Shankar Napier Grass: पशुओं के लिए हरा सोना बनी ये खास घास, एक बार लगाएं और पाएं भरपूर चारा

पशुपालकों के लिए शंकर नेपियर घास बेहतर और सस्ता चारा विकल्प बनकर उभर रही है. यह घास बंजर जमीन पर भी आसानी से उग जाती है और एक बार लगाने के बाद कई वर्षों तक उत्पादन देती है. विशेषज्ञों के अनुसार इससे पशुओं की सेहत सुधरती है और दूध उत्पादन में भी अच्छी बढ़ोतरी होती है.

नोएडा | Published: 28 May, 2026 | 04:24 PM

Shankar Napier grass: देश में पशुपालन करने वाले किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती सालभर हरे चारे की व्यवस्था करना होती है. खासकर गर्मियों और सूखे के समय पशुओं के लिए पौष्टिक चारा जुटाना मुश्किल हो जाता है. ऐसे में अब शंकर नेपियर घास पशुपालकों के लिए एक बेहतर विकल्प बनकर उभर रही है. पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम (KVK Noida) के अनुसार यह घास पोषक तत्वों से भरपूर होने के साथ-साथ कम लागत में लंबे समय तक चारे की जरूरत पूरी करती है. इसकी खासियत यह है कि एक बार खेत में लगाने के बाद 4 से 5 वर्षों तक दोबारा बुवाई की जरूरत नहीं पड़ती.

कम लागत में लंबे समय तक मिलेगा हरा चारा

विशेषज्ञ के मुताबिक शंकर नेपियर घास  की खेती करना काफी आसान है. इसे लगाने के बाद किसान कई वर्षों तक लगातार हरा चारा प्राप्त कर सकते हैं. यह घास तेजी से बढ़ती है और अन्य चारा फसलों की तुलना में कई गुना अधिक उत्पादन देती है. सबसे बड़ी बात यह है कि इसकी खेती के लिए अत्यधिक उपजाऊ भूमि की जरूरत नहीं होती. किसान इसे बंजर, खाली या कम उपजाऊ जमीन पर भी आसानी से उगा सकते हैं. इससे उन किसानों को काफी फायदा हो सकता है जिनके पास सीमित कृषि संसाधन हैं.

पशुओं की सेहत और दूध उत्पादन में फायदेमंद

पशु चिकित्सकों के अनुसार शंकर नेपियर घास पशुओं के लिए बेहद पौष्टिक  मानी जाती है. इसमें शुष्क पदार्थ की मात्रा लगभग 16 से 17 प्रतिशत तक होती है, जबकि क्रूड प्रोटीन 9 से 14 प्रतिशत तक पाया जाता है. इसके अलावा इसमें कैल्शियम और फास्फोरस भी अच्छी मात्रा में मौजूद होता है. ये घास रसदार और मुलायम होती है, इसलिए पशु इसे बड़े चाव से खाते हैं और आसानी से पचा लेते हैं. नियमित रूप से यह चारा खिलाने से पशुओं की सेहत बेहतर रहती है और दूध उत्पादन में भी बढ़ोतरी देखने को मिलती है. यही कारण है कि कई पशुपालक इसे हरा सोना भी कहने लगे हैं.

बार-बार बुवाई का खर्च नहीं

शंकर नेपियर घास की सबसे बड़ी खासियत इसकी लंबी अवधि तक उत्पादन क्षमता है. एक बार इसकी बुवाई करने के बाद किसान अगले 4 से 5 वर्षों तक लगातार चारा प्राप्त कर सकते हैं. इससे हर सीजन में दोबारा बीज और खेती पर होने वाला खर्च बच जाता है. विशेषज्ञ का कहना है कि ये घास कम पानी में भी अच्छी तरह बढ़ती है, इसलिए पानी की कमी वाले क्षेत्रों में भी इसकी खेती सफल  हो सकती है. इससे छोटे और मध्यम पशुपालकों की लागत कम होगी और मुनाफा बढ़ेगा.

पशुपालकों के लिए बेहतर विकल्प बन रही घास

देश में डेयरी और पशुपालन व्यवसाय तेजी  से बढ़ रहा है, ऐसे में सस्ते और पौष्टिक चारे की मांग भी लगातार बढ़ रही है. शंकर नेपियर घास इस जरूरत को पूरा करने में मददगार साबित हो सकती है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर किसान वैज्ञानिक तरीके से इसकी खेती करें तो उन्हें सालभर पशुओं के लिए हरा चारा उपलब्ध रहेगा. इससे न केवल पशुओं की सेहत सुधरेगी, बल्कि दूध उत्पादन बढ़ने से किसानों की आमदनी में भी इजाफा होगा.

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