महाराष्ट्र में मॉनसून की एंट्री हो चुकी है और कई हिस्सों में जोरदार बारिश दर्ज की गई है. मुंबई समेत ठाणे, पालघर और कुछ अन्य जिलों में बारिश से पेड़ उखड़ गए और जलभराव की स्थिति ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है. खरीफ सीजन की फसलों की बुवाई में पहले से ही देरी का सामना कर रहे किसानों को अब तेज बारिश के बावजूद रुककर बुवाई करने का सुझाव दिया गया है. राज्य के कृषि मंत्री ने किसानों से कहा कि वह बुवाई में जल्दबाजी न दिखाएं, संयम उन्हें संभावित नुकसान के खतरे से बचा लेगा.
महाराष्ट्र के कृषि मंत्री दत्तात्रेय भरणे ने बुधवार को कहा कि राज्य के कुछ हिस्सों में मॉनसून की बारिश दर्ज की गई है. लेकिन, उन्होंने किसानों को सलाह दी कि कुछ हिस्सों में बारिश शुरुआत के बावजूद वे खरीफ फसलों की बुवाई में जल्दबाजी न करें और मिट्टी में पर्याप्त नमी आने के साथ ही सामान्य बारिश का इंतजार करें. कृषि मंत्री ने विधानसभा में कहा कि पिछले दो दिन में महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में मानसून पहुंच चुका है और उन्होंने पूरे राज्य में व्यापक वर्षा की उम्मीद जताई.
बीज अंकुरण के लिए मिट्टी में नमी गहराई तक पहुंचना जरूरी
उन्होंने कहा कि किसानों को बुवाई में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए. उन्हें पहले अपने खेतों में नमी का स्तर जांचना चाहिए और मिट्टी की पर्याप्त नमी सुनिश्चित होने के बाद ही बुवाई करनी चाहिए. जल्दबाजी से उन्हें नुकसान होने का खतरा है. उन्होंने कहा कि हमें अगले तीन से चार दिन में अच्छी बारिश की उम्मीद है. उसके बाद मिट्टी में नमी गहराई तक पहुंच जाएगी और बीज अंकुरण आसान हो जाएगा.
अल नीनो से निपटने के लिए कई मोर्चों पर काम कर रही सरकार
विधानसभा में चर्चा का जवाब देते हुए मंत्री ने कहा कि सरकार बीमा, जलवायु-अनुकूल कृषि और अवसंरचना निवेश के माध्यम से किसानों को समर्थन देने के प्रयास तेज कर रही है. कृषि मंत्री ने साथ ही बताया कि कृषि विभाग भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर), भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी), कृषि विश्वविद्यालयों और कृषि विज्ञान केंद्रों के साथ मिलकर काम कर रहा है, ताकि अल नीनो के संभावित प्रभाव सहित मौसम की अनिश्चितताओं से निपटने में किसानों की मदद की जा सके.
कपास उत्पादकता मिशन लागू करेगी सरकार
कपास की खेती का उल्लेख करते हुए मंत्री ने कहा कि केंद्र प्रायोजित कपास उत्पादकता मिशन 2026-27 से 2030-31 तक महाराष्ट्र में लागू किया जाएगा. उन्होंने कृषि समृद्धि पहल का भी उल्लेख किया, जिसका उद्देश्य कृषि में निवेश बढ़ाना, जल संरक्षण को बढ़ावा देना और कीटनाशक छिड़काव के लिए ड्रोन जैसी तकनीकों के उपयोग का विस्तार करना है.
फसल बीमा का 59 करोड़ रुपये जल्द किसानों को मिलेंगे
फसल बीमा योजना पर उन्होंने कहा कि 1,523 करोड़ रुपये का मुआवजा स्वीकृत कर प्रभावित किसानों में वितरित किया जा चुका है, जबकि बाकी 59 करोड़ रुपये का वितरण अभी प्रक्रियाधीन है. यह राशि जल्द ही पीड़ित किसानों के खाते में पहुंचेगी. उन्होंने आश्वासन दिया कि जिन किसानों को वास्तव में फसल नुकसान हुआ है, उन्हें बीमा लाभ से वंचित नहीं किया जाएगा.
फल और सब्जी की बीमा राशि 45 करोड़ में 31 करोड़ किसानों को भेजी
कृषि मंत्री ने कहा कि अनाज फसलों के साथ ही फल और सब्जी फसलों को भी फसल बीमा योजना में शामिल करते हुए विस्तारित किया गया है. उन्होंने कहा कि संशोधित मौसम आधारित फल फसल बीमा योजना के तहत संतरा, मौसंबी, अनार, चीकू, अमरूद, नींबू, सीताफल और अंगूर जैसी फसलें शामिल हैं. एक सत्र के लिए इस योजना के तहत 45 करोड़ रुपये का मुआवजा स्वीकृत किया गया है, जिसमें से 31 करोड़ रुपये पहले ही किसानों के खातों में भेजे जा चुके हैं.