टेक्सटाइल बाजार में भारत की बड़ी छलांग, अमेरिका में चीन को पछाड़…भारत बना नंबर-1

इस बदलाव की बड़ी वजह अमेरिका और चीन के बीच चल रहा व्यापारिक तनाव भी है. पिछले कुछ वर्षों में अमेरिका ने चीन से आने वाले कई उत्पादों पर भारी शुल्क लगाए हैं. इन टैरिफ की दर 10 प्रतिशत से लेकर 125 प्रतिशत तक रही है.चीन पर ज्यादा शुल्क लगने से अमेरिकी कंपनियों ने दूसरे देशों से माल मंगाना शुरू कर दिया.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 12 Mar, 2026 | 08:23 AM

Cotton products exports: दुनिया के टेक्सटाइल बाजार में भारत की स्थिति लगातार मजबूत होती जा रही है. हाल ही में जारी वैश्विक व्यापार रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2025 में भारत ने अमेरिका को कपास से बने उत्पादों के निर्यात में चीन को पीछे छोड़ दिया है. यह बदलाव भारत के टेक्सटाइल उद्योग के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है.

बिजनेसलाइन की खबर के अनुसार, अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा कपास उत्पाद आयातक देश है. ऐसे में इस बाजार में भारत का सबसे बड़ा सप्लायर बनना भारतीय कपड़ा उद्योग के लिए एक अहम मील का पत्थर है. विशेषज्ञों का मानना है कि बदलती वैश्विक व्यापार नीतियों और कंपनियों की नई रणनीतियों के कारण भारत को यह मौका मिला है.

अमेरिका में भारत की हिस्सेदारी बढ़ी

अमेरिकी कृषि विभाग (USDA) की वैश्विक बाजार विश्लेषण रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025 में अमेरिका ने करीब 3.3 मिलियन टन कपास से बने उत्पादों का आयात किया. इसमें रेडीमेड कपड़े, होम टेक्सटाइल और अन्य कपास उत्पाद शामिल हैं. इन आयातों में भारत की हिस्सेदारी लगभग 0.6 मिलियन टन तक पहुंच गई, जबकि चीन से आयात घटकर करीब 0.5 मिलियन टन रह गया. इस तरह भारत अमेरिका के लिए कपास उत्पादों का सबसे बड़ा निर्यातक बन गया.

रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका में कपास उत्पादों का कुल आयात पिछले 15 वर्षों के औसत के बराबर ही रहा, लेकिन बाजार में सप्लाई देने वाले देशों की हिस्सेदारी में बड़ा बदलाव देखा गया.

अमेरिका-चीन व्यापार तनाव का असर

इस बदलाव की बड़ी वजह अमेरिका और चीन के बीच चल रहा व्यापारिक तनाव भी है. पिछले कुछ वर्षों में अमेरिका ने चीन से आने वाले कई उत्पादों पर भारी शुल्क लगाए हैं. इन टैरिफ की दर 10 प्रतिशत से लेकर 125 प्रतिशत तक रही है.चीन पर ज्यादा शुल्क लगने से अमेरिकी कंपनियों ने दूसरे देशों से माल मंगाना शुरू कर दिया. इसका फायदा भारत सहित कई अन्य देशों को मिला.

भारत के अलावा वियतनाम, बांग्लादेश, पाकिस्तान, मेक्सिको और कंबोडिया जैसे देशों ने भी अमेरिकी बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है.

भारत की मजबूत टेक्सटाइल सप्लाई चेन

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत को इस प्रतिस्पर्धा में बढ़त इसलिए भी मिली क्योंकि यहां टेक्सटाइल उत्पादन की पूरी श्रृंखला मौजूद है. भारत में कपास की खेती से लेकर धागा, कपड़ा और तैयार परिधान तक का पूरा उद्योग देश के भीतर ही विकसित है. इस तरह की वर्टिकल सप्लाई चेन होने से भारतीय कंपनियां अंतरराष्ट्रीय मानकों और ट्रेसबिलिटी नियमों का पालन आसानी से कर पाती हैं. इससे अमेरिकी कंपनियों के लिए भारत से सामान खरीदना अधिक भरोसेमंद हो गया है.

चीन पर निर्भरता कम कर रही अमेरिकी कंपनियां

एक और अहम कारण यह भी है कि कई अमेरिकी कंपनियां अब चीन पर अपनी निर्भरता कम कर रही हैं. इसके पीछे उइगर फोर्स्ड लेबर प्रिवेंशन एक्ट (UFLPA) जैसे कानून भी एक वजह हैं.

इन नियमों के चलते कंपनियां चीन से जुड़े सप्लाई चेन जोखिम को लेकर सावधानी बरत रही हैं. यही कारण है कि 2010 में अपने उच्च स्तर पर पहुंचने के बाद से अमेरिका का चीन से कपास उत्पाद आयात लगभग 60 प्रतिशत तक घट चुका है.

अमेरिका में कपड़ों की मांग बढ़ी

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि अमेरिका में कपड़ों की मांग लगातार बढ़ रही है. वर्ष 2025 में वहां कपड़ों की दुकानों की खुदरा बिक्री में लगभग 5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई और यह एक नया रिकॉर्ड स्तर माना जा रहा है. हालांकि कुल आयात स्थिर रहा क्योंकि कई रिटेल कंपनियों ने लागत कम करने के लिए अपने पुराने स्टॉक का इस्तेमाल किया. लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 में अमेरिकी आयात फिर बढ़ सकते हैं, क्योंकि कई रिटेलरों के पास स्टॉक कम हो गया है और उपभोक्ता मांग अभी भी मजबूत बनी हुई है.

वैश्विक कपास बाजार की स्थिति

रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025-26 में वैश्विक कपास उत्पादन बढ़कर लगभग 121 मिलियन बेल (प्रत्येक 480 पाउंड) तक पहुंच सकता है. यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से ब्राजील और चीन में अधिक उत्पादन के कारण होगी.वहीं वैश्विक खपत करीब 118.6 मिलियन बेल रहने का अनुमान है. कुछ देशों में मांग कम होने से खपत में हल्की गिरावट देखी जा सकती है. दुनिया भर में कपास का कुल व्यापार बढ़कर लगभग 43.9 मिलियन बेल तक पहुंचने का अनुमान है, जिसमें ऑस्ट्रेलिया के निर्यात में बढ़ोतरी की संभावना जताई गई है.

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