Holika Dahan 2026: 2 या 3 मार्च… होलिका दहन की डेट को लेकर बड़ा कन्फ्यूजन! जानें सही डेट और शुभ मुहूर्त

Holika Dahan Kab Hai: होलिका दहन 2026 की तिथि और शुभ मुहूर्त को लेकर इस बार लोगों में असमंजस है. वैदिक पंचांग के अनुसार होलिका दहन 2 मार्च की रात शुभ मुहूर्त में किया जाएगा. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कुछ लोगों को होलिका दहन की अग्नि नहीं देखनी चाहिए. इसी कड़ी में आउए जानते हैं पूजा का सही समय, विधि और जरूरी सावधानियां.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 26 Feb, 2026 | 02:17 PM

Holika Dahan 2026 Date: हर साल फाल्गुन पूर्णिमा के दिन होलिका दहन किया जाता है. लेकिन इस बार तिथि, भद्रा और चंद्र ग्रहण को लेकर लोगों में थोड़ा कन्फ्यूजन बना हुआ है. लखनऊ के ज्योतिषी, राकेश पांडे बताते हैं कि, होलिका दहन हमेशा पूर्णिमा की तिथि में और भद्रा खत्म होने के बाद ही करना चाहिए. इसलिए सही समय जानना जरूरी है, ताकि पूजा ठीक तरह से की जा सके और उसका शुभ फल मिल सके.

कब किया जाएगा होलिका दहन?

वैदिक पंचांग के अनुसार फाल्गुन पूर्णिमा तिथि 2 मार्च की शाम 5 बजकर 18 मिनट से शुरू होकर 3 मार्च की शाम 4 बजकर 33 मिनट तक रहेगी. धार्मिक परंपराओं के मुताबिक होलिका दहन 2 मार्च को किया जाएगा. शुभ मुहूर्त रात्रि 11 बजकर 53 मिनट से 12 बजकर 50 मिनट तक रहेगा.

इस दौरान पूजा और अग्नि प्रज्ज्वलन करना विशेष रूप से फलदायी माना जाता है. मान्यता है कि सही मुहूर्त में किया गया होलिका दहन नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है और सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करता है.

क्यों खास है होलिका दहन?

लखनऊ के ज्योतिषी राकेश पांडे के अनुसार होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है. पौराणिक कथा के अनुसार, भक्त प्रह्लाद भगवान विष्णु के परम भक्त थे, लेकिन उनके पिता हिरण्यकश्यप उनकी भक्ति से नाराज थे. उन्होंने कई बार प्रह्लाद को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की. अंत में हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका की मदद ली, जिसे अग्नि से न जलने का वरदान प्राप्त था. वह प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठ गई, लेकिन भगवान विष्णु की कृपा से प्रह्लाद सुरक्षित बच गए और होलिका अग्नि में भस्म हो गई.

इसी घटना की याद में हर साल फाल्गुन पूर्णिमा की रात होलिका दहन किया जाता है. लोग इस दिन अग्नि जलाकर यह संदेश देते हैं कि अंततः सत्य और धर्म की ही विजय होती है और बुराई का अंत निश्चित है. यह पर्व जीवन में नकारात्मकता को त्यागकर सकारात्मकता और नई शुरुआत का प्रतीक भी है.

किन लोगों को नहीं देखना चाहिए होलिका दहन?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कुछ लोगों को होलिका दहन की अग्नि देखने से बचना चाहिए.

नवविवाहिता: मान्यता है कि नई नवेली दुल्हन को ससुराल में होलिका दहन नहीं देखना चाहिए. कई स्थानों पर परंपरा है कि नववधू इस दिन मायके चली जाती है. इसका संबंध होलिका और प्रह्लाद की कथा से जोड़ा जाता है.

गर्भवती महिलाएं: गर्भवती महिलाओं को भी होलिका दहन की अग्नि और धुएं से दूर रहने की सलाह दी जाती है. धार्मिक मान्यता के साथ-साथ वैज्ञानिक दृष्टि से भी तेज आग और धुआं मां और गर्भस्थ शिशु के लिए हानिकारक हो सकता है.

सास और बहू: कुछ परंपराओं में माना जाता है कि सास और बहू को एक साथ होलिका दहन नहीं देखना चाहिए. ऐसा करने से रिश्तों में तनाव बढ़ने की आशंका मानी जाती है.

नवजात शिशु: जहां होलिका दहन हो रहा हो, वहां नवजात शिशु को नहीं ले जाना चाहिए. माना जाता है कि तेज आग और वातावरण में मौजूद धुआं छोटे बच्चों के लिए नुकसानदायक हो सकता है.

होलिका दहन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक परंपरा भी है. इसलिए पूजा करते समय श्रद्धा के साथ-साथ सुरक्षा का भी ध्यान रखना चाहिए.

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है. Kisan India इसकी पूर्ण सत्यता का दावा नहीं किया जाता. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ से परामर्श लेना उचित रहेगा.

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