गर्मी में दुधारू पशुओं को भूसा खिलाना पड़ सकता है भारी, ये छोटी गलती घटा सकती है दूध उत्पादन

गर्मी बढ़ते ही दुधारू पशुओं की देखभाल करना बेहद जरूरी हो जाता है. विशेषज्ञों के अनुसार ज्यादा भूसा खिलाने, कम पानी देने और तेज धूप में रखने से पशु बीमार पड़ सकते हैं. सही आहार, हरा चारा और ठंडा पानी देने से पशु स्वस्थ रहते हैं और दूध उत्पादन भी बेहतर बना रहता है.

नोएडा | Updated On: 11 May, 2026 | 07:41 PM

Animal Husbandry: गर्मी का मौसम शुरू होते ही दुधारू पशुओं की देखभाल करना पशुपालकों के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है. तेज धूप, गर्म हवाएं और बढ़ता तापमान पशुओं की सेहत पर बुरा असर डालता है. कई बार पशु सुस्त हो जाते हैं, कम पानी पीते हैं और दूध देना भी कम कर देते हैं. अगर समय रहते सही देखभाल न की जाए, तो पशु बीमार भी पड़ सकते हैं. गर्मी के मौसम में पशुओं के खानपान और रहने की व्यवस्था पर विशेष ध्यान देना जरूरी होता है. खासतौर पर दुधारू पशुओं को संतुलित आहार और पर्याप्त पानी देना बेहद जरूरी माना जाता है. सही देखभाल से पशुओं को गर्मी से बचाया जा सकता है और दूध उत्पादन भी बेहतर बनाए रखा जा सकता है.

गर्मी में ज्यादा भूसा खिलाना क्यों नुकसानदायक

कई पशुपालक गर्मियों में भी पशुओं को ज्यादा मात्रा में सूखा चारा और भूसा खिलाते  रहते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, यह आदत दुधारू पशुओं के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है. भूसा और सूखे चारे से शरीर में गर्मी बढ़ती है, जिससे पशु जल्दी थक जाते हैं. अधिक गर्मी होने पर पशु खाना कम कर देते हैं और उनका दूध उत्पादन भी घटने लगता है. यही वजह है कि गर्मियों में केवल सूखे चारे पर निर्भर रहना सही नहीं माना जाता. विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि पशुओं को हरे और सूखे चारे का संतुलन बनाकर खिलाना चाहिए. इससे उन्हें जरूरी पोषण भी मिलता है और शरीर में ठंडक भी बनी रहती है. यदि पशु को केवल सूखा चारा दिया जाए, तो पाचन संबंधी दिक्कतें भी बढ़ सकती हैं. इसलिए पशुपालकों को गर्मी के मौसम में खानपान को लेकर ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत होती है.

हरा चारा पशुओं के लिए क्यों जरूरी

गर्मी में हरा चारा दुधारू पशुओं  के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है. ज्वार, मक्का, चरी और नेपियर घास जैसे चारे में पानी की मात्रा अधिक होती है. इससे पशुओं के शरीर को ठंडक मिलती है और वे स्वस्थ रहते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, हरा चारा दूध उत्पादन बढ़ाने में भी मदद करता है. इसके अलावा पशु ज्यादा सक्रिय रहते हैं और शरीर में पानी की कमी नहीं होती. हालांकि हरा चारा काटते समय खेत की नमी का ध्यान रखना बेहद जरूरी है. यदि खेत में नमी नहीं होगी, तो चारे में जहरीले तत्व बनने का खतरा बढ़ सकता है. ऐसा चारा पशुओं के लिए खतरनाक साबित हो सकता है. अगर किसी पशुपालक के पास पर्याप्त हरा चारा नहीं है, तो वह अनाज का उपयोग भी कर सकता है. लेकिन अनाज को सीधे खिलाने के बजाय पहले पानी में भिगोना बेहतर माना जाता है. इससे पशु आसानी से उसे पचा पाते हैं.

पानी और ठंडक का रखें खास ध्यान

गर्मी के मौसम में पशुओं  को सबसे ज्यादा जरूरत साफ और ठंडे पानी की होती है. तापमान बढ़ने पर पशु सामान्य दिनों की तुलना में ज्यादा पानी पीते हैं. ऐसे में दिन में कई बार पानी बदलना जरूरी माना जाता है. विशेषज्ञों का कहना है कि गंदा या गर्म पानी पशुओं की सेहत खराब कर सकता है. इसलिए हमेशा ताजा और साफ पानी ही देना चाहिए. इसके अलावा पशुओं को तेज धूप से बचाना भी जरूरी है. उन्हें छांव वाली जगह पर रखना चाहिए. यदि संभव हो, तो पशुशाला में पंखा या कूलर जैसी व्यवस्था करना भी फायदेमंद रहता है. दोपहर के समय पशुओं को बाहर चराने ले जाना नुकसानदायक हो सकता है. सुबह और शाम के समय ही चराने ले जाना बेहतर माना जाता है. समय-समय पर पशुओं को नहलाने से भी शरीर का तापमान नियंत्रित रहता है और उन्हें गर्मी से राहत मिलती है.

सही देखभाल से बढ़ेगा दूध उत्पादन

विशेषज्ञों का मानना है कि गर्मियों में छोटी-छोटी लापरवाहियां भी दुधारू पशुओं की सेहत  और दूध उत्पादन पर बड़ा असर डाल सकती हैं. यदि पशुओं को संतुलित आहार, हरा चारा और पर्याप्त पानी दिया जाए, तो वे गर्मी में भी स्वस्थ रह सकते हैं. सही खानपान से पशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी मजबूत होती है. इससे बीमारियों का खतरा कम होता है और पशुपालकों का इलाज पर होने वाला खर्च भी बचता है. आज कई पशुपालक गर्मियों में विशेष देखभाल अपनाकर दूध उत्पादन को बेहतर बनाए रख रहे हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पशुपालक समय पर सही कदम उठाएं, तो गर्मी के मौसम में भी दुधारू पशुओं से अच्छा उत्पादन हासिल किया जा सकता है.

Published: 11 May, 2026 | 11:30 PM

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