63 की उम्र में कमाल! 5 किस्म के तरबूज ने बदली राम प्रताप की किस्मत, देश में गूंज रहा नाम
Watermelon Farming Tips: हरियाणा के पानीपत के पास गांव के किसान राम प्रताप शर्मा को तरबूज की पांच किस्मों की सफल खेती के लिए ‘कृषि रत्न’ अवॉर्ड मिला है. वे अपनी उपज को गुरुग्राम, दिल्ली, चंडीगढ़ और अन्य बड़े शहरों में सप्लाई करते हैं. 2011 से उन्होंने आधुनिक तकनीक जैसे ड्रिप इरिगेशन और पॉलीहाउस अपनाकर खेती को पूरी तरह बदल दिया.
Success Story: हरियाणा के पानीपत के पास एक छोटे से गांव में रहने वाले 63 साल के राम प्रताप शर्मा आज किसानों के लिए मिसाल बन चुके हैं. अपनी मेहनत और नई तकनीकों के सहारे उन्होंने तरबूज की खेती में ऐसी पहचान बनाई कि उन्हें ‘कृषि रत्न अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया. उनका यह सम्मान सिर्फ उनकी सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि उन सभी किसानों के लिए प्रेरणा है जो खेती में कुछ नया करने का सपना देखते हैं.
पांच किस्मों की खेती से बनाई अलग पहचान
बागवानी निदेशालय, पंचकुला (हरियाणा) के अनुसार, राम प्रताप शर्मा एक नहीं, बल्कि तरबूज की 5 अलग-अलग किस्मों की खेती शुरू की. इसी वजह से उन्हें बाजार में अलग पहचान मिली है. अलग-अलग किस्मों के चलते हर तरह के ग्राहक उनके पास आते हैं और पूरे साल उनके तरबूज की मांग बनी रहती है. उनकी फसल की सप्लाई गुरुग्राम, लुधियाना, चंडीगढ़ और दिल्ली जैसे बड़े शहरों तक की जाती है.
इसके अलावा दिल्ली और नोएडा की ऑनलाइन सप्लाई चेन से जुड़ी कई कंपनियां भी उनके नियमित ग्राहक हैं. इससे न सिर्फ उनकी कमाई में बढ़ोतरी हुई है, बल्कि उनका बाजार और नेटवर्क भी लगातार मजबूत होता जा रहा है.
खेती में बदलाव का लिया बड़ा फैसला
राम प्रताप शर्मा ने साल 1981 में ग्रेजुएशन के दूसरे वर्ष तक पढ़ाई की थी. इसके बाद उन्होंने अपने परिवार के साथ पारंपरिक खेती और छोटे स्तर की बागवानी में हाथ बंटाना शुरू किया. हालांकि, उनके जीवन में असली बदलाव साल 2011 में आया, जिसे उनका टर्निंग पॉइंट कहा जा सकता है. इसी समय उन्होंने पारंपरिक खेती को छोड़कर पूरी तरह सब्जी और फल उत्पादन पर ध्यान केंद्रित करने का फैसला लिया. यह वह दौर था जब खेती में तेजी से आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ रहा था, जैसे पॉलीहाउस, पॉलीनेट और ड्रिप इरिगेशन.
आधुनिक तकनीक ने बदली तस्वीर
नई तकनीकों को अपनाने से उनकी खेती में बड़ा बदलाव आया. ड्रिप इरिगेशन से पानी की बचत हुई और पौधों को सही मात्रा में पोषण मिला. पॉलीहाउस और पॉलीनेट के इस्तेमाल से फसल को मौसम के प्रभाव से बचाया जा सका, जिससे उत्पादन की गुणवत्ता बेहतर हुई. इन तकनीकों की मदद से उन्होंने कम समय में ज्यादा उत्पादन हासिल किया और बाजार में अपनी मजबूत पकड़ बनाई.
पानीपत के सिवाह गाँव के एक तरबूज़ किसान, 63 वर्षीय राम प्रताप शर्मा को ‘कृषि रत्न पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया है। उन्होंने तरबूज़ की पाँच अलग-अलग किस्में उगाकर एक बेहतरीन पहचान बनाई है। वे अपनी उपज गुड़गाँव, लुधियाना, चंडीगढ़ और दिल्ली के परिवारों को सप्लाई करते हैं, दिल्ली… pic.twitter.com/8sqL9rqVhi
— Directorate of Horticulture, panchkula, Haryana (@horticulturehry) April 21, 2026
खुद की ग्राहक पहचान बनाना सबसे बड़ी उपलब्धि
राम प्रताप शर्मा की सबसे बड़ी सफलता यह है कि उन्होंने अपने दम पर एक मजबूत ग्राहक आधार तैयार किया. उनके ग्राहक सिर्फ आम लोग ही नहीं, बल्कि बड़े उद्योगपति और प्रशासनिक अधिकारी भी हैं. उनकी फसल की गुणवत्ता और समय पर सप्लाई ने उन्हें भरोसेमंद किसान के रूप में स्थापित किया है. यही कारण है कि आज उनके पास नियमित ऑर्डर आते हैं और उन्हें अपनी उपज बेचने के लिए बाजार की चिंता नहीं करनी पड़ती.
राम प्रताप शर्मा की कहानी यह साबित करती है कि अगर किसान नई तकनीकों को अपनाकर और सही रणनीति के साथ खेती करें, तो वे न सिर्फ अपनी आय बढ़ा सकते हैं, बल्कि एक नई पहचान भी बना सकते हैं.