GI टैग वाली असम की तेजपुर लीची दुबई के शेखों को भा गई, पहली खेप से किसानों को बड़ा फायदा

असम की प्रसिद्ध तेजपुर लीची ने अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कदम रख दिया है. पहली निर्यात खेप दुबई भेजे जाने से क्षेत्र के किसानों में उत्साह है. इस उपलब्धि से स्थानीय उत्पादों को नई पहचान मिलने की उम्मीद बढ़ी है. साथ ही कृषि निर्यात को मजबूती और किसानों को बेहतर अवसर मिलने का रास्ता खुल सकता है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 9 Jun, 2026 | 08:28 PM

Tezpur Litchi Export: असम की मशहूर तेजपुर लीची अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी पहचान बना रही है. भौगोलिक संकेतक (GI) टैग प्राप्त इस खास लीची की पहली निर्यात खेप दुबई भेजी गई है. कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) के सहयोग से हुए इस निर्यात को पूर्वोत्तर भारत के कृषि क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है. इससे स्थानीय किसानों को बेहतर बाजार और अधिक कीमत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है.

दुबई रवाना हुई तेजपुर लीची की पहली खेप

तेजपुर लीची अपनी मिठास, सुगंध और बेहतरीन गुणवत्ता के लिए जानी जाती है. अब इसकी मांग भारत से बाहर भी बढ़ रही है. केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री ने जानकारी दी कि तेजपुर लीची की पहली निर्यात खेप दुबई भेजी गई है. यह कदम असम के बागवानी उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

GI टैग ने बढ़ाई पहचान और भरोसा

तेजपुर लीची को मिला GI टैग  इसकी विशिष्ट पहचान को दर्शाता है. यह टैग बताता है कि यह उत्पाद अपने क्षेत्र की खास जलवायु और प्राकृतिक परिस्थितियों के कारण विशेष गुणवत्ता रखता है. GI टैग मिलने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में उत्पाद की विश्वसनीयता बढ़ती है और खरीदारों का भरोसा भी मजबूत होता है. यही वजह है कि अब तेजपुर लीची को विदेशों में भी पहचान मिलने लगी है.

किसानों को मिलेगा बेहतर दाम

विशेषज्ञों का मानना है कि निर्यात बढ़ने से स्थानीय किसानों  को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल सकेगा. अब तक किसान मुख्य रूप से घरेलू बाजारों पर निर्भर थे, लेकिन विदेशी बाजार खुलने से मांग बढ़ेगी और आय में भी सुधार होगा. इससे लीची उत्पादकों को उत्पादन बढ़ाने और गुणवत्ता सुधारने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा.

पूर्वोत्तर भारत के कृषि निर्यात को मिलेगा बढ़ावा

तेजपुर लीची का निर्यात केवल एक फल की सफलता नहीं है, बल्कि यह पूरे पूर्वोत्तर भारत के कृषि क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत है. इस पहल से क्षेत्र के अन्य कृषि और बागवानी उत्पादों  को भी वैश्विक बाजार में पहुंचने का अवसर मिल सकता है. सरकार और APEDA का लक्ष्य है कि पूर्वोत्तर भारत के विशिष्ट उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई जाए.

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी तरह निर्यात के नए अवसर बनते रहे, तो आने वाले वर्षों में असम और पूर्वोत्तर भारत के किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है. तेजपुर लीची की यह उपलब्धि क्षेत्र के कृषि विकास और निर्यात विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है.

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Published: 9 Jun, 2026 | 08:28 PM

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