

करौंदा और नींबू से मिलेगा दोहरा फायदा

कृषि विशेषज्ञ के अनुसार, खेत की मेड़  पर करौंदा लगाना सबसे लाभकारी विकल्पों में से एक है. इसकी कांटेदार झाड़ियां खेत के चारों ओर प्राकृतिक सुरक्षा कवच तैयार करती हैं, जिससे पशुओं के सीधे खेत में प्रवेश की संभावना कम होती है. कुछ वर्षों बाद पौधे फल देने लगते हैं और करौंदे से अचार, चटनी तथा प्रसंस्कृत उत्पाद बनाकर अतिरिक्त आय प्राप्त की जा सकती है. इसी तरह नींबू के पौधे भी मेड़ के लिए उपयुक्त हैं. उचित दूरी पर लगाए गए पौधे बढ़ने के बाद खेत की सीमा पर हरियाली के साथ कांटेदार सुरक्षा घेरा बनाते हैं. फल आने पर किसान स्थानीय बाजार में नियमित बिक्री कर अच्छी कमाई कर सकते हैं.

अरंडी और लेमनग्रास बनेंगे कमाई के नए साधन

डॉ. प्रमोद कुमार बताते हैं कि अरंडी को बॉर्डर क्रॉप के रूप में खेत की बाहरी मेड़ पर लगाया जा सकता है. इससे मुख्य फसल की जमीन प्रभावित  नहीं होती और जंगली सूअर जैसे जानवरों से होने वाले नुकसान को कम करने में मदद मिल सकती है. अरंडी के बीजों की बाजार में अच्छी मांग रहती है, जिससे किसानों को अतिरिक्त आमदनी मिलती है. वहीं लेमनग्रास भी मेड़ की खाली जगह का बेहतर उपयोग है. इसकी पत्तियों से आवश्यक तेल तैयार किया जाता है, जिसकी मांग औषधीय, कॉस्मेटिक और सुगंध उद्योग में बनी रहती है. कम रखरखाव वाली यह फसल लंबे समय तक आय का स्रोत बन सकती है.

बबूल बनाएगा प्राकृतिक सुरक्षा कवच

जहां आवारा पशुओं और जंगली जानवरों  की समस्या अधिक रहती है, वहां बबूल जैसे कांटेदार पौधे प्रभावी विकल्प हो सकते हैं. खेत की बाहरी सीमा पर इनकी कतार लगाने से मजबूत प्राकृतिक घेरा तैयार होता है, जिससे फसल तक जानवरों की पहुंच कठिन हो जाती है. हालांकि विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि बबूल को मुख्य फसल से पर्याप्त दूरी पर लगाया जाए और समय-समय पर उसकी छंटाई की जाए, ताकि शाखाओं का फैलाव खेती और खेत में आवाजाही को प्रभावित न करे.

मेड़ पर पौधे लगाते समय रखें ये सावधानियां

कृषि विशेषज्ञ के अनुसार, मेड़ पर पौधे लगाने  से पहले यह समझना जरूरी है कि क्षेत्र में सबसे अधिक नुकसान किस प्रकार के पशु पहुंचाते हैं. उसी आधार पर बाहरी किनारे पर कांटेदार पौधे और अंदर की ओर आय देने वाले पौधों का चयन किया जा सकता है. पौधों के बीच पर्याप्त दूरी रखना, शुरुआती दिनों में सिंचाई करना और नियमित देखभाल करना जरूरी है. सही योजना के साथ विकसित की गई मेड़ न केवल खेत की सुरक्षा बढ़ाती है, बल्कि वर्षों तक फल, बीज और अन्य उत्पादों के माध्यम से किसानों के लिए अतिरिक्त आय का स्थायी स्रोत भी बन सकती है.

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