बलरामपुर में 1 लाख संग्राहकों को मिला रोजगार, तेंदूपत्ता योजना बनी आदिवासी परिवारों की बड़ी ताकत
छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में तेंदूपत्ता संग्रहण योजना ग्रामीण और आदिवासी परिवारों के लिए बड़ी राहत बनकर उभरी है. हजारों लोग इस काम से जुड़कर अच्छी कमाई कर रहे हैं. प्रशासन की पहल और बेहतर भुगतान दर से गांवों में उत्साह बढ़ा है और लोगों को आर्थिक मजबूती मिल रही है.
Tendu Leaves: छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में तेंदूपत्ता संग्रहण योजना हजारों ग्रामीण और आदिवासी परिवारों के लिए आर्थिक मजबूती का बड़ा माध्यम बन गई है. जंगलों पर निर्भर रहने वाले लोगों के लिए यह योजना सिर्फ रोजगार ही नहीं, बल्कि सालभर की आय का अहम जरिया भी बन रही है. जिले के कई गांवों में तेंदूपत्ता सीजन शुरू होते ही परिवारों की आर्थिक गतिविधियां तेज हो जाती हैं और बड़ी संख्या में लोग इसमें हिस्सा लेते हैं. तेंदूपत्ता संग्रहण से मिलने वाली आमदनी का उपयोग ग्रामीण परिवार खेती, बच्चों की पढ़ाई, घरेलू जरूरतों और अन्य जरूरी कामों में करते हैं. यही वजह है कि वनांचल क्षेत्र के लोगों के लिए यह योजना काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है.
DFO आलोक बाजपेयी ने बताई योजना की खासियत
बलरामपुर के DFO आलोक बाजपेयी ने बताया कि तेंदूपत्ता संग्रहण आदिवासी भाई-बहनों की आजीविका का बेहद महत्वपूर्ण साधन है. उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ शासन और लघु वन उपज संघ इस योजना को संवेदनशील तरीके से संचालित कर रहे हैं ताकि ज्यादा से ज्यादा ग्रामीणों को इसका लाभ मिल सके. उन्होंने जानकारी दी कि बलरामपुर जिले में करीब 1 लाख संग्राहकों को इस योजना से प्रत्यक्ष लाभ मिल रहा है. प्रशासन की ओर से तेंदूपत्ता संग्रहण की दर 5,500 रुपये प्रति मानक बोरा तय की गई है, जिसे ग्रामीणों के लिए बेहतर भुगतान माना जा रहा है. इससे संग्राहकों में उत्साह भी देखने को मिल रहा है और बड़ी संख्या में लोग संग्रहण कार्य में जुटे हुए हैं.
44 समितियों और 64 लॉट के जरिए हो रहा संचालन
जिले में तेंदूपत्ता संग्रहण का काम व्यवस्थित तरीके से संचालित किया जा रहा है. प्रशासन और लघु वन उपज संघ की निगरानी में 44 समितियों के माध्यम से इस योजना को चलाया जा रहा है. इसके तहत 64 लॉट बनाए गए हैं जहां संग्रहण का काम तेजी से जारी है. ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं, पुरुष और युवा सुबह से जंगलों में पहुंचकर तेंदूपत्ता इकट्ठा कर रहे हैं. कई गांवों में यह सामूहिक गतिविधि का रूप ले चुकी है. प्रशासन की ओर से संग्रहण केंद्रों पर व्यवस्थाएं भी की गई हैं ताकि संग्राहकों को किसी तरह की परेशानी न हो. वन विभाग का कहना है कि इस बार संग्रहण में लोगों की भागीदारी पहले की तुलना में ज्यादा दिखाई दे रही है. बेहतर भुगतान दर और समय पर प्रक्रिया पूरी होने से ग्रामीणों का भरोसा भी मजबूत हुआ है.
#WATCH | छत्तीसगढ़: बलरामपुर जिले में छत्तीसगढ़ सरकार की तेंदूपत्ता संग्रहण योजना से हजारों ग्रामीण परिवारों को आजीविका का मुख्य आधार और आर्थिक सुरक्षा मिल रही है।
बलरामपुर DFO आलोक बाजपेयी ने बताया, “तेंदूपत्ता वनांचल क्षेत्र के हमारे जो आदिवासी भाई और बहनें हैं उनके लिए… pic.twitter.com/R5UC9jTpAD
— ANI_HindiNews (@AHindinews) May 23, 2026
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रही मजबूती
बलरामपुर जैसे वनांचल जिलों में तेंदूपत्ता संग्रहण ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है. गर्मी के मौसम में जब खेती का काम कम होता है, तब यह योजना लोगों को रोजगार और आमदनी उपलब्ध कराती है. इससे गांवों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ती हैं और स्थानीय बाजारों में भी कारोबार तेज होता है. विशेषज्ञों का मानना है कि तेंदूपत्ता संग्रहण जैसी योजनाएं आदिवासी और वन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभाती हैं. बलरामपुर जिले में बड़ी संख्या में परिवार इस योजना से जुड़े हुए हैं और इसे अपनी आजीविका का स्थायी आधार मानते हैं. प्रशासन का कहना है कि आने वाले समय में भी योजना को और बेहतर तरीके से संचालित करने का प्रयास जारी रहेगा ताकि वनांचल क्षेत्रों के लोगों को अधिक लाभ मिल सके.