डिजिटल मंडी: किसानों के लिए नई राह, बिचौलियों से मिलेगी आजादी

ऑनलाइन बाजार में किसान अपनी उपज की जानकारी इंटरनेट पर डालते हैं और देशभर के व्यापारी इसे ऑनलाइन खरीद सकते हैं.

Kisan India
Agra | Published: 22 Mar, 2025 | 04:00 AM

भारत में किसानों के लिए सरकार लगातार कई योजनाओं और नीतियों पर काम कर रही है, जिससे खेती करने वाले किसानों की समस्याएं कम हो सके. वहीं किसानों के लिए सबसे बड़ी समस्या उपज का उचित मूल्य न मिल पाना है. इसके पीछे प्रमुख कारण बिचौलियों की भूमिका है, जो किसानों से सस्ते दामों पर फसल खरीदते हैं और बाजार में महंगे दाम पर बेचते हैं. ऐसे में किसान को जो मुआवजा मिलना चाहिए था, उसका फायदा बिचौलिये ले जाते हैं.

इसके साथ ही आज भी पारंपरिक मंडी प्रणाली पर किसान आज भी आधारित है. इसमें किसान को अपने उत्पाद को बेचने के लिए स्थानीय मंडियों तक जाना पड़ता है, जिससे समय और लागत बढ़ जाती है. कई बार लंबी दूरी होने की वजह से फसल खराब हो जाती है. लेकिन सरकार की नई पहल से किसान अपनी उपज को सीधे व्यापारी को बेच सकते हैं. चलिए जानते हैं क्या डिजिटल मंडी, जिससे किसानों को होगा बंपर फायदा.

क्या है डिजिटल मंडी

डिजिटल मंडी एक ऑनलाइन बाजार है जहां किसान अपनी फसल को सीधे खरीदारों को बेच सकते हैं. इसमें किसान अपनी उपज की जानकारी इंटरनेट पर डालते हैं, और देशभर के व्यापारी इसे ऑनलाइन खरीद सकते हैं. इससे किसानों को उनकी फसल का अच्छा दाम मिलता है, बिचौलियों की जरूरत नहीं होती.

डिजिटल मंडी से आसान हुई किसानों की जिंदगी

डिजिटल मंडी के आने से किसानों को कई फायदे हुए हैं. अब उन्हें अपनी फसल बेचने के लिए दूर मंडियों में जाने की जरूरत नहीं पड़ती. वे अपने गांव से ही ऑनलाइन अपनी उपज की जानकारी डाल सकते हैं और देशभर के खरीदारों से सीधे जुड़ सकते हैं. इससे उन्हें उनकी फसल का सही दाम मिलता है.

डिजिटल मंडी की आवश्यकता

कोरोना काल के दौरान पारंपरिक मंडी प्रणाली की कई कमजोरियां सामने आईं थी. लॉकडाउन के कारण बाजार व्यवस्था बाधित हुई, जिससे किसानों को अपने उत्पाद बेचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा. जिसके बाद सरकार ने डिजिटल मंडी से किसानों की इस समस्या का समाधान किया.

ई-मंडी में सुधार की जरूरत

सबसे पहले किसानों को डिजिटल प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल के लिए सरकार को ट्रेनिंग देनी होगी. साथ ही अधिक गोदाम और परिवहन सुविधाएं विकसित करनी होंगी और फसलों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के दायरे में लाना होगा. इसे कामयाब योजना बनाने के लिए डिजिटल मंडियों को अधिक खरीदारों और व्यापारियों के साथ जोड़ना होगा.

डिजिटल मंडी कैसे काम करती है?

रजिस्ट्रेशन- किसान को पहले किसी डिजिटल मंडी प्लेटफॉर्म (जैसे eNAM, AgriBazaar, Ninjacart आदि) पर रजिस्टर करना होता है.
फसल सूचीबद्ध करें- किसान को अपनी उपज की जानकारी (जैसे गुणवत्ता, मात्रा, कीमत आदि) प्लेटफॉर्म पर डालनी होती है.
खरीदारों से संपर्क- विभिन्न खरीदार ऑनलाइन फसल की बोली लगाते हैं.
मूल्य निर्धारण और सौदा पक्का करना- किसान अपनी पसंद के अनुसार खरीदार को चुन सकता है.
भुगतान और वितरण- सौदे के बाद भुगतान ऑनलाइन किया जाता है, और फसल की डिलीवरी की प्रक्रिया शुरू होती है.

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Published: 22 Mar, 2025 | 04:00 AM
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