लखीमपुर में 25 गिद्धों की मौत… जहरीले कुत्तों का मांस बना काल, राजस्थान में भी भेड़ों की मौत से बढ़ी टेंशन
उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में मृत कुत्तों का मांस खाने से बड़ी संख्या में गिद्धों की मौत ने वन्यजीव संरक्षण पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. वन विभाग ने जांच शुरू कर दी है, जबकि राजस्थान में भेड़ों की लगातार मौत ने पशुपालकों की चिंता और बढ़ा दी है.
Vulture Death: उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी (Lakhimpur Kheri) से वन्यजीव संरक्षण को झकझोर देने वाली खबर सामने आई है. बिजुआ विकास खंड के बहादुर नगर ग्राम पंचायत के मजरा सेमरिया में खेतों में पड़े कुत्तों के जहरीले शव खाने से 25 गिद्धों की मौत हो गई, जबकि 5 गिद्धों की हालत गंभीर बताई जा रही है. वन विभाग ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है और विसरा जांच के लिए बरेली भेजने की तैयारी है. यह घटना ऐसे समय हुई है जब देश के कई राज्यों में पशुओं की रहस्यमयी मौतों के मामले चिंता बढ़ा रहे हैं. इस तरह बेजुबानों की मौतों ने लोगों को झकझोर दिया है.
खेत में फेंके गए मृत कुत्ते बने गिद्धों की मौत की वजह
वन रेंजर सतीश वर्मा के अनुसार, ग्रामीणों के अनुसार गांव में कुछ कुत्तों की अचानक मौत हो गई थी. बदबू और बीमारी फैलने के डर से ग्रामीणों ने मृत कुत्तों को खेतों में फेंक दिया. कुछ रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया कि कुत्तों को मारने के लिए जहरीले चावल या कीटनाशक मिला भोजन दिया गया था. दोपहर में गिद्धों का बड़ा झुंड खेतों में पहुंचा और शवों को खाने लगा. लेकिन कुछ ही देर बाद एक-एक कर गिद्ध अचेत होकर गिरने लगे. देखते ही देखते खेत में गिद्धों की लाशें बिछ गईं. ग्रामीणों ने बताया कि कई सालों बाद एक साथ इतने गिद्ध दिखाई दिए थे, लेकिन यह खुशी कुछ ही मिनटों में मातम में बदल गई.
25 गिद्धों की मौत, 5 का इलाज जारी
घटना स्थल पर मौजूद लोगों के मुताबिक करीब 30 गिद्ध मृत कुत्तों के पास पहुंचे थे. जहरीला मांस खाते ही 25 गिद्धों ने मौके पर दम तोड़ दिया, जबकि 5 गिद्ध तड़पते हुए पाए गए. वन विभाग की टीम ने तुरंत रेस्क्यू कर बीमार गिद्धों को उपचार के लिए भेजा. भीरा रेंज के अधिकारियों ने बताया कि मृत गिद्धों का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है. सटीक कारण जानने के लिए विसरा भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI), बरेली भेजा जाएगा. रिपोर्ट आने के बाद ही यह साफ होगा कि मौत की वजह कौन सा जहर या रसायन था.
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25 गिद्धों की मौत.
वन विभाग अलर्ट, संरक्षण पर बड़ा सवाल
घटना की सूचना मिलते ही वन रक्षक, फॉरेस्टर और रेंजर टीम के साथ मौके पर पहुंचे. अधिकारियों ने शवों को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है. वन विभाग के मुताबिक गिद्ध पहले से ही लुप्तप्राय प्रजाति में शामिल हैं, इसलिए एक साथ इतनी बड़ी संख्या में मौत बेहद गंभीर मामला है. विशेषज्ञों का कहना है कि खुले में जहरीले पशु शव फेंकना सिर्फ गिद्ध ही नहीं, दूसरे वन्यजीवों और पर्यावरण के लिए भी बड़ा खतरा है. इससे खाद्य श्रृंखला प्रभावित होती है और प्राकृतिक सफाई करने वाले पक्षियों की संख्या तेजी से घटती है.
राजस्थान में भेड़ों और उत्तर प्रदेश में गायों की मौत ने भी बढ़ाई टेंशन
हाल ही में राजस्थान से भी पशुओं की मौत के कई मामले सामने आए थे. फलौदी जिले के खींचन, बैंगटी और गोदरली गांवों में रहस्यमयी बीमारी से 45 से ज्यादा भेड़ों की मौत हो चुकी है, जबकि 70 से अधिक बीमार बताई जा रही हैं. जालोर और पाली में जहरीला चारा और अरंडी की पत्तियां खाने से भी भेड़ों की मौत की आशंका जताई गई है. लगातार अलग-अलग राज्यों से आ रही ऐसी घटनाओं ने पशुपालन और वन्यजीव सुरक्षा को लेकर प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है. विशेषज्ञ मानते हैं कि जहरीले चारे, कीटनाशकों और खुले में मृत पशु फेंकने पर सख्त रोक जरूरी है, वरना इसका असर पशुधन के साथ जैव विविधता पर भी पड़ेगा. इसके साथ ही उत्तर प्रदेश में चारे की कमी के कारण 7 गायों की मौत हो गई थी.