बिहार के 3 पारंपरिक उत्पादों को मिला GI टैग, दुनिया में बढ़ेगी पहचान और कारीगरों की कमाई
बिहार की पारंपरिक कला और शिल्प को बड़ी उपलब्धि मिली है. राज्य के तीन प्रसिद्ध उत्पादों को GI टैग मिलने से उनकी पहचान और मजबूत होगी. इससे स्थानीय कारीगरों, बुनकरों और कलाकारों को नए अवसर मिलेंगे, जबकि बिहार की सांस्कृतिक विरासत को देश और दुनिया में नया सम्मान प्राप्त होगा.
GI Tag Bihar: बिहार की समृद्ध कला, संस्कृति और पारंपरिक शिल्प को बड़ी पहचान मिली है. राज्य के तीन प्रसिद्ध उत्पादों-नालंदा की बावन बूटी साड़ी एवं फैब्रिक, गया के पत्थरकट्टी स्टोन क्राफ्ट और भोजपुर की पिढ़िया पेंटिंग-को भौगोलिक संकेतक (GI) टैग प्रदान किया गया है. यह उपलब्धि न केवल बिहार की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाएगी, बल्कि हजारों कारीगरों, बुनकरों और कलाकारों के लिए आर्थिक अवसरों के नए द्वार भी खोलेगी. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए सभी शिल्पकारों और कलाकारों को बधाई दी है.
नालंदा की बावन बूटी साड़ी को मिला सम्मान
नालंदा जिले की प्रसिद्ध बावन बूटी साड़ी और फैब्रिक बिहार की अनूठी हथकरघा कला का प्रतीक है. इस बुनाई कला में कपड़ों पर 52 प्रकार की बूटियां बनाई जाती हैं, जिनमें कमल, बोधि वृक्ष और अन्य बौद्ध प्रतीकों का विशेष स्थान होता है. यह कला मुख्य रूप से नालंदा के बसवन बीघा क्षेत्र में विकसित हुई है. GI टैग मिलने से इस पारंपरिक बुनाई को नई पहचान मिलेगी और बुनकरों को उनके उत्पादों का बेहतर मूल्य प्राप्त हो सकेगा.
पत्थरकट्टी स्टोन क्राफ्ट की 300 साल पुरानी विरासत
गया जिले के पत्थरकट्टी गांव की मूर्तिकला कला लगभग 300 वर्षों से चली आ रही है. यहां के कारीगर काले ग्रेनाइट पत्थरों को तराशकर भगवान बुद्ध, महावीर और अन्य धार्मिक मूर्तियों के साथ कई आकर्षक कलाकृतियां तैयार करते हैं. देश-विदेश में इसकी मांग रही है, लेकिन GI टैग मिलने के बाद इसकी पहचान और मजबूत होगी. इससे स्थानीय कारीगरों को वैश्विक बाजार तक पहुंच बनाने में मदद मिलेगी.
भोजपुर की पिढ़िया पेंटिंग को मिली नई पहचान
भोजपुर क्षेत्र की पिढ़िया पेंटिंग बिहार की पारंपरिक लोक कला का महत्वपूर्ण हिस्सा है. यह कला मुख्य रूप से ग्रामीण महिलाओं द्वारा त्योहारों और सामाजिक अवसरों पर बनाई जाती है. प्राकृतिक रंगों और पारंपरिक आकृतियों के माध्यम से गांव की संस्कृति, परंपराओं और लोक जीवन को चित्रित किया जाता है. GI टैग मिलने से इस लोक कला के संरक्षण और प्रचार को नई गति मिलेगी.
नीतीश कुमार ने जताई खुशी, कारीगरों को दी बधाई
नालंदा की बावन बूटी साड़ी एवं फैब्रिक, गया के पत्थरकट्टी स्टोन क्राफ्ट तथा भोजपुर की पिढ़िया पेंटिंग को भौगोलिक संकेतक (GI) टैग प्राप्त होना प्रसन्नता का विषय है।
GI टैग प्राप्त होने से इन उत्पादों की प्रामाणिकता और विशिष्ट पहचान को मजबूती मिलेगी। इससे बिहार की समृद्ध…
— Nitish Kumar (@NitishKumar) June 14, 2026
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि इन तीनों उत्पादों को GI टैग मिलना बिहार के लिए गर्व की बात है. उन्होंने कहा कि इससे इन उत्पादों की प्रामाणिकता और विशिष्ट पहचान को मजबूती मिलेगी तथा बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को देश-दुनिया में और अधिक सम्मान प्राप्त होगा. मुख्यमंत्री ने इस उपलब्धि पर राज्य के सभी शिल्पकारों, बुनकरों, कलाकारों और संबंधित संस्थाओं को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं. विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि बिहार के पारंपरिक उत्पादों को वैश्विक बाजार में नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.