आंध्र प्रदेश में पिछले दो महीनों में प्याज की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है. फसल की आवक में देरी के कारण बाजार में प्याज की सप्लाई प्रभावित हुई है. कारोबारियों का कहना है कि अल नीनो के असर से मौसम में बदलाव और खराब परिस्थितियों ने फसल की आवक को प्रभावित किया है. जून के पहले सप्ताह में प्याज करीब 25 रुपये किलो बिक रहा था. अब इसकी कीमत लगभग दोगुनी हो गई है. सामान्य क्वालिटी का प्याज 50 रुपये किलो तक बिक रहा है, जबकि अच्छी क्वालिटी के प्याज का भाव 60 रुपये किलो तक पहुंच गया है.
आंध्र प्रदेश में आमतौर पर जून से अगस्त के बीच कुरनूल से बड़ी मात्रा में प्याज बाजार में आता है. इसके अलावा महाराष्ट्र के नासिक और सोलापुर जैसे प्रमुख प्याज उत्पादक इलाकों से भी राज्य को प्याज की सप्लाई मिलती है. हालांकि, इस बार आवक में देरी के कारण बाजार में प्याज की उपलब्धता कम हुई है. इसका सीधा असर कीमतों पर पड़ा है. थोक बाजार में अब 10 किलो प्याज की बोरी करीब 500 रुपये में बिक रही है.
आंध्र प्रदेश में रोजाना 2,100-2,700 टन प्याज की खपत
आंध्र प्रदेश में प्याज की कीमतों में बढ़ोतरी के बीच राज्य में इसकी रोजाना खपत करीब 2,100 से 2,700 मीट्रिक टन होने का अनुमान है. नेशनल सैंपल सर्वे के आंकड़ों और राज्य की 5 करोड़ से ज्यादा आबादी के आधार पर यह अनुमान लगाया गया है. इसमें घरों और कारोबार में प्रति व्यक्ति रोजाना औसतन 40-50 ग्राम प्याज की खपत को आधार बनाया गया है.
कुरनूल से कम हुई प्याज की सप्लाई
थोक कारोबारी वाई. मधु बाबू ने द टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा कि कुरनूल से प्याज की आवक में देरी के कारण बाजार में सप्लाई की कमी हो गई है. उन्होंने कहा कि इस समय आमतौर पर कुरनूल की फसल पर ज्यादा निर्भरता रहती है, लेकिन सूखे जैसे हालात के कारण फसल तैयार होने में देरी हुई है. उन्होंने कहा कि सोलापुर और नासिक से भी प्याज की आवक सामान्य से कम है. बारिश में देरी से प्याज की बुवाई प्रभावित हुई, जिसका असर उत्पादन और सप्लाई पर पड़ा है. कारोबारी के मुताबिक, आने वाले दिनों में प्याज की कीमतें और बढ़ सकती हैं.
दो महीने में दोगुने हुए प्याज के दाम
आंध्र प्रदेश में प्याज की कीमतों में पिछले दो महीनों में लगातार बढ़ोतरी हुई है. जून के अंत तक प्याज करीब 30 रुपये किलो बिक रहा था. अगस्त के दूसरे सप्ताह में इसका भाव बढ़कर 40 रुपये किलो हो गया और अब कीमत 60 रुपये किलो तक पहुंच गई है. आंध्र प्रदेश में प्याज की सप्लाई के लिए मुख्य रूप से कुरनूल और कर्नाटक के बल्लारी पर निर्भरता रहती है. इन मंडियों से आवक कम होने पर कारोबारी मांग पूरी करने के लिए महाराष्ट्र की मंडियों का रुख करते हैं. इससे दूसरे राज्यों से आने वाले प्याज पर निर्भरता बढ़ जाती है और कीमतों पर भी दबाव पड़ता है.