MP सरकार ने सोयाबीन की 3 नई किस्मों को दी मंजूरी, अब 90 दिनों में फसल तैयार.. पैदावार भी पहले से ज्यादा

आईसीएआर-भारतीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान ने तीन नई सोयाबीन किस्में NRC 157, NRC 131 और NRC 136 विकसित की हैं, जिन्हें मध्य प्रदेश सरकार ने मंजूरी दी है. ये किस्में मध्यम अवधि, रोग-प्रतिरोधी और उच्च उत्पादन वाली हैं, साथ ही NRC 136 सूखा-प्रतिरोधी भारत की पहली सोयाबीन किस्म है.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 5 Apr, 2026 | 08:25 AM

Soybean Farming: सोयाबीन की खेती को बेहतर बनाने के लिए आईसीएआर-भारतीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान लगातार नई किस्मों पर काम कर रहा है. इसी कड़ी में संस्थान ने हाल के वर्षों में तीन नई सोयाबीन किस्में- NRC 157, NRC 131 और NRC 136 विकसित की हैं. इन किस्मों को मध्य प्रदेश सरकार ने मंजूरी दे दी है. माना जा रहा है कि ये नई किस्में किसानों के लिए ज्यादा उत्पादन और बेहतर गुणवत्ता देने में मददगार साबित होंगी. अगर किसान इन किस्मों की खेती करते हैं, तो उनकी कमाई में बढ़ोतरी हो सकतीहै.

प्रिंसिपल साइंटिस्ट और ब्रीडर, डॉ. संजय गुप्ता ने कहा कि NRC 157 (IS 157) एक मीडियम-ड्यूरेशन सोयाबीन किस्म  है, जो सिर्फ 94 दिनों में पक जाती है. इसका औसत उत्पादन 16.5 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है और यह अल्टरनेरिया लीफ स्पॉट, बैक्टीरियल पस्चुल्स और टारगेट लीफ स्पॉट जैसी बीमारियों के प्रति मध्यम प्रतिरोधी है. संस्थान में किए गए फील्ड ट्रायल में यह किस्म 20 जुलाई तक देरी से बोई जाए तो भी अच्छे उत्पादन के साथ ठीक रहती है.

इसका औसत उत्पादन 15 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है

वहीं NRC 131 (IS 131) एक और मीडियम-ड्यूरेशन किस्म है, जो 93 दिनों में पकती है और इसका औसत उत्पादन 15 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है. यह किस्म चारकोल रोट और टारगेट लीफ स्पॉट जैसी बीमारियों के प्रति मध्यम प्रतिरोधी है. इन दो किस्मों के साथ ही NRC 136 (IS 136), जो पहले से ही देश के पूर्वी क्षेत्रों में खेती के लिए मंजूर थी, इस साल मध्य प्रदेश में भी खेती के लिए जारी कर दी गई है.

NRC 136 किस्म इतने दिनों में पक जाती है

इस किस्म के ब्रीडर और संस्थान के प्रिंसिपल साइंटिस्ट डॉ. ज्ञानेश कुमार सतपुते ने बताया कि NRC 136 105 दिनों में पक जाती है और इसका औसत उत्पादन 17 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है. यह किस्म MYMV (मूंगबीन येलो मोजेक वायरस) के प्रति मध्यम प्रतिरोधी है और भारत की पहली सूखा-प्रतिरोधी सोयाबीन किस्म है. यानी अगर किसान NRC 136 की खेती करते हैं, तो फसल में रोग लगनेकी संभावना बहुत कम रहेगी. साथ ही पैदावार भी अच्छी होगी. इससे किसानों को ज्यादा फायदा होगा.

मध्य प्रदेश में करीब 54.7 लाख टन सोयाबीन का उत्पादन होता है

बता दें कि भारत में सबसे ज्यादा सोयाबीन की खेती मध्य प्रदेश में होती है, इसलिए इसे देश का ‘सोयाबीन राज्य’ भी कहा जाता है. भारत के कुल सोयाबीन उत्पादन का लगभग 45-54 फीसदी हिस्सा सिर्फ यहीं से आता है. मध्य प्रदेश में करीब 54.7 लाख टन सोयाबीन का उत्पादन होता है. खासतौर पर मालवा क्षेत्र के जिले- इंदौर, उज्जैन, देवास, धार और सीहोर सोयाबीन के मुख्य उत्पादन केंद्र माने जाते हैं.

50-55 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सोयाबीन की होती है खेती

यही वजह है कि मध्य प्रदेश को भारत का ‘सोया स्टेट’ कहा जाता है. यहां सोयाबीन सबसे अहम खरीफ फसल है. राज्य में करीब 50-55 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सोयाबीन की खेती होती है. यह फसल मुख्य रूप से मालवा पठार में उगाई जाती है और मॉनसून पर निर्भर करती है. इसे 15 जून से जुलाई की शुरुआत तक बोया जाता है, और अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी इसके लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती है. वर्ष 2025 में सरकार ने सोयाबीन किसानों को मदद के लिए 1300 रुपये प्रति क्विंटल का भावांतर (सहायता) देने की घोषणा की थी.

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Published: 5 Apr, 2026 | 08:18 AM
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