AI की मदद से खेती में बड़ा बदलाव, मौसम पूर्वानुमान पर भरोसा कर रहे किसान

भारत-विस्तार प्लेटफॉर्म पर मौसम की जानकारी, आईसीएआर (ICAR) की फसल सलाह, कीट प्रबंधन उपाय, मंडी भाव और केंद्र सरकार की योजनाओं की जानकारी मिलती है. किसान हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करके भी जानकारी ले सकते हैं या इसे एंड्रॉयड ऐप के रूप में डाउनलोड कर सकते हैं.

नई दिल्ली | Published: 21 Feb, 2026 | 10:51 AM

AI in agriculture India: देश की खेती अब केवल किस्मत और अनुभव पर निर्भर नहीं रह गई है. अब किसान तकनीक की मदद से सोच-समझकर फैसले लेने लगे हैं. केंद्र सरकार के कृषि सचिव देवेश चतुर्वेदी ने हाल ही में बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से मौसम का जो पूर्वानुमान तैयार किया जा रहा है, उसकी सटीकता पहले से काफी बेहतर हो गई है. इसी कारण अब किसान बुवाई और सिंचाई जैसे बड़े फैसले सरकारी पूर्वानुमानों को देखकर लेने लगे हैं.

उन्होंने यह बात इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में कही. उनका कहना था कि भारतीय मौसम विभाग (IMD) के पिछले 100 साल के आंकड़ों का इस्तेमाल करके एआई मॉडल तैयार किया गया. इस मॉडल से एक हफ्ते और एक महीने पहले तक मानसून और मौसम की स्थिति का अनुमान लगाया गया, जो काफी हद तक सही साबित हुआ.

मौसम की सही जानकारी से किसानों को फायदा

बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के अनुसार, देवेश चतुर्वेदी ने बताया कि किसानों से जो फीडबैक मिला, उसमें साफ कहा गया कि उन्होंने एआई आधारित मौसम पूर्वानुमान के आधार पर बुवाई और सिंचाई का समय तय किया. पहले कई बार गलत अनुमान के कारण फसल को नुकसान हो जाता था, लेकिन अब सटीक जानकारी मिलने से जोखिम कम हो रहा है. इससे किसानों की लागत घट रही है और उत्पादन बढ़ाने में मदद मिल रही है.

सरकार अब इस व्यवस्था को और आगे बढ़ाने की योजना बना रही है. आने वाले समय में मौसम के साथ-साथ मंडियों में फसल की आवक और दाम की जानकारी भी सलाह में शामिल की जाएगी. इससे किसान यह तय कर सकेंगे कि कौन-सी फसल लगानी है और कब उसे बाजार में बेचना है.

जरूरी फसलों के दाम का भी हुआ अध्ययन

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कृषि मंत्रालय ने प्याज, आलू और टमाटर जैसी जरूरी फसलों के दाम का एआई से अनुमान लगाने की कोशिश की थी. यह सुझाव दलवाई समिति ने किसानों की आय दोगुनी करने की योजना के तहत दिया था. लेकिन छोटे स्तर पर पुराने आंकड़ों में गड़बड़ी होने के कारण इसे पूरी तरह लागू नहीं किया जा सका.

कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सरकार खुद कीमतों का अनुमान जारी करे और उसमें 20-30 प्रतिशत का अंतर आ जाए, तो यह विवाद का कारण बन सकता है. इसलिए इस दिशा में सावधानी बरती जा रही है.

‘भारत-विस्तार’ से एक ही जगह मिलेगी सारी जानकारी

देवेश चतुर्वेदी ने कहा कि एआई खेती में “डिजिटल रेड टेप” को कम करेगा. पहले किसानों को अलग-अलग वेबसाइट और ऐप पर जानकारी खोजनी पड़ती थी. अब ‘भारत-विस्तार’ (Bharat VISTAAR) नाम की नई पहल के तहत सारी जानकारी एक ही प्लेटफॉर्म पर दी जा रही है.

इस योजना का उद्घाटन केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 17 फरवरी को जयपुर में किया. यह योजना 1 फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा बजट भाषण में घोषित की गई थी.

भारत-विस्तार प्लेटफॉर्म पर मौसम की जानकारी, आईसीएआर (ICAR) की फसल सलाह, कीट प्रबंधन उपाय, मंडी भाव और केंद्र सरकार की योजनाओं की जानकारी मिलती है. किसान हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करके भी जानकारी ले सकते हैं या इसे एंड्रॉयड ऐप के रूप में डाउनलोड कर सकते हैं.

फोन कॉल से मिलेगा व्यक्तिगत समाधान

आने वाले छह महीनों में इस सिस्टम को एग्रीस्टैक से जोड़ा जाएगा. एग्रीस्टैक में किसान का डेटा, जैसे जमीन का आकार, उगाई गई फसल और खरीदे गए उर्वरक की जानकारी सुरक्षित रहेगी. जब किसान अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से कॉल करेंगे, तो सिस्टम अपने आप उनका डेटा पहचान लेगा और उसी के अनुसार सलाह देगा.

फिलहाल यह सेवा हिंदी और अंग्रेजी में उपलब्ध है, लेकिन अगले छह महीनों में इसे नौ और क्षेत्रीय भाषाओं में शुरू करने का लक्ष्य है.

एआई से खेती का भविष्य मजबूत

कृषि मंत्रालय का मानना है कि एआई आधारित सलाह से किसानों की निर्णय लेने की क्षमता बेहतर होगी. सही समय पर सही जानकारी मिलने से उत्पादन बढ़ेगा और खर्च कम होगा.

अब खेती में केवल हल और ट्रैक्टर ही नहीं, बल्कि डेटा और तकनीक भी बड़ी भूमिका निभा रहे हैं. एआई की मदद से किसान अधिक आत्मविश्वास के साथ खेती कर रहे हैं और बदलते मौसम व बाजार की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार हो रहे हैं.

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