श्रीलक्ष्मी ने बैलों से बनाया अनोखा रिश्ता, प्यार और मेहनत से प्रतियोगिताओं में बनाई अलग पहचान
श्रीलक्ष्मी की कहानी इंसान और जानवर के बीच अनोखे रिश्ते को दिखाती है. उन्होंने डर को पीछे छोड़ बैलों को अपना परिवार बना लिया. आज वे उनके साथ प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर नई पहचान बना रही हैं और लोगों को यह सिखा रही हैं कि प्यार से हर रिश्ता मजबूत होता है.
Animal Bonding: अक्सर आपने बैलों को खेतों में काम करते या दूर से गुजरते देखा होगा, लेकिन क्या कभी किसी महिला को बैल के साथ ऐसे चलते देखा है, जैसे वह उसका सबसे करीबी साथी हो? यह कहानी है आंध्र प्रदेश की श्रीलक्ष्मी की, जिन्होंने एक बैल को सिर्फ पालतू नहीं बनाया, बल्कि उसे अपने परिवार का हिस्सा बना लिया. उनका यह अनोखा रिश्ता आज सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है और लोगों को हैरान भी कर रहा है.
महिला और बैल की अनोखी जोड़ी बनी चर्चा का विषय
श्रीलक्ष्मी ने बीबीसी के इंटरव्यू में बताया कि जब वो अपने बैल के साथ सड़क पर निकलती हैं, तो लोग उन्हें देखकर रुक जाते हैं. बैल बिना किसी डर या रस्सी के खींचे, बस उनके पीछे-पीछे चलता है. यही वजह है कि उनके कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुके हैं. आमतौर पर ऐसी प्रतियोगिताओं में महिलाएं कम ही नजर आती हैं, लेकिन श्रीलक्ष्मी ने इस सोच को बदल दिया. उन्होंने बताया कि उन्हें लगता है कि बैल इंसानों से भी ज्यादा प्यार करने वाले होते हैं. अगर उन्हें प्यार दिया जाए, तो वे भी उसी तरह जवाब देते हैं.
पति से मिली प्रेरणा, डर से प्यार तक का सफर
श्रीलक्ष्मी को बैलों से लगाव शुरू से नहीं था. उनके पति रामकृष्ण साल 2017 से बैल पाल रहे थे और उन्हें प्रतियोगिताओं में ले जाते थे. शुरुआत में श्रीलक्ष्मी को यह सब पसंद नहीं था और उन्हें बैलों से डर भी लगता था. लेकिन धीरे-धीरे उनके पति ने उन्हें समझाया कि अगर हम जानवरों को प्यार देंगे, तो वे भी हमें समझेंगे और नुकसान नहीं पहुंचाएंगे. इसी बात ने श्रीलक्ष्मी की सोच बदल दी. फिर उन्होंने बैलों के साथ समय बिताना शुरू किया, उन्हें सहलाया, उनसे बातें कीं और धीरे-धीरे उनका डर खत्म हो गया. अब वही बैल उनके सबसे करीबी साथी बन चुके हैं.
सिंहा से जुड़ा भावनात्मक रिश्ता, आज भी याद में छलकते आंसू
श्रीलक्ष्मी के जीवन में सिंहा नाम का एक बैल खास जगह रखता था. वह हर प्रतियोगिता में जीतता था और उनके परिवार की पहचान बन गया था. यहां तक कि उन्हें उस बैल के लिए एक करोड़ रुपये तक का ऑफर मिला, लेकिन उन्होंने उसे बेचने से साफ इनकार कर दिया. उनके लिए पैसा नहीं, बल्कि उस बैल का साथ ज्यादा मायने रखता था. लेकिन एक दिन अचानक बीमारी की वजह से ‘सिंहा’ की मौत हो गई. यह घटना श्रीलक्ष्मी के लिए बहुत बड़ा झटका थी. आज भी जब वह उसकी वीडियो देखती हैं, तो उनकी आंखें भर आती हैं. उन्होंने बताया कि सिंहा उनके लिए सिर्फ एक जानवर नहीं, बल्कि परिवार का हिस्सा था.
अब 15 बैलों का परिवार, हर महीने लाखों खर्च
आज श्रीलक्ष्मी और उनके पति के पास करीब 15 बैल हैं, जिनकी वे पूरी जिम्मेदारी से देखभाल करते हैं. बैलों को खिलाने, उनकी देखभाल और प्रतियोगिताओं की तैयारी पर हर महीने करीब 5 लाख रुपये तक खर्च होता है. वे बैलों को खास डाइट देते हैं, समय-समय पर अभ्यास कराते हैं और उनके लिए अलग से हेल्पर भी रखे गए हैं. हर तीन दिन में बैलों की प्रैक्टिस कराई जाती है ताकि वे प्रतियोगिता के लिए तैयार रहें. श्रीलक्ष्मी कहती हैं कि बैल उनकी बात समझते हैं. जब वे उन्हें नाम लेकर बुलाती हैं, तो वे तुरंत प्रतिक्रिया देते हैं. उनके अनुसार, ये जानवर भी इंसानों की तरह भावनाएं समझते हैं और प्यार का जवाब प्यार से देते हैं.