लोन लेकर खोला कृषि यंत्र केंद्र, किसानों को किराए पर देते हैं ट्रैक्टर-थ्रेसर.. 60 दिन में कमाए 2.5 लाख रुपये
Custom Hiring Center Scheme: मध्यप्रदेश में निजी कस्टम हायरिंग स्कीम के तहत किसानों को कृषि फसलों के लिए किराए पर ट्रैक्टर एवं आधुनिक कृषि यंत्र उपलब्ध कराकर सेवाएं देने के उद्देश्य से बैंक ऋण आधार पर केंद्र स्थापित करवाये जाते हैं. इस योजना का लाभ लेकर युवा किसान प्रतीक अब किसानों को कृषि यंत्र देकर दो महीने में ढाई लाख रुपये से ज्यादा की कमाई कर पा रहे हैं.
Madhya Pradesh Farmer Prateek Patil: कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक के जरिए न केवल कृषि उत्पादन बढ़ रहा है, बल्कि गांवों में रोजगार के नए अवसर भी बन रहे हैं. ऐसी ही कहानी बुरहानपुर जिले के ग्राम टिटगांवकलां के युवा प्रतीक पाटील की है. प्रतीक के पिता किसान हैं. प्रतीक अपने पिताजी के साथ कई वर्षों से कृषि कार्य कर रहे हैं, वे मुख्य रूप से केला, चना, मक्का, गन्ना, सोयाबीन, तुअर, गेहूं, केला, प्याज आदि फसल लगाते हैं. मध्य प्रदेश सरकार के अनुसार वह राज्य की निजी कस्टम हायरिंग योजना का लाभ उठाकर कस्टम हायरिंग सेंटर चला रहे हैं और किसानों को ट्रैक्टर समेत अन्य कृषि यंत्र किराए पर देते हैं. उन्होंने 2 महीने में 2.5 लाख रुपये की कमाई की है.
मध्य प्रदेश जनसंपर्क विभाग के अनुसार प्रतीक बताते हैं कि खेती के दौरान महसूस किया कि गांवों में समय पर ट्रैक्टर और आधुनिक कृषि यंत्रों की अनुपलब्धता किसानों की सबसे बड़ी समस्या है. इससे न केवल खेती में देरी होती है, बल्कि उत्पादन भी प्रभावित होता है. उन्होंने सोचा क्यों न मैं कृषि यंत्रों की मदद से अपने कार्य को आसान और सुविधाजनक बना पाऊं. प्रतीक ने कृषि कार्य में आधुनिक तकनीकियों को जोड़कर आजीविका और आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ने का इरादा बनाया.
कंप्यूटराइज्ड लॉटरी के माध्यम से हुआ चयन
प्रतीक ने कहा कि मुझे कृषि अभियांत्रिकी विभाग द्वारा संचालित निजी कस्टम हायरिंग स्कीम की जानकारी सहायक कृषि यंत्री कार्यालय, बुरहानपुर से मिली. इस योजना ने प्रतीक के सपनों को नई दिशा दी. योजना का लाभ लेने के लिये प्रतीक ने ऑनलाइन आवेदन किया और कंप्यूटराइज्ड लॉटरी प्रक्रिया के माध्यम से चयनित हुए.
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योजना से मिला स्वरोजगार का अवसर
प्रतीक पाटील ने कहा कि मुझे योजना के तहत करीबन 20.5 लाख की परियोजना लागत पर ऋण मंजूर हुआ. इससे मैंने अक्टूबर 2025 में गुरूकृपा कस्टम हायरिंग केन्द्र’ नाम से ट्रैक्टर सहित आधुनिक कृषि यंत्र खरीदकर निजी कस्टम हायरिंग केंद्र की स्थापना की है. अब प्रतीक पाटील अपने गांव एवं आसपास के क्षेत्र के लगभग 40 किसानों को किराये पर कृषि यंत्र उपलब्ध करा रहे हैं.
किसानों को कृषि यंत्र उपलब्ध कराकर दो महीने 2.6 लाख कमाए
प्रतीक बताते हैं कि केन्द्र से वह किसानों को ट्रैक्टर, कल्टीवेटर, रोटावेटर, मल्चिंग मशीन, मल्टिक्रोप थ्रेशर, चापकटर, सीडाकम फर्टिलाईजर यंत्र उपलब्ध कराते हैं. बीते दो महीनों में प्रतीक ने करीबन 2.6 लाख से अधिक का कार्य किया है. कस्टम हायरिंग योजना से न केवल प्रतीक को लाभ मिला है बल्कि क्षेत्र के किसानों को भी फायदा हुआ है. कस्टम हायरिंग की सुविधा के लिये प्रतीक पाटील कहते हैं कि शासन की इस योजना ने उन्हें स्वरोजगार का अवसर दिया और गांव के अन्य किसानों को भी सशक्त बनाया है. ऐसी योजनाएं ग्रामीण युवाओं को खेती से जोड़कर आत्मनिर्भर भारत की नींव मजबूत करती हैं.
प्रतीक पाटिल किसानों को किराए पर कृषि मशीनें देते हैं.
मध्य प्रदेश की कस्टम हायरिंग स्कीम क्या है
मध्यप्रदेश में निजी कस्टम हायरिंग स्कीम के तहत किसानों को कृषि फसलों के लिए किराए पर ट्रैक्टर एवं आधुनिक कृषि यंत्र उपलब्ध कराकर सेवाएं देने के उद्देश्य से बैंक ऋण आधार पर केन्द्र स्थापित करवाये जाते हैं. यह योजना वर्ष 2012-13 से कृषि अभियांत्रिकी के तहत संचालित है और इसका उद्देश्य छोटे व सीमांत किसानों को उचित दरों पर कृषि उपकरण उपलब्ध कराना, उत्पादकता बढ़ाना और ग्रामीण क्षेत्रों में युवाओं के लिये कृषि क्षेत्र में रोजगार देना है.
ट्रैक्टर एवं कृषि यंत्रों के खरीद की लागत अधिकतम 25 लाख एवं सभी श्रेणी के आवेदकों के लिए लगभग 40 फीसदी, अधिकतम 10 लाख तक का अनुदान दिया जाता है. योजना के तहत कस्टम हायरिंग सेंटर शुरू करने के लिए आवेदक का 12वीं पास होना जरूरी है. आवेदन के समय फॉर्म के साथ 10 हजार रुपये डिमांड ड्राफ्ट भी जमा करना पड़ता है.