Women Success Story: मध्य प्रदेश के नौगांव (छतरपुर) की किसान सरवर जहां ने यह साबित कर दिया है कि अगर सोच अलग हो, तो कचरा भी कमाई का बड़ा साधन बन सकता है. जहां अधिकतर लोग पोल्ट्री फार्म से निकलने वाले वेस्ट को बेकार समझकर फेंक देते हैं, वहीं सरवर ने इसी वेस्ट को ऑर्गेनिक खाद में बदलकर कमाल कर दिखाया. उनकी इस अनोखी पहल ने न सिर्फ उनकी खेती को मजबूत और केमिकल-फ्री बनाया, बल्कि उनकी आय में भी शानदार बढ़ोतरी की. आज सरवर की यह सोच और मेहनत कई किसानों, खासकर महिलाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा बन चुकी है.
पोल्ट्री वेस्ट का स्मार्ट उपयोग
पोल्ट्री फार्म में मुर्गियों से निकलने वाला वेस्ट (बीट और बुरादा) आमतौर पर गंदगी और बदबू का कारण बनता है. लेकिन सरवर इसे बेकार नहीं जाने देतीं. वह इसे एक खास प्रक्रिया के जरिए इकट्ठा करती हैं और उसका सही तरीके से उपयोग करती हैं. उनका मानना है कि, हर वेस्ट में एक अवसर छिपा होता है, बस उसे पहचानने की जरूरत होती है.
वैज्ञानिक तरीके से तैयार होती है खाद
सरवर इस वेस्ट को सीधे खेत में इस्तेमाल नहीं करतीं, बल्कि इसे वैज्ञानिक प्रक्रिया से कंपोस्ट में बदलती हैं.
- सबसे पहले एक उपयुक्त स्थान का चयन किया जाता है
- फिर वेस्ट को गड्ढे (पिट) में इकट्ठा किया जाता है
- उसमें नमी बनाए रखने के लिए समय-समय पर पानी डाला जाता है
- बदबू और सड़न को नियंत्रित करने के लिए कंपोजर (microbial solution) मिलाया जाता है
करीब तीन महीनों में यह वेस्ट पूरी तरह सड़कर हाई क्वालिटी वाली जैविक खाद में बदल जाता है.

वैज्ञानिक तरीके से तैयार होती है खाद
खेती में मिला जबरदस्त फायदा
इस ऑर्गेनिक खाद के इस्तेमाल से सरवर की खेती में काफी अच्छे बदलाव आए. सबसे पहले उनकी जमीन ज्यादा उपजाऊ हो गई, जिससे फसल अच्छी होने लगी. फसलों की क्वालिटी भी बेहतर हो गई, इसलिए उन्हें बाजार में अच्छे दाम मिलने लगे. अब उन्हें रासायनिक खाद पर ज्यादा निर्भर नहीं रहना पड़ता, जिससे उनकी खेती ज्यादा प्राकृतिक और सुरक्षित बन गई. साथ ही, खेती में खर्च भी कम हो गया, जिससे उनका मुनाफा बढ़ गया.
पोल्ट्री फार्म का अपशिष्ट → जैविक खाद → बढ़ती आय
मध्य प्रदेश की किसान सरवर जहां ने पोल्ट्री फार्म के अपशिष्ट से बेहतरीन जैविक खाद बनाकर न सिर्फ खेती को मजबूत किया बल्कि लाभदायक, पर्यावरण अनुकूल और केमिकल मुक्त भी बनाया।#NariShakti #OrganicFarming #BalancedUseofFertilizer pic.twitter.com/xk7lvFw6zb
— Department of Fertilizers (@fertmin_india) April 15, 2026
आय बढ़ाने का बना नया रास्ता
सरवर ने सिर्फ अपने खेतों तक ही सीमित नहीं रखा, बल्कि अतिरिक्त तैयार खाद को बेचकर अतिरिक्त आय भी कमाना शुरू कर दिया. यानी जो पहले कचरा था, वही अब उनके लिए कमाई का मजबूत सोर्स बन गया है.
पर्यावरण के लिए भी वरदान
यह पहल सिर्फ कमाई तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्यावरण के लिए भी बेहद फायदेमंद है:
- वेस्ट मैनेजमेंट की समस्या कम हुई
- केमिकल फर्टिलाइजर का उपयोग घटा
- मिट्टी और पानी प्रदूषण में कमी आई
इस तरह सरवर की यह पहल इको-फ्रेंडली खेती का बेहतरीन उदाहरण बन गई है.