धान के खेत में लगी गंभीर बीमारी! पौधों से नहीं निकल रही हैं बालियां.. किसान परेशान

केरल के इडुक्की और वायनाड में धान की फसल को इस साल भारी नुकसान हुआ है. मट्टुकड़ और बाइसन वैली के खेतों में धान की बालियां नहीं निकल रही हैं. पत्ती की बीमारी और खाली दाने देखने को मिले. ठंड और मौसम को मुख्य कारण माना जा रहा है. प्रभावित किसानों को वित्तीय मदद मिल सकती है.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 25 Jan, 2026 | 09:08 AM

Paddy Cultivation: केरल के इडुक्की और वायनाड जिले के ऊंचे इलाकों में इस साल धान की फसल को बड़ी समस्या का सामना करना पड़ रहा है. इस  बार धान के पौधों की बालियां  बाहर नहीं निकल रही हैं, जिससे किसानों की फसल भारी नुकसान का शिकार हो रही है. यह असामान्य घटना इलाके के किसान और कृषि अधिकारी दोनों के लिए चिंता का कारण बन गई है. किसानों के अनुसार, मट्टुकड़ में धान सामान्यत: जनवरी में कटाई के लिए तैयार हो जाता है, लेकिन इस साल कोपलें पौधों से अभी तक नहीं निकली हैं.

द हिन्दू की रिपोर्ट के मुताबिक, मट्टुकड़ पदासेखर समिति के अध्यक्ष ए.सी. थंकेचन अलथारा ने कहा कि पिछले 50 सालों में ऐसा कभी नहीं हुआ. उनके अनुसार समिति के 19 किसान 18 हेक्टेयर में धान उगाते हैं और इस साल उन्हें कोई आय नहीं होगी. उन्होंने कहा कि दिसंबर में पड़ने वाली असाधारण ठंड इसकी मुख्य वजह हो सकती है. चिनकनाल कृषि अधिकारी वरुण कुमार ने भी पुष्टि की कि उनके क्षेत्र के सभी खेत प्रभावित हुए हैं. उन्होंने कहा कि फसल नुकसान  का पता लगाने के लिए सभी खेतों का निरीक्षण किया गया और आगे के अध्ययन के लिए नमूने कर्नाटक कृषि विश्वविद्यालय के शोध केंद्रों को भेजे जाएंगे.

60 फीसदी से ज्यादा फसल नष्ट हो गई

बाइसन वैली कृषि कार्यालय के अधिकारियों ने कहा कि कुछ खेतों में कोपलें बाहर आईं, लेकिन कई पूरी तरह नहीं निकलीं, जिससे धान के दाने खाली रहे और फसल में भारी नुकसान हुआ. पहले इलाके में बैक्टीरियल लीफ ब्लाइट  की समस्या भी सामने आई थी. कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) के अधिकारियों ने फसलों का निरीक्षण कर कीटनाशक लगाने की सलाह दी, लेकिन बाइसन वैली पंचायत के 18 हेक्टेयर खेतों में इस साल 60 फीसदी से ज्यादा फसल नष्ट हो गई.

आंकड़े और तापमान का अध्ययन करना होगा

इसी तरह मक्कुवली (कांजिकुझी पंचायत, इडुक्की) के धान के खेतों में भी पत्ती की बीमारी की शिकायतें आई हैं. डॉ. यामिनी वर्मा, एसोसिएट डायरेक्टर ऑफ रिसर्च और एम्बलावायल कृषि कॉलेज की डीन, ने पुष्टि की कि वायनाड और इडुक्की के ऊंचे इलाकों में कोपलें फंसने की समस्या सामने आई है. उन्होंने कहा कि दिसंबर में पड़ी अत्यधिक ठंड इसकी वजह हो सकती है, लेकिन असली कारण का पता लगाने के लिए मौसम के आंकड़े और तापमान का अध्ययन करना होगा.

प्रभावित किसानों को वित्तीय मदद दी जाएगी

उन्होंने यह भी कहा कि फंसी कोपलें, पत्ती की बीमारी  और खाली दाने दोनों स्थानीय और उच्च उपज वाली धान की किस्मों को प्रभावित कर रहे हैं. केरल कृषि विश्वविद्यालय के इलायची अनुसंधान केंद्र, पम्पाडुमपारा के वैज्ञानिक जल्द ही प्रभावित खेतों का निरीक्षण करेंगे. कृषि विभाग के अधिकारियों ने कहा कि अगर नुकसान ठंड और मौसम से जुड़ा पाया गया, तो प्रभावित किसानों को वित्तीय मदद दी जाएगी.

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Published: 25 Jan, 2026 | 09:07 AM

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