Vulture Conservation: विलुप्त होने की कगार पर पहुंच चुके गिद्धों को संरक्षित करने और उनकी संख्या को बढ़ाने के लिए किए जा रहे प्रयास रंग लाते दिख रहे हैं, क्योंकि अब गिद्धों की संख्या बढ़ने लगी है. मध्य प्रदेश सबसे ज्यादा गिद्धों की संख्या के साथ नंबर वन बन गया है. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हलाली बांध में पांच लुप्तप्राय गिद्धों को छोड़ें. इन पक्षियों में चार भारतीय गिद्ध (जिप्स इंडिकस) और एक सिनेरियस गिद्ध (एजिपीयस मोनाकस) शामिल हैं. यह कदम गिद्ध संरक्षण की दिशा में राज्य सरकार की बड़ी पहल माना जा रहा है. मुख्यमंत्री ने कहा कि 12,710 गिद्धों की आबादी के साथ मध्यप्रदेश देश का अग्रणी गिद्ध राज्य बन गया है.
भोपाल के प्रजनन केंद्र में हुई विशेष तैयारी
इन गिद्धों को छोड़ने से पहले भोपाल स्थित गिद्ध संरक्षण प्रजनन केंद्र में रखा गया था. यहां विशेषज्ञों ने उनकी सेहत की जांच की और उन्हें प्राकृतिक माहौल के लिए तैयार किया. पांचों गिद्धों में हाई-टेक जीपीएस-जीएसएम ट्रांसमीटर लगाए गए हैं. इससे वैज्ञानिक यह जान सकेंगे कि ये गिद्ध कहां जाते हैं, कैसे रहते हैं और किन जगहों पर ज्यादा समय बिताते हैं.

गिद्ध संरक्षण की दिशा में सरकार की बड़ी पहल.
गिद्धों की निगरानी से मिलेगा अहम डेटा
मध्य प्रदेश वन विभाग ने डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया और बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी के साथ मिलकर सैटेलाइट टेलीमेट्री कार्यक्रम शुरू किया है. इस तकनीक से गिद्धों की उड़ान, उनके ठहरने की जगह और भोजन के स्थान की जानकारी मिलेगी. इसके जरिए यह भी पता चलेगा कि उन्हें किन खतरों का सामना करना पड़ रहा है, जैसे बिजली के तारों से करंट लगना, जहर या जंगलों की कमी. इस डेटा के आधार पर भविष्य में बेहतर योजना बनाई जाएगी, ताकि गिद्धों की संख्या बढ़ सके और उनका संरक्षण मजबूत हो.
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गिद्धों को छोड़ने से पहले भोपाल के प्रजनन केंद्र में रखा गया था.
मध्य प्रदेश बना गिद्ध संरक्षण का गढ़
मुख्यमंत्री ने बताया कि मध्य प्रदेश में बाघों और तेंदुओं के साथ-साथ गिद्धों की संख्या भी देश में सबसे ज्यादा है. यहां भारतीय गिद्ध, सिनेरियस गिद्ध, मिस्र का गिद्ध और हिमालयी ग्रिफॉन जैसी प्रजातियां पाई जाती हैं. हाल ही में गिद्ध आकलन-2026 के पहले दिन दक्षिण पन्ना वन प्रभाग में 1,000 से ज्यादा गिद्ध देखे गए. यह पिछले कई वर्षों में दर्ज की गई सबसे बड़ी संख्या है. इससे साफ है कि राज्य में संरक्षण प्रयास सफल हो रहे हैं. भारतीय परंपरा में भी गिद्धों का खास महत्व है. धार्मिक ग्रंथो के हिसाब से बात करें तो रामायण में जटायु का बलिदान साहस और त्याग का प्रतीक माना जाता है. पारिस्थितिक रूप से गिद्ध प्रकृति के सफाईकर्मी हैं. वे मृत जानवरों को खाकर बीमारियों के फैलाव को रोकते हैं और पर्यावरण को साफ रखते हैं. राज्य सरकार की यह पहल गिद्धों की लंबी अवधि की सुरक्षा और पर्यावरण संतुलन को मजबूत करने की दिशा में अहम मानी जा रही है.