भारत को झटका, किर्गिस्तान ने पशु उत्पादों के आयात पर रोक लगाई… ये हैं बड़ी वजह

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार निपाह वायरस एक गंभीर जूनोटिक बीमारी है, यानी यह जानवरों से इंसानों में फैल सकती है. यह वायरस आमतौर पर फल खाने वाले चमगादड़ों और सूअरों के संपर्क से इंसानों तक पहुंचता है. संक्रमित जानवरों के संपर्क में आने या उनके द्वारा दूषित भोजन खाने से संक्रमण फैल सकता है.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 30 Jan, 2026 | 10:02 AM

Nipah virus ban: दुनिया एक बार फिर एक खतरनाक वायरस के नाम से सतर्क हो गई है. निपाह वायरस को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ी है और इसी के चलते मध्य एशियाई देश किर्गिस्तान ने बड़ा एहतियाती कदम उठाया है. किर्गिस्तान सरकार ने भारत से जीवित जानवरों और पशु उत्पादों के आयात पर अस्थायी प्रतिबंध लगा दिया है. यह फैसला पूरी तरह से एहतियात के तौर पर लिया गया है, ताकि देश में किसी भी संभावित संक्रमण को फैलने से रोका जा सके.

क्यों लिया गया यह फैसला

जनवरी के आखिर में भारत के पश्चिम बंगाल राज्य में निपाह वायरस के दो मामलों की पुष्टि हुई थी. दोनों संक्रमित लोग स्वास्थ्यकर्मी बताए गए हैं. इन मामलों के सामने आने के बाद कई देशों ने सतर्कता बढ़ा दी. किर्गिस्तान की पशु चिकित्सा सेवा ने 28 जनवरी को आधिकारिक रूप से भारत से आने वाले जानवरों और उनसे जुड़े उत्पादों पर अस्थायी रोक लगाने की घोषणा की. अधिकारियों का कहना है कि यह कदम पूरी तरह से सावधानी के तौर पर उठाया गया है, ताकि किसी भी तरह का स्वास्थ्य जोखिम पैदा न हो.

निपाह वायरस कितना खतरनाक है

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार निपाह वायरस एक गंभीर जूनोटिक बीमारी है, यानी यह जानवरों से इंसानों में फैल सकती है. यह वायरस आमतौर पर फल खाने वाले चमगादड़ों और सूअरों के संपर्क से इंसानों तक पहुंचता है. संक्रमित जानवरों के संपर्क में आने या उनके द्वारा दूषित भोजन खाने से संक्रमण फैल सकता है. इसके अलावा, निपाह वायरस एक इंसान से दूसरे इंसान में भी फैल सकता है, खासकर नजदीकी संपर्क के जरिए. इस वायरस की मृत्यु दर काफी अधिक मानी जाती है, जो करीब 40 से 75 प्रतिशत तक हो सकती है. यही वजह है कि इसे बेहद गंभीर बीमारी माना जाता है.

किर्गिस्तान में स्थिति क्या है

किर्गिस्तान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने साफ किया है कि फिलहाल देश में निपाह वायरस का कोई भी मामला सामने नहीं आया है. मंत्रालय ने लोगों से घबराने की जरूरत न होने की अपील की है और भरोसा दिलाया है कि देश की स्वास्थ्य व्यवस्था किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है. सरकार का कहना है कि समय रहते सावधानी बरतना ही सबसे बेहतर तरीका है, ताकि भविष्य में किसी भी तरह की आपात स्थिति से बचा जा सके.

हवाई अड्डों और सीमाओं पर बढ़ी निगरानी

निपाह वायरस के खतरे को देखते हुए किर्गिस्तान ने अपने हवाई अड्डों और सीमा चौकियों पर जांच को और सख्त कर दिया है. खास तौर पर भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया से आने वाले यात्रियों पर विशेष नजर रखी जा रही है. बिश्केक और ओश जैसे बड़े हवाई अड्डों पर यात्रियों की थर्मल स्क्रीनिंग की जा रही है, ताकि बुखार जैसे लक्षणों की तुरंत पहचान हो सके. इसके साथ ही सैनिटेशन और क्वारंटीन नियमों को भी कड़ाई से लागू किया गया है.

पड़ोसी देशों की भी सतर्कता

किर्गिस्तान के पड़ोसी देश कजाखस्तान ने भी इसी तरह की सतर्कता दिखाई है. वहां के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया है कि देश में निपाह वायरस का कोई मामला नहीं है, लेकिन फिर भी सभी सीमा चौकियों पर जांच प्रक्रिया को मजबूत किया गया है. भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया से आने वाले यात्रियों की खास निगरानी की जा रही है.

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