Animal Feeding: पशुपालन में कई बार किसान अच्छा चारा और दाना देने के बाद भी उम्मीद के मुताबिक दूध नहीं ले पाते. इसकी बड़ी वजह सिर्फ चारे की मात्रा नहीं, बल्कि खिलाने का सही क्रम भी होता है. अगर सुबह पशु को सही समय और सही क्रम में पानी, हरा चारा, सूखा चारा और दाना दिया जाए, तो उसका पाचन बेहतर रहता है, शरीर स्वस्थ रहता है और दूध उत्पादन में साफ बढ़ोतरी देखने को मिलती है. उत्तर प्रदेश पशुपालन विभाग के अनुसार, सुबह की खुराक का सही तरीका अपनाकर पशुपालक कम खर्च में भी ज्यादा दूध और बेहतर स्वास्थ्य पा सकते हैं. यही छोटी आदत पशुपालन को ज्यादा फायदे का सौदा बना सकती है.
दिन की शुरुआत साफ पानी से करें, यही है पहला नियम
उत्तर प्रदेश पशुपालन विभाग के अनुसार रातभर आराम के बाद पशु को सबसे पहले प्यास लगती है. इसलिए सुबह उठते ही सबसे पहले ताजा और साफ पानी जरूर पिलाना चाहिए. इससे पशु का शरीर हाइड्रेट रहता है और पाचन तंत्र सही तरीके से काम शुरू करता है. अगर पानी पहले नहीं दिया जाता, तो पशु चारा ठीक से नहीं खाता और उसका पाचन भी कमजोर हो सकता है. गर्मी के मौसम में यह नियम और भी ज्यादा जरूरी हो जाता है. साफ पानी देने से शरीर का तापमान संतुलित रहता है और दूध बनने की प्रक्रिया भी बेहतर होती है. विशेषज्ञ मानते हैं कि दूध का बड़ा हिस्सा पानी से बनता है, इसलिए पानी की कमी सीधे दूध उत्पादन पर असर डालती है. यही वजह है कि सुबह की पहली खुराक पानी होनी चाहिए.
पानी के बाद हरा चारा, पाचन और दूध दोनों के लिए फायदेमंद
पानी पिलाने के बाद दूसरा कदम हरा चारा देना है. विभाग के अनुसार नेपियर, बरसीम, ज्वार या अन्य हरे चारे पशु के पाचन के लिए बहुत अच्छे माने जाते हैं. हरा चारा शरीर को जरूरी पोषक तत्व देता है और रूमेन (पेट का मुख्य भाग) को सक्रिय करता है. इससे पशु आराम से चारा चबाता है और उसका पाचन लंबे समय तक अच्छा बना रहता है. हरा चारा दूध बढ़ाने में भी मदद करता है, क्योंकि इसमें नमी, प्रोटीन और मिनरल्स भरपूर होते हैं. अगर पशुपालक नियमित रूप से सुबह हरा चारा देते हैं, तो पशु की भूख भी अच्छी रहती है और उसका स्वास्थ्य मजबूत होता है.
फिर दें सूखा चारा, पेट रहेगा संतुलित
हरा चारा देने के बाद सूखा चारा या भूसा देना चाहिए. उत्तर प्रदेश पशुपालन विभाग के अनुसार यह पेट को संतुलित रखने में मदद करता है और पाचन को मजबूत बनाता है. सूखा चारा रेशेदार होता है, जिससे पशु का जुगाली करना बेहतर होता है. इससे पेट लंबे समय तक भरा रहता है और बार-बार भूख नहीं लगती. साथ ही यह एसिडिटी और पेट खराब होने जैसी समस्याओं से भी बचाता है. अगर हरे चारे के बाद सूखा चारा सही मात्रा में दिया जाए, तो पशु का पाचन बेहतर रहता है और दाना भी आसानी से पच जाता है. इससे पशु ज्यादा सक्रिय और स्वस्थ रहता है.
अंत में दें दाना, तभी मिलेगा ज्यादा दूध
विभाग के अनुसार सबसे आखिर में दाना या कंसंट्रेट फीड देना चाहिए. कई पशुपालक शुरुआत में ही दाना दे देते हैं, जिससे पाचन बिगड़ने का खतरा बढ़ जाता है. जब पहले पानी, हरा और सूखा चारा दिया जाता है, तो पशु का पेट दाने को पचाने के लिए तैयार हो जाता है. ऐसे में दाना अच्छे से पचता है और शरीर को ज्यादा ऊर्जा मिलती है. यही ऊर्जा दूध उत्पादन बढ़ाने में सबसे ज्यादा मदद करती है. दाना हमेशा पशु की दूध देने की क्षमता और वजन के हिसाब से देना चाहिए. संतुलित मात्रा में दिया गया दाना दूध की मात्रा और गुणवत्ता दोनों को बेहतर करता है.