US India Trade Deal: किसान मजदूर मोर्चा (पंजाब चैप्टर) के आह्वान पर पंजाब के 21 जिलों में लगभग 28 जगहों पर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन आयोजित किए गए, जहां प्रदर्शनकारियों ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पुतले फूंके. इन विरोध प्रदर्शनों में लगभग 10,000 किसानों, मजदूरों और आम नागरिकों ने हिस्सा लिया और मांग की कि प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को तुरंत रद्द किया जाए. किसान नेताओं ने कहा कि तीन काले कृषि कानूनों की तरह फिर से मोदी सरकार अपनी गलती दोहरा रही है. इसका परिणाम किसानों और देश के लिए अच्छा नहीं होने वाला है.
किसान नेता सरवन सिंह पंढेर समेत अन्य नेताओं ने कहा कि भले ही आज का विरोध प्रदर्शन इस व्यापार समझौते को तुरंत रद्द करने के लिए मजबूर न करे, लेकिन इस लोकतांत्रिक विरोध का मकसद अपना विरोध दर्ज कराना और लोगों को इस बात से अवगत कराना है कि इस समझौते के देश और उसके लोगों पर क्या खतरनाक परिणाम होंगे. उन्होंने कहा कि यह अमेरिका व्यापार समझौता किसानों, मजदूरों के लिए खतरनाक है.
तीन काले कृषि कानूनों वाली गलती फिर दोहरा रही मोदी सरकार
नेताओं ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाली मोदी सरकार एक बार फिर वही गलती दोहरा रही है जो उसने पहले तीन विवादास्पद कृषि कानून लाते समय की थी. उस समय भी, कृषि से जुड़े हितधारकों, किसान संगठनों या अन्य प्रभावित वर्गों के साथ कोई बातचीत नहीं की गई थी. अभी भी डेयरी फार्मिंग, खेती, छोटे व्यापारियों या उन सभी वर्गों से कोई चर्चा नहीं की गई है जिनकी आजीविका इस समझौते से सीधे प्रभावित होगी.
अमेरिकी किसानों से मुकाबला नहीं कर पाएंगे हमारे किसान
नेताओं ने कहा कि अगर अमेरिका को भारत के कृषि बाजार तक बिना रोक-टोक पहुंच मिल जाती है, तो भारतीय किसानों के लिए मुकाबला करना लगभग असंभव हो जाएगा. अमेरिका में किसानों को बड़े पैमाने पर सालाना सरकारी सब्सिडी मिलती है. वहां खेती बहुत ज्यादा मशीनीकृत है और बड़े जमीनी हिस्सों पर आधारित है. दूसरी ओर भारत में खासकर पंजाब में लगभग 86 प्रतिशत किसान छोटे जमींदार हैं, जिनमें से ज्यादातर के पास पांच एकड़ या उससे कम जमीन है. किसानों को पहले से ही अपनी उपज का सही दाम नहीं मिल रहा है, कर्ज का बोझ बढ़ रहा है और किसानों की आत्महत्याएं लगातार हो रही हैं. ऐसे हालात में यह समझौता “भेड़ के बच्चे को शेर के सामने फेंकने” जैसा होगा.
किसान संगठनों के साथ खुली बैठक करे केंद्र सरकार
उन्होंने आगे कहा कि इस समझौते के बाद विदेशों से कृषि उत्पाद, दालें, फल, सब्ज़ियां और कई अन्य खाद्य पदार्थ बड़े पैमाने पर भारतीय बाजारों में डंप किए जाएंगे. इससे भारत की कृषि अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान होगा और किसानों की आय और कम हो जाएगी. नेताओं ने कहा कि अगर मोदी सरकार और बीजेपी नेता यह दावा करते हैं कि यह समझौता किसानों के हित में है, तो सरकार को तुरंत देश के सभी किसान संगठनों के साथ एक खुली बैठक बुलानी चाहिए. इस बैठक का मीडिया के सामने लाइव प्रसारण होना चाहिए, जहां सरकार अपनी बात रख सके और किसान नेता अपनी बात रख सकें. तब देश की जनता खुद तय कर सकेगी कि यह समझौता असल में किसके हित में है.
लेबर लॉ की आड़ में इस सरकार ने 29 श्रम कानून खत्म कर दिए
नेताओं ने कहा कि कॉर्पोरेट का हमला सिर्फ किसानों तक ही सीमित नहीं है. मोदी सरकार ने 29 श्रम कानूनों को खत्म करके और उनकी जगह नए श्रम कोड लाकर मजदूरों के अधिकारों पर भी बड़ा हमला किया है. ऑनलाइन व्यापार और बड़े शॉपिंग मॉल की वजह से छोटे दुकानदार कारोबार से बाहर हो रहे हैं. युवाओं के लिए रोजगार के अवसर कम हो रहे हैं, कर्मचारियों की लगातार छंटनी हो रही है और सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों का तेजी से निजीकरण किया जा रहा है.