महाराष्ट्र में MSP पर 106 लाख क्विंटल कपास की खरीदी, किसानों के खातों में पहुंचे 8497 करोड़
महाराष्ट्र में 5 लाख से अधिक किसानों से 106.99 लाख क्विंटल कपास MSP पर खरीदी गई, किसानों को 8,497 करोड़ रुपये भुगतान किए गए. मंत्री जयकुमार रावल ने तकनीकी गड़बड़ी और शोषण की बात खारिज की. प्याज किसानों के बकाया भुगतान भी जल्द निपटाए जा रहे हैं.
Maharashtra News: महाराष्ट्र में इस सीजन के दौरान न्यूनत समर्थ मूल्य (MSP) पर 5 लाख से अधिक किसानों से 106.99 लाख क्विंटल कपास की खरीदी की गई है. ये आंकड़े 16 फरवरी तक के हैं. वहीं, इसके एवज में किसानों को 8,497 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ. खास बात यह है कि ये जानकारी महाराष्ट्र बजट सत्र 2026 के पांचवे दिन मंत्री जयकुमार रावल दी. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस खरीदी प्रक्रिया में कोई तकनीकी खराबी या गड़बड़ी नहीं हुई.
मंत्री ने कहा कि राज्य में कपास की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर कपास कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के जरिए की जाती है, जो कि केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय के तहत नामित एजेंसी है. मंत्री जयकुमार रावल ने विधानसभा में लिखित जवाब में कहा कि जनवरी 2026 में जलना जिले में ‘कपास किसान’ मोबाइल ऐप के स्लॉट बुकिंग में तकनीकी गड़बड़ी के आरोप गलत हैं. उन्होंने बताया कि अब तक 7.20 लाख किसान ऐप पर सफलतापूर्वक रजिस्टर हो चुके हैं और कपास की खरीद प्रक्रिया बिना किसी तकनीकी शिकायत के अच्छी तरह से चल रही है.
कपास खरीदी के लिए 168 खरीद केंद्र खोले गए
मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि खरीद केंद्रों पर किसानों के साथ कोई गड़बड़ी या शोषण नहीं हो रहा. केवल वही कपास खरीदी जाती है जो MSP गुणवत्ता मानकों के अनुसार सही हो. जो कपास निर्धारित मानक पूरी नहीं करती, उसे खरीद के लिए स्वीकार नहीं किया जाता. मंत्री जयकुमार रावल ने कहा कि 2025-26 के कपास सीजन में राज्य में 168 खरीद केंद्र खोले गए. 16 फरवरी तक कुल 106.99 लाख क्विंटल कपास 5,02,598 किसानों से खरीदी गई, जिसकी कीमत 8,497 करोड़ रुपये है.
11 फीसदी आयात शुल्क हटाने से किसानों को नुकसान
उत्पादन सीमा पर उन्होंने कहा कि CCI की खरीद औसत उपज डेटा (9.58 क्विंटल प्रति एकड़) पर आधारित है, जो कृषि आयुक्त, पुणे द्वारा जारी किया गया है. जो किसान औसत से अधिक उत्पादन करते हैं, वे स्थानीय अधिकारियों से प्रमाण पत्र देकर अतिरिक्त कपास MSP पर बेच सकते हैं. उन्होंने यह भी खारिज किया कि 1 अक्टूबर से 31 दिसंबर 2025 तक 11 फीसदी आयात शुल्क हटाने से किसानों को नुकसान हुआ. इस अवधि में CCI ने महाराष्ट्र में 74.86 लाख क्विंटल कपास 5,937.85 करोड़ रुपये में खरीदी.
महाराष्ट्र के मार्केटिंग मंत्री जयकुमार रावल ने कहा कि प्याज किसानों के बकाया भुगतान जल्दी ही निपटाए जा रहे हैं. उन्होंने स्वीकार किया कि इस साल की शुरुआत में भुगतान में देरी के कारण किसानों ने विरोध प्रदर्शन किया था. संपर्क में उन्होंने विधानसभा को लिखित जवाब में बताया कि बकाया राशि की प्रक्रिया चल रही है और जल्द ही सभी भुगतान पूरे कर दिए जाएंगे.
AFED ऑफिस के बाहर किसानों का प्रदर्शन
नासिक में किसान 5 जनवरी को NAFED ऑफिस के बाहर बकाया राशि को लेकर प्रदर्शन कर चुके हैं. उस समय NCCF से जुड़े लगभग 20 करोड़ रुपये बकाया थे. पिछले साल जून से अगस्त तक केंद्र की प्राइस स्टेबलाइजेशन फंड योजना के तहत NAFED और NCCF ने बड़े पैमाने पर प्याज खरीदी की थी. अधिकांश किसानों को समय पर भुगतान मिल गया, लेकिन कुछ भुगतान प्रशासनिक कारणों से देरी से हुए.
किसानों के पास अभी भी बची हुई है कपास
वहीं, बीते दिनों खबर सामने आई थी कि महाराष्ट्र के यवतमाल जिले में करीब 25 फीसदी कपास अभी भी किसानों और व्यापारियों के पास पड़ी हुई है. 27 फरवरी के बाद अगर कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) खरीद बंद कर देता है तो कीमतों में गिरावट की आशंका बढ़ गई है. बेहतर दाम पाने के लिए हजारों किसानों ने CCI में पंजीकरण कर स्लॉट बुक किए थे. अब तक जिले में CCI ने 15,74,462.4 क्विंटल कपास खरीदी है, लेकिन बड़ी मात्रा में फसल अभी भी बिना बिके पड़ी है. खरीद की आखिरी तारीख में सिर्फ एक हफ्ता बचा है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है. यवतमाल पारंपरिक रूप से कपास उत्पादन का बड़ा जिला रहा है. इस साल यहां करीब पांच लाख हेक्टेयर में कपास की खेती की गई.