NDRI का बड़ा दावा! नई ब्रीडिंग तकनीक से तैयार होंगे शानदार बछड़े, पशुपालकों की आय बढ़ाने का रास्ता साफ
NDRI ने एक नई ब्रीड सुधार तकनीक से पशुपालकों के लिए उम्मीद जगाई है. वैज्ञानिकों का दावा है कि इससे बेहतर नस्ल के बछड़े तैयार होंगे, दूध उत्पादन बढ़ेगा और किसानों की आय में सुधार होगा. सफल परीक्षण के बाद अब इस मॉडल को दूसरे राज्यों में भी अपनाने की तैयारी की जा सकती है.
NDRI Breed Improvement: अगर पशुपालन में बेहतर नस्ल के पशुओं का चयन और वैज्ञानिक तकनीक का सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए, तो किसानों को कम लागत में ज्यादा दूध देने वाले और तेजी से बढ़ने वाले पशु मिल सकते हैं. इसी सोच को जमीन पर उतारते हुए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (ICAR-NDRI), करनाल ने एक ऐसा ब्रीड सुधार मॉडल तैयार किया है, जिसने उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में शानदार परिणाम दिए हैं. वैज्ञानिकों का दावा है कि यह मॉडल आने वाले समय में देशभर के पशुपालकों की आय बढ़ाने और डेयरी क्षेत्र को नई मजबूती देने में अहम भूमिका निभा सकता है.
राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत शुरू हुआ था प्रोजेक्ट
यह परियोजना वर्ष 2022 में केंद्र सरकार के राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत शुरू की गई थी. इसका उद्देश्य ऐसे क्षेत्रों में बेहतर नस्ल के पशु तैयार करना था, जहां गुणवत्तापूर्ण जर्मप्लाज्म की कमी के कारण दूध उत्पादन अपेक्षाकृत कम था. इसके लिए उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के 100 गांवों को चुना गया और वहां वैज्ञानिक तरीके से नस्ल सुधार कार्यक्रम चलाया गया. इस पूरे प्रोजेक्ट के लिए करीब 3.75 करोड़ रुपये खर्च किए गए. परियोजना का संचालन मुजफ्फरनगर के लालूखेड़ी स्थित NDRI किसान सेवा केंद्र के माध्यम से किया गया, जहां से प्रशिक्षित टीम लगातार गांवों में पहुंचकर पशुपालकों को तकनीकी सहायता देती रही.
कृत्रिम गर्भाधान तकनीक से मिले बेहतर नतीजे
परियोजना के दौरान वैज्ञानिकों ने उच्च गुणवत्ता वाले सांडों के सीमन का उपयोग करते हुए कृत्रिम गर्भाधान (Artificial Insemination) तकनीक अपनाई. इस अभियान के तहत 39,803 गायों और भैंसों का कृत्रिम गर्भाधान किया गया, जिनमें से 16,200 पशु गर्भवती हुए. इनमें से अधिकांश ने स्वस्थ बछड़ों को जन्म भी दे दिया है. वैज्ञानिकों के अनुसार, इस तकनीक से पैदा हुए बछड़ों में सामान्य पशुओं की तुलना में बेहतर विकास दर देखने को मिली. ये पशु जल्दी परिपक्व हो रहे हैं और भविष्य में अधिक दूध उत्पादन की क्षमता रखते हैं. इससे किसानों को कम लागत में अधिक उत्पादन देने वाले पशु मिल सकेंगे.
किसानों की आय बढ़ाने में मिल सकती है बड़ी मदद
NDRI के शोधकर्ताओं का कहना है कि बेहतर नस्ल के पशु मिलने से पशुपालकों की उत्पादन लागत कम होगी और दूध उत्पादन में बढ़ोतरी होगी. इसका सीधा फायदा किसानों की आमदनी पर पड़ेगा. वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि इस मॉडल को बड़े स्तर पर लागू किया जाता है, तो डेयरी व्यवसाय अधिक लाभकारी बन सकता है. बेहतर बछड़ों के कारण भविष्य में दूध देने वाले पशुओं की गुणवत्ता भी सुधरेगी. इससे किसानों को बार-बार नई नस्ल खरीदने की जरूरत कम पड़ेगी और उनके पशुधन की उत्पादकता लगातार बढ़ती रहेगी.
दूसरे राज्यों के लिए भी बन सकता है उदाहरण
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ICAR-NDRI के निदेशक डॉ. धीर सिंह ने कहा कि यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी एक सफल उदाहरण बन सकता है. राज्य सरकारें इसे अपनाकर अपने यहां नस्ल सुधार कार्यक्रमों को गति दे सकती हैं. इससे न केवल दूध उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि डेयरी क्षेत्र को मजबूती मिलेगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा मिलेगी. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस मॉडल को देशभर में व्यापक स्तर पर लागू किया गया, तो भारत की डेयरी उत्पादन क्षमता और अधिक मजबूत होगी. साथ ही पशुपालकों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आर्थिक विकास को भी नई गति मिलेगी.