लंबागांव की महिलाओं के FPO का कमाल, 500 किसानों की मासिक कमाई 50 हजार तक पहुंची

कृषि उपनिदेशक कुलदीप धीमान ने कहा कि हल्दी की खेती से किसानों की आय में वृद्धि हुई है. किसानों के संगठित प्रयास और सरकारी योजनाओं के प्रभावी उपयोग का सफल उदाहरण यह लंबागांव एफपीओ है. यह एफपीओ दर्शाता है कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सरकारी सहयोग से गांवों को आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है.

नोएडा | Updated On: 19 Feb, 2026 | 03:46 PM

हिमाचल प्रदेश में महिलाओं के नेतृत्व में शुरू हुआ एफपीओ आज 500 से ज्यादा किसानों को आत्मनिर्भर बना चुका है. दावा है कि एफपीओ से जुड़े किसानों की मासिक कमाई 7 हजार रुपये से लेकर 50 हजार रुपये तक है. एफपीओ के जरिए किसान जैविक हल्दी, अदरक, मक्का और पशुपालन कर रहे हैं. वैज्ञानिक तरीके से की जा रही खेती से लागत कम हुई है तो वहीं उत्पादन बढ़ाने में मदद मिली है. समर्थन मूल्य के चलते किसानों को कीमत भी ज्यादा मिल रही है.

लंबागांव में एफपीओ मॉडल से 500 किसान बने आत्मनिर्भर

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिला के लंबागांव में महिलाओं के नेतृत्व में लंबागांव मिल्क फेड फार्मर प्रोड्यूसर एफपीओ शुरू किया गया है. एफपीओ की 10 निदेशकों में 5 महिलाएं हैं. एफपीओ ने 500 से अधिक किसानों को नई दिशा देते हुए गांव को आत्मनिर्भरता की राह पर अग्रसर किया है. मई 2023 में शुरू हुई इस पहल से ब्लॉक लंबागांव के सुआ गांव (तहसील जयसिंहपुर) के किसान संगठित होकर लाभकारी खेती की ओर लौटे हैं. एफपीओ की खासियत इसका महिला नेतृत्व है. 5 महिला निदेशक हैं और संचालन में भी उनकी सक्रिय भूमिका है, जिससे ग्रामीण महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा मिला है. महिला किसान सिमरा देवी ने कहा कि पहले इलाके में खेती लगभग बंद हो गई थी, लेकिन ग्राम विकास समिति और एफपीओ के गठन के बाद किसानों को खेती करने के नए तरीके मिले हैं.

तारबंदी से फसल नुकसान होना बंद

कांगड़ा जिले के कृषि उपनिदेशक कुलदीप धीमान ने कहा कि हल्दी की खेती से किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है. कांगड़ा जिले के उपायुक्त हेमराज बैरवा ने कहा कि किसानों के संगठित प्रयास और सरकारी योजनाओं के प्रभावी उपयोग का सफल उदाहरण बताया है. लंबागांव का यह मॉडल दर्शाता है कि संगठन, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सरकारी सहयोग से गांवों को आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है. इस पहल को आगे बढ़ाने में हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. डॉ. अशोक कुमार सरयाल की महत्वपूर्ण भूमिका रही. उनके मार्गदर्शन में किसानों को वैज्ञानिक खेती अपनाने और आवारा पशुओं से सुरक्षित फसलों – जैविक हल्दी व अदरक की खेती के लिए प्रेरित किया गया. वहीं, खेतों की तारबंदी से आवारा पशुओं से फसलों का नुकसान होना भी बंद हो गया है.

कांगड़ा जिले के उपायुक्त हेमराज बैरवा (ऊपर).
महिला किसान सिमरा देवी (नीचे).

किसानों को मक्का का दोगुना भाव मिल रहा

कृषि विभाग के सहयोग से 7.5 हेक्टेयर क्षेत्र में लगभग 20.50 लाख रुपये की लागत से सोलर फेंसिंग स्थापित की गई, जिससे फसल सुरक्षा सुनिश्चित हुई. इसके बाद किसान जैविक गेहूं, मक्का और हल्दी की खेती करने लगे हैं. जैविक मक्का के लिए राज्य सरकार 40 रुपये प्रति किलोग्राम यानी 4,000 रुपये प्रति क्विंटल भाव किसानों को दे रही है. जबकि, सामान्य तरीके से उगाई गई मक्का का एमएसपी 24 रुपये प्रति किलो या 2,400 रुपये प्रति क्विंटल है.

जैविक हल्दी के लिए 35 की बजाय 90 रुपये मिल रहा भाव

राज्य सरकार की ओर से जैविक तरीके से उगाई गई फसलों के लिए समर्थन मूल्य एमएसपी से कई गुना ज्यादा दिया जा रहा है. इन सभी फसलों के साथ ही दूध के लिए भी प्रोत्साहन राशि राज्य सरकार की ओर से दी जा रही है.  प्रदेश सरकार की ओर से जैविक कच्ची हल्दी 90 रुपये प्रति किलो के समर्थन मूल्य पर खरीदे जाने से किसानों को सीधा लाभ मिला है. पहले जहां हल्दी 30–35 रुपये प्रति किलो बिकती थी, अब उन्हें बेहतर दाम मिल रहे हैं.

किसान मासिक 7 हजार से 50 हजार रुपये तक कमा रहे

लंबागांव मिल्क फेड फार्मर प्रोड्यूसर एफपीओ की ओर से कहा गया है कि जैविक हल्दी, जैविक अदरक और दूध व दुग्ध उत्पादों के संग्रह एवं वितरण के लिए अधिकृत किया गया है. एफपीओ पहले किसानों से उत्पाद खरीदती है और उसे सरकार को बेचती है. वर्तमान में प्रतिदिन 150–200 लीटर दूध एकत्र कर 100 से अधिक परिवारों तक आपूर्ति की जा रही है. किसान प्रतिमाह 7 हजार से 50 हजार रुपये तक अतिरिक्त आय हासिल कर पा रहे हैं.

Published: 19 Feb, 2026 | 03:33 PM

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