आंध्र प्रदेश में किसानों की आय और कर्ज की स्थिति चिंता बढ़ाने वाली है. केंद्रीय कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 2019 में ग्रामीण राज्य के कृषि परिवारों की औसत मासिक आय 10,480 रुपये थी. वहीं, 2018-19 में 93.2 फीसदी कृषि परिवार कर्ज में थे. दरअसल, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने लोकसभा में मछलीपट्टनम के सांसद वल्लभनेनी बालाशौरी के सवाल के जवाब में यह जानकारी दी. सांसद ने किसानों की आय, कर्ज की स्थिति और उनकी कमाई बढ़ाने के लिए सरकार की ओर से उठाए जा रहे कदमों को लेकर सवाल पूछा था.
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) के ताजा उपलब्ध सर्वे के मुताबिक, 2019 में ग्रामीण आंध्र प्रदेश के कृषि परिवारों की औसत मासिक आय 10,480 रुपये थी. वहीं, 2018-19 में राज्य के 93.2 फीसदी कृषि परिवार कर्ज में थे. जबकि, 2012-13 में यह आंकड़ा 92.9 फीसदी था, यानी कर्जदार परिवारों की संख्या में मामूली बढ़ोतरी हुई. केंद्र सरकार ने कहा कि 2024-25 और 2025-26 के कृषि परिवारों की आय और कर्ज से जुड़ा नया सर्वे डेटा अभी उपलब्ध नहीं है. सरकार ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए राज्यों को कई योजनाओं के जरिए मदद दी जा रही है. इनमें कृषि उत्पादकता बढ़ाना, खेती की लागत कम करना, फसल विविधीकरण, बेहतर दाम, आय सहायता, संस्थागत कर्ज, फसल बीमा, सिंचाई, मशीनीकरण, भंडारण और मार्केटिंग जैसी सुविधाएं शामिल हैं.
कृषि कर्ज बढ़कर 28 लाख करोड़ रुपये के पार
केंद्र सरकार के मुताबिक, किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के जरिए किसानों को शॉर्ट टर्म लोन 7 फीसदी ब्याज दर पर दिया जाता है. समय पर कर्ज चुकाने वाले किसानों के लिए प्रभावी ब्याज दर 4 फीसदी रह जाती है. यह सुविधा संशोधित ब्याज सहायता योजना के तहत दी जा रही है. सरकार ने बताया कि संस्थागत कृषि कर्ज 2014-15 में 8.5 लाख करोड़ रुपये था, जो बढ़कर 2025-26 में 28 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया है. वहीं, 2024-25 में छोटे और सीमांत किसानों को 14.77 लाख करोड़ रुपये का कृषि कर्ज दिया गया.
PM-KISAN के तहत 4.47 लाख करोड़ रुपये जारी
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) के तहत पात्र किसान परिवारों को हर साल 6,000 रुपये दिए जाते हैं. यह रकम तीन किस्तों में सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजी जाती है. सरकार के मुताबिक, अब तक 23 किस्तों के जरिए 4.47 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि किसानों को दी जा चुकी है. केंद्र सरकार ने बताया कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत 2016 से 2025-26 तक किसानों के 2.02 लाख करोड़ रुपये के बीमा दावों का भुगतान किया गया है. सरकार के मुताबिक, किसानों को फसल की लागत पर कम से कम 50 फीसदी रिटर्न दिलाने के लिए 2018-19 से कई फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में बढ़ोतरी की गई है. सरकार ने कहा कि किसानों पर कर्ज का बोझ कम करने के लिए आगे भी कदम उठाने की जरूरत है. साथ ही यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि सरकार की योजनाओं और सहायता का लाभ सही तरीके से किसानों तक पहुंचे.