गर्मी, चारे की कमी और बीमारी में भी नहीं देती धोखा, पंढरपुरी भैंस की खासियत जानकर आप भी करेंगे पालन

पंढरपुरी भैंस को आज कई पशुपालक अपनी पहली पसंद मानते हैं. इसका पालन न सिर्फ आसान है, बल्कि सही देखभाल के साथ यह अच्छी आमदनी भी देती है. यही वजह है कि अब यह नस्ल सिर्फ अपने मूल क्षेत्र तक सीमित नहीं रही, बल्कि दूसरे राज्यों में भी तेजी से लोकप्रिय हो रही है.

नई दिल्ली | Published: 4 Feb, 2026 | 02:26 PM

Pandharpuri buffalo: भारत में खेती के साथ-साथ पशुपालन हमेशा से किसानों की आमदनी का मजबूत सहारा रहा है. खासतौर पर दुग्ध उत्पादन ऐसा क्षेत्र है, जिसने लाखों ग्रामीण परिवारों को नियमित कमाई का जरिया दिया है. जब भी दूध देने वाले पशुओं की बात होती है, तो भैंस का नाम सबसे पहले लिया जाता है. वजह साफ है भैंस का दूध ज्यादा फैट वाला होता है और बाजार में इसकी कीमत भी अच्छी मिलती है. इन्हीं सब कारणों के बीच एक खास नस्ल है, जिसने पशुपालकों के बीच अलग पहचान बनाई है, और वह है पंढरपुरी भैंस.

पंढरपुरी भैंस को आज कई पशुपालक अपनी पहली पसंद मानते हैं. इसका पालन न सिर्फ आसान है, बल्कि सही देखभाल के साथ यह अच्छी आमदनी भी देती है. यही वजह है कि अब यह नस्ल सिर्फ अपने मूल क्षेत्र तक सीमित नहीं रही, बल्कि दूसरे राज्यों में भी तेजी से लोकप्रिय हो रही है.

पंढरपुरी भैंस की पहचान और इतिहास

पंढरपुरी भैंस का नाम महाराष्ट्र के पंढरपुर क्षेत्र से जुड़ा हुआ है. इस नस्ल की सबसे बड़ी पहचान इसके लंबे और मुड़े हुए सींग हैं, जो इसे दूर से ही अलग पहचान देते हैं. देखने में यह भैंस मजबूत शरीर वाली होती है और कठिन परिस्थितियों में भी खुद को आसानी से ढाल लेती है. यही खासियत इसे अन्य नस्लों से अलग बनाती है.

किन इलाकों में होता है पंढरपुरी भैंस का पालन

पंढरपुरी भैंस का पालन मुख्य रूप से महाराष्ट्र के सोलापुर, कोल्हापुर, सांगली और सतारा जैसे जिलों में किया जाता है. इन इलाकों में कई पीढ़ियों से लोग इस नस्ल का पालन कर रहे हैं. धीरे-धीरे इसकी लोकप्रियता बढ़ने के कारण अब दूसरे राज्यों के किसान और पशुपालक भी इसे अपने डेयरी फार्म में शामिल कर रहे हैं. खासकर वे इलाके जहां गर्म जलवायु है और चारे की कभी-कभी कमी हो जाती है, वहां यह नस्ल बेहतर प्रदर्शन करती है.

पंढरपुरी भैंस की खास खूबियां

पंढरपुरी भैंस की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह गर्म मौसम को आसानी से सहन कर लेती है. जिन इलाकों में दूसरी भैंसें जल्दी बीमार पड़ जाती हैं, वहां पंढरपुरी भैंस अपेक्षाकृत स्वस्थ रहती है. इसे बहुत महंगे चारे या विशेष देखभाल की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे पालन की लागत भी नियंत्रित रहती है.

दूध उत्पादन की बात करें तो एक पंढरपुरी भैंस औसतन रोजाना 7 से 8 लीटर दूध देती है. हालांकि, अच्छी देखभाल और संतुलित आहार मिलने पर उत्पादन इससे ज्यादा भी हो सकता है. इसके दूध में 7 से 8 प्रतिशत तक फैट पाया जाता है, जो इसे बाजार में और भी कीमती बना देता है. यही कारण है कि डेयरी व्यापारी इस दूध को प्राथमिकता देते हैं.

कम खर्च में स्थायी आमदनी का साधन

पंढरपुरी भैंस का पालन छोटे और मध्यम किसानों के लिए भी फायदेमंद है. इसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता अच्छी होती है, जिससे पशु चिकित्सक पर होने वाला खर्च कम रहता है. इसके अलावा, यह स्थानीय चारे पर भी अच्छे से पल जाती है. ऐसे में जिन किसानों के पास सीमित संसाधन हैं, उनके लिए यह नस्ल एक सुरक्षित विकल्प बन सकती है.

पंढरपुरी भैंस की कीमत और बाजार मांग

पंढरपुरी भैंस की कीमत उसकी उम्र, दूध देने की क्षमता और स्वास्थ्य पर निर्भर करती है. आमतौर पर इसकी कीमत 50 हजार रुपये से शुरू होकर 2 लाख रुपये तक पहुंच सकती है. जो भैंस ज्यादा दूध देती है, उसकी कीमत स्वाभाविक रूप से ज्यादा होती है. बाजार में इस नस्ल की मांग लगातार बनी रहती है, इसलिए इसे बेचने में भी ज्यादा परेशानी नहीं होती.

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