असम में तबाही का मंजर! 34 हजार हेक्टेयर से ज्यादा फसल बर्बाद, मौत का आंकड़ा 66 पहुंचा
Assam Flood: असम में बाढ़ की स्थिति में हल्का सुधार हुआ है, लेकिन अभी भी छह जिलों के करीब 6.55 लाख लोग प्रभावित हैं. शनिवार को चार और लोगों की मौत के बाद इस साल बाढ़ से मरने वालों की संख्या 66 हो गई है. राज्य में 810 गांव अब भी जलमग्न हैं और लगभग 34,971 हेक्टेयर फसल प्रभावित हुई है.
Brahmaputra Flood: असम में लगातार कई दिनों से जारी बाढ़ का असर अब धीरे-धीरे कम होने लगा है, लेकिन हालात अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं. राज्य के कई इलाकों में अब भी हजारों परिवार राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं. खेतों में खड़ी फसलें पानी में डूबी हुई हैं और सड़क, पुल व तटबंध जैसी बुनियादी सुविधाओं को भी भारी नुकसान पहुंचा है. राज्य सरकार और प्रशासन राहत एवं बचाव कार्यों में जुटे हैं, लेकिन लाखों लोगों की मुश्किलें अभी खत्म नहीं हुई हैं.
बाढ़ से प्रभावित लोगों की संख्या में आई थोड़ी कमी
असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) के अनुसार, शनिवार को बाढ़ की स्थिति में हल्का सुधार देखने को मिला. एक दिन पहले जहां नौ जिलों के करीब 7.05 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित थे, वहीं अब यह संख्या घटकर 6.55 लाख रह गई है. हालांकि, अभी भी छह जिलों के लाखों लोग इस आपदा का सामना कर रहे हैं.
सबसे अधिक प्रभावित जिलों में शिवसागर, चराइदेव, जोरहाट, डिब्रूगढ़, गोलाघाट और नगांव शामिल हैं. इनमें शिवसागर सबसे ज्यादा प्रभावित है, जहां करीब 2.9 लाख लोग बाढ़ की चपेट में हैं. इसके बाद चराइदेव में लगभग 1.9 लाख और जोरहाट में 1.3 लाख से अधिक लोग प्रभावित हैं.
एक दिन में चार और मौतें, मृतकों की संख्या 66 पहुंची
बाढ़ के कारण जान-माल का नुकसान भी लगातार हो रहा है. ASDMA के मुताबिक, शनिवार को चार लोगों की मौत हुई. इनमें शिवसागर जिले में तीन और चराइदेव जिले में एक व्यक्ति की जान गई. इसके साथ ही इस साल असम में बाढ़ से जान गंवाने वालों की कुल संख्या बढ़कर 66 हो गई है. प्रशासन ने लोगों से नदी किनारे और जलभराव वाले इलाकों में सतर्क रहने की अपील की है.
राहत शिविरों में हजारों लोग ले रहे हैं शरण
बाढ़ से प्रभावित लोगों की मदद के लिए प्रशासन ने राहत शिविर और सहायता केंद्र शुरू किए हैं. फिलहाल राज्य के छह जिलों में 274 राहत शिविर और सहायता वितरण केंद्र चलाए जा रहे हैं. इन शिविरों में करीब 18,902 लोग रह रहे हैं. प्रशासन की ओर से लोगों को भोजन, पीने का साफ पानी, दवाइयां और दूसरी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, ताकि बाढ़ प्रभावित परिवारों को किसी तरह की परेशानी न हो और उन्हें समय पर राहत मिल सके.
सैकड़ों गांव जलमग्न, फसलों को भारी नुकसान
बाढ़ का सबसे ज्यादा असर गांवों और खेती पर पड़ा है. असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) के मुताबिक, राज्य के 810 गांव अब भी बाढ़ के पानी से घिरे हुए हैं. वहीं करीब 34,970.8 हेक्टेयर कृषि भूमि में खड़ी फसलें बाढ़ से प्रभावित हुई हैं. इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान होने की आशंका है. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अगर जल्द पानी नहीं उतरा, तो खरीफ फसलों की पैदावार पर भी बुरा असर पड़ सकता है, जिससे किसानों की कमाई प्रभावित हो सकती है.
नदियां अब भी खतरे के निशान से ऊपर
असम की कई नदियों का जलस्तर अब भी चिंता का विषय बना हुआ है. दिखौ और धनसिरी नदियां क्रमशः शिवसागर और नुमालीगढ़ क्षेत्र में खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं.
बाढ़ के कारण कई तटबंध, सड़कें, पुल और अन्य सार्वजनिक ढांचे भी क्षतिग्रस्त हुए हैं. इससे कई इलाकों में आवागमन प्रभावित हुआ है और राहत सामग्री पहुंचाने में भी दिक्कतें आ रही हैं.
हालात में सुधार, लेकिन सतर्कता जरूरी
हालांकि बाढ़ से प्रभावित लोगों की संख्या पहले के मुकाबले कम हुई है, लेकिन असम के कई इलाकों में अभी भी बाढ़ का खतरा बना हुआ है. प्रशासन लगातार हालात पर नजर रखे हुए है और राहत व बचाव का काम जारी है. अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में मौसम और नदियों के जलस्तर के आधार पर स्थिति तय होगी. इसलिए बाढ़ प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों से अपील की गई है कि, वे सतर्क रहें, प्रशासन की सलाह मानें और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर चले जाएं.