अमित शाह का बड़ा बयान: UK-EU FTA और US डील में किसानों-डेयरी हित पूरी तरह सुरक्षित

शाह ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर किसानों को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह कहना गलत है कि इन समझौतों से किसानों को नुकसान होगा. उनके मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह सुनिश्चित किया है कि किसी भी समझौते में कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को नुकसान न पहुंचे.

नई दिल्ली | Published: 16 Feb, 2026 | 07:06 AM

देश में हाल के दिनों में ब्रिटेन, यूरोपीय संघ और अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौतों को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है. खासतौर पर किसानों और डेयरी क्षेत्र पर इनके असर को लेकर कई तरह की आशंकाएं जताई जा रही हैं. इसी बीच केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने साफ शब्दों में कहा है कि इन सभी समझौतों में भारतीय किसानों और डेयरी उद्योग के हितों की पूरी तरह रक्षा की गई है और किसी को घबराने की जरूरत नहीं है.

गांधीनगर में दिया भरोसा

गुजरात के गांधीनगर में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अमित शाह ने विपक्ष के आरोपों का सीधा जवाब दिया. उन्होंने कहा कि ब्रिटेन (UK) और यूरोपीय संघ (EU) के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) और अमेरिका के साथ हुआ व्यापार समझौता भारत के राष्ट्रीय हित में हैं.

शाह ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर किसानों को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह कहना गलत है कि इन समझौतों से किसानों को नुकसान होगा. उनके मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह सुनिश्चित किया है कि किसी भी समझौते में कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को नुकसान न पहुंचे.

डेयरी उद्योग पर क्या कहा?

डेयरी सेक्टर को लेकर खास चिंता जताई जा रही थी कि अमेरिका जैसे देशों से सस्ते डेयरी उत्पाद आने पर भारतीय दुग्ध उत्पादकों को नुकसान हो सकता है. इस पर अमित शाह ने स्पष्ट किया कि डेयरी उद्योग पूरी तरह सुरक्षित है.

उन्होंने कहा कि सरकार ने बातचीत के दौरान डेयरी क्षेत्र को पूरी तरह संरक्षित रखा है. उनके अनुसार, ये समझौते डेयरी उद्योग को कमजोर नहीं बल्कि मजबूत करेंगे, क्योंकि भारतीय उत्पादों को भी नए बाजार मिलेंगे. शाह ने दावा किया कि इन तीनों समझौतों में डेयरी क्षेत्र के हितों से कोई समझौता नहीं किया गया है.

आयात नहीं, निर्यात के अवसर

अमित शाह ने इन समझौतों को आयात का खतरा नहीं बल्कि निर्यात का अवसर बताया. उनका कहना था कि अब भारतीय कृषि उत्पादों और मत्स्य उत्पादों के लिए वैश्विक बाजार के दरवाजे और ज्यादा खुलेंगे.

उन्होंने कहा कि भारत अब दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और जल्द ही तीसरे स्थान पर पहुंचने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. ऐसे में अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौते भारत के किसानों, मछुआरों और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के लिए बड़े अवसर लेकर आएंगे.

शाह के मुताबिक इन एफटीए के जरिए भारतीय अनाज, फल-सब्जियां, समुद्री उत्पाद और अन्य कृषि उत्पादों को यूरोप, ब्रिटेन और अमेरिका जैसे बड़े बाजारों में बेहतर पहुंच मिलेगी. इससे किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी और कृषि निर्यात को नई गति मिलेगी.

राजनीतिक बयानबाजी के बीच संदेश

अमित शाह का यह बयान ऐसे समय आया है जब कुछ किसान संगठनों और विपक्षी दलों की ओर से इन व्यापार समझौतों पर सवाल उठाए जा रहे हैं. शाह ने मंच से साफ कहा कि किसानों को भ्रमित होने की जरूरत नहीं है और सरकार उनकी आय और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है.

उन्होंने दोहराया कि किसी भी समझौते में गेहूं, चावल, मक्का, सोयाबीन जैसे प्रमुख फसलों को नुकसान पहुंचाने वाला कोई प्रावधान नहीं है. सरकार का फोकस किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें वैश्विक बाजार से जोड़ने पर है.

सरकार का दावा है कि ये समझौते भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में मजबूत बनाएंगे और कृषि निर्यात को नई दिशा देंगे. हालांकि, इन समझौतों का असली असर आने वाले समय में ही स्पष्ट होगा. फिलहाल सरकार की ओर से यह संदेश साफ है कि किसानों और डेयरी उद्योग को किसी भी तरह का नुकसान नहीं होने दिया जाएगा.

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