सिरोही नस्ल की बकरी बनी किसानों की एटीएम मशीन! कम खर्च में लाखों की कमाई
सिरोही नस्ल की बकरी कम खर्च और कम मेहनत में किसानों के लिए बड़ा मुनाफा दे रही है. यह नस्ल जल्दी बढ़ती है, बीमारियों से कम ग्रसित होती है और दूध व मांस दोनों से डबल कमाई का मौका देती है.
Sirohi Goat : अगर आप गांव में रहकर कोई ऐसा काम शुरू करना चाहते हैं, जिससे हर महीने अच्छी कमाई हो और खर्च भी ज्यादा न आए, तो सिरोही नस्ल की बकरी आपके लिए सोने का मौका साबित हो सकती है. यह बकरी अपनी खास खूबियों की वजह से किसानों के बीच चलती–फिरती एटीएम मशीन कही जाती है. इस नस्ल की सबसे बड़ी ताकत है–तेजी से बढ़ना, कम खर्च में पालन और दूध व मांस दोनों का मुनाफा.
सिरोही नस्ल की खासियत
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सिरोही नस्ल की बकरी मुख्य रूप से राजस्थान के सिरोही जिले में पाई जाती है, लेकिन अब उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा और बिहार तक इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है. यह भूरे रंग की बकरी मुड़े हुए सींग, लटके कान और छोटे–मोटे बालों वाली होती है इस बकरी की खास बात यह है कि यह सूखे और गर्म इलाकों में भी आसानी से पल जाती है. सिरोही बकरी हर दिन लगभग 2 से 3 लीटर दूध देती है और 6 से 8 महीने में प्रजनन के लिए तैयार हो जाती है.
दूध और मांस दोनों का फायदा
सिरोही नस्ल किसानों को दोहरा फायदा देती है. एक तरफ यह बकरी अच्छा दूध देती है, वहीं दूसरी ओर इसका मांस भी बाजार में महंगे दामों पर बिकता है. इसका मांस स्वादिष्ट और उच्च गुणवत्ता वाला माना जाता है, जिसकी मांग शहरों से लेकर विदेशों तक बनी रहती है. इस नस्ल की बकरी एक बार में 1 से 2 बच्चे देती है और साल में दो बार बच्चे देने की क्षमता रखती है. इस तरह एक किसान थोड़े समय में दर्जनों बकरियां तैयार कर सकता है और बाजार में बेचकर लाखों रुपये कमा सकता है.
कम खर्च में ज्यादा मुनाफा
सिरोही नस्ल की बकरी पालन में ज्यादा खर्च नहीं आता. इसके लिए किसी महंगे चारे या विशेष देखभाल की जरूरत नहीं होती. यह बकरी सामान्य सूखे चारे, पत्तियों और खेतों में मिलने वाले घास से भी अपना पेट भर लेती है. बकरी पालन शुरू करने के लिए किसान 5 से 10 बकरियों से शुरुआत कर सकते हैं. अगर सही देखभाल की जाए, तो 6 महीने के अंदर यह संख्या दोगुनी हो सकती है. इस व्यवसाय में निवेश कम और मुनाफा ज्यादा होता है, यही वजह है कि गांवों में युवा तेजी से इस ओर रुख कर रहे हैं.
बीमारियों से कम ग्रसित
किसानों के बीच सिरोही नस्ल की लोकप्रियता की एक और बड़ी वजह है कि यह बकरी बीमारियों से कम प्रभावित होती है. इसकी रोग-प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है और बदलते मौसम में भी यह स्वस्थ रहती है. बस सफाई और समय पर टीकाकरण का ध्यान रखने की जरूरत होती है. इस नस्ल की बकरियां आसानी से अपने बच्चों को जन्म देती हैं और उनकी मृत्यु दर भी बहुत कम होती है. इससे किसानों को नुकसान का खतरा नहीं रहता और स्थिर आमदनी बनी रहती है.
सरकारी मदद और बढ़ती मांग
सरकार भी बकरी पालन को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चला रही है. पशुपालन विभाग की विभिन्न योजनाओं के तहत किसानों को सब्सिडी, प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग दिया जा रहा है. बाजार में सिरोही बकरी का दूध और मांस दोनों ऊंचे दामों पर बिकते हैं, जिससे इसकी मांग लगातार बढ़ रही है. अगर किसान योजना के साथ आधुनिक तरीकों को अपनाएं, तो सिरोही नस्ल का पालन उन्हें कुछ ही समय में लखपति किसान बना सकता है.