Animal Health: गांव और शहर की सड़कों पर अक्सर गाय, बैल या अन्य पशु कचरे के ढेर में खाना ढूंढते नजर आते हैं. लेकिन कई बार यही कचरा उनके लिए जानलेवा साबित हो जाता है. खाने के साथ पेट में चली जाने वाली प्लास्टिक और पॉलीथीन पशुओं के स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुंचाती है. इसी खतरे को देखते हुए बिहार सरकार का डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग लोगों को जागरूक कर रहा है कि प्लास्टिक मुक्त वातावरण बनाकर पशुधन की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए.
पशुओं के लिए बड़ा खतरा बन रही प्लास्टिक
बिहार सरकार के डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग और पशुपालन निदेशालय के अनुसार प्लास्टिक और पॉलीथीन आज पशुओं के लिए बड़ी समस्या बनती जा रही है. सड़कों और कूड़ेदानों के पास पड़े कचरे में जब भोजन के अवशेष होते हैं, तो पशु उसे खाने लगते हैं. इस दौरान भोजन के साथ पॉलीथीन और प्लास्टिक भी उनके पेट में चली जाती है.
पशुओं का पाचन तंत्र प्लास्टिक को पचा नहीं पाता. यह पेट में जमा होकर धीरे-धीरे गंभीर बीमारियों का कारण बनता है. कई मामलों में पशु खाना छोड़ देते हैं, कमजोर हो जाते हैं और उनकी जान तक चली जाती है. यही वजह है कि विभाग लगातार लोगों को सावधान रहने और कचरा सही तरीके से फेंकने की सलाह दे रहा है.
प्लास्टिक पशुओं के पेट में कैसे पहुंचती है
अक्सर लोग बचा हुआ खाना पॉलीथीन में भरकर बाहर फेंक देते हैं. सड़क किनारे या खाली जगहों पर कचरा डालना भी आम बात है. ऐसे में पशु उस कचरे को भोजन समझकर खाने लगते हैं. जब पशु पॉलीथीन के साथ खाना निगल लेते हैं, तो वह उनके पेट में जाकर जमा हो जाती है. धीरे-धीरे कई पॉलीथीन जमा होने से पेट में बड़ी मात्रा में प्लास्टिक इकट्ठा हो जाती है. इससे पेट में दर्द, सूजन और पाचन की समस्या पैदा हो जाती है. विशेषज्ञ बताते हैं कि कई बार पशुओं के ऑपरेशन में उनके पेट से कई-कई किलो प्लास्टिक निकाली गई है. यह स्थिति साफ बताती है कि हमारी छोटी-सी लापरवाही पशुओं के लिए कितनी खतरनाक हो सकती है.

कचरा सही जगह डालें, प्लास्टिक से पशुओं को बचाएं.
प्लास्टिक से पशुओं के स्वास्थ्य पर गंभीर असर
प्लास्टिक पशुओं के शरीर में कई तरह की समस्याएं पैदा करती है. सबसे पहले उनका पाचन तंत्र प्रभावित होता है. भोजन सही से नहीं पचता और पेट में गैस या सूजन होने लगती है. धीरे-धीरे पशु कमजोर होने लगते हैं और उनका दूध उत्पादन भी कम हो सकता है. कई बार पेट में प्लास्टिक जमा होने से आंतों में रुकावट हो जाती है, जिससे पशु गंभीर बीमारी का शिकार हो जाते हैं. डेयरी और पशुपालन से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समय रहते सावधानी न बरती जाए, तो यह समस्या पशुधन के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है. इसलिए जरूरी है कि लोग प्लास्टिक के उपयोग को कम करें और कचरे का सही प्रबंधन करें.
सरकार चला रही जागरूकता अभियान
बिहार सरकार का डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग इस समस्या को लेकर लगातार जागरूकता अभियान चला रहा है. विभाग लोगों से अपील कर रहा है कि वे भोजन या कचरा पॉलीथीन में भरकर सड़क किनारे न फेंकें. इसके साथ ही पशुपालकों को भी सलाह दी जा रही है कि वे अपने पशुओं को साफ-सुथरा और सुरक्षित चारा दें. खुले में पड़े कचरे से पशुओं को दूर रखें. अगर किसी पशु में बीमारी के लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करें. सरकार का मानना है कि अगर समाज के सभी लोग मिलकर प्रयास करें, तो इस समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है.
प्लास्टिक मुक्त वातावरण बनाना जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि प्लास्टिक से होने वाले नुकसान से बचने का सबसे अच्छा तरीका यही है कि हम प्लास्टिक का इस्तेमाल कम करें और कचरे को सही जगह पर फेंकें. घर का बचा हुआ खाना खुले में या पॉलीथीन में फेंकने के बजाय सुरक्षित तरीके से निपटाया जाए. अगर लोग थोड़ी-सी जिम्मेदारी निभाएं, तो न सिर्फ पर्यावरण सुरक्षित रहेगा बल्कि पशुधन भी स्वस्थ रहेंगे. पशु हमारे जीवन और खेती-किसानी का अहम हिस्सा हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा करना हम सभी की जिम्मेदारी है.