बकरियों के लिए काल बना यह छोटा मच्छर, अगर जीभ पड़ रही है नीली तो तुरंत अपनाएं ये उपाय
बकरियों में तेजी से फैल रहा ब्लू टंग रोग पशुपालकों के लिए बड़ी मुसीबत बन गया है. मच्छरों से फैलने वाली इस बीमारी में बकरियों की जीभ नीली पड़ जाती है और तेज बुखार के कारण उनकी मौत हो जाती है. समय रहते लक्षणों को पहचान कर और सही सावधानी बरतकर आप अपने पशुओं की जान बचा सकते हैं.
Blue Tongue Disease : पशुपालन को गांवों में खेती का एटीएम कहा जाता है, क्योंकि जरूरत पड़ने पर बकरियां ही किसान के सबसे काम आती हैं. लेकिन इन दिनों बकरियों पर ब्लू टंग (नीली जीभ) नाम की बीमारी का कहर टूट रहा है. यह बीमारी इतनी खतरनाक है कि अगर सही समय पर ध्यान न दिया जाए, तो बाड़े की 30 से 40 प्रतिशत बकरियां दम तोड़ देती हैं. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस जानलेवा बीमारी को फैलाने वाला कोई और नहीं, बल्कि एक छोटा सा मच्छर है.
कैसे फैलता है यह जानलेवा संक्रमण?
ब्लू टंग कोई छुआछूत की बीमारी नहीं है जो एक बकरी के पास बैठने से दूसरी को हो जाए, बल्कि इसे क्यूलिकोइड्स नाम का एक छोटा मच्छर फैलाता है. यह मच्छर जब किसी बीमार जानवर को काटता है और फिर वही मच्छर किसी तंदुरुस्त बकरी को काट लेता है, तो वायरस उसके शरीर में पहुंच जाता है. अक्सर जल-जमाव वाली जगहों और गंदगी वाले बाड़ों में ये मच्छर पनपते हैं और रात के अंधेरे में बकरियों का शिकार करते हैं.
इन लक्षणों को भूलकर भी न करें नजरअंदाज
बीमार बकरी को पहचानना बहुत आसान है, बस थोड़ी सावधानी की जरूरत है. अगर आपकी बकरी सुस्त है, तो सबसे पहले उसका तापमान चेक करें. इस बीमारी में बुखार 103 से 105 डिग्री तक पहुंच जाता है. जैसा कि नाम से साफ है, इसमें बकरी की जीभ नीली पड़ने लगती है और चेहरे व मुंह पर भारी सूजन आ जाती है. नाक से लगातार पानी बहना और खाना-पीना छोड़ देना इसके शुरुआती संकेत हैं. देखते ही देखते बकरी इतनी कमजोर हो जाती है कि वह खड़ी भी नहीं हो पाती.
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बचाव ही है सबसे बड़ा इलाज
चूंकि यह एक वायरल बीमारी है, इसलिए इसका कोई पक्का इलाज ढूंढने से बेहतर है कि बचाव किया जाए. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पशुपालक अपने बाड़े के आसपास जल-जमाव न होने दें. मच्छरों को भगाने के लिए शाम के समय नीम की पत्ती का धुआं करें या मच्छर भगाने वाले स्प्रे का उपयोग करें. अगर मुमकिन हो, तो बाड़े की खिड़कियों पर बारीक जाली लगवाएं ताकि मच्छर अंदर न घुस सकें. साफ-सफाई और पौष्टिक आहार बकरियों की इम्यूनिटी बढ़ाते हैं, जिससे वे बीमारी से लड़ पाती हैं.
बीमार बकरी का तुरंत करें ये उपचार
अगर आपको किसी भी बकरी में लक्षण दिखें, तो सबसे पहले उसे बाकी स्वस्थ बकरियों से अलग कर दें. खुद डॉक्टर बनने के बजाय तुरंत नजदीकी पशु अस्पताल से संपर्क करें. शुरुआती दौर में अगर सपोर्टिव ट्रीटमेंट (बुखार और दर्द की दवाएं) मिल जाए, तो जान बचाई जा सकती है. साथ ही, समय पर टीकाकरण (Vaccination) करवाना ही इस बीमारी से बचने का सबसे पक्का रास्ता है. याद रखें, थोड़ी सी सतर्कता आपकी मेहनत और धन दोनों को बचा सकती है.