खरीफ फसलों के लिए तैयारियां तेज, सरकार ने कहा- बीज और खाद की किसानों को नहीं होगी कमी

सरकार ने राज्यों को साफ निर्देश दिए हैं कि खाद की जमाखोरी, कालाबाजारी और गैर-कृषि उपयोग पर कड़ी निगरानी रखी जाए. इसके लिए पंचायत से लेकर जिला स्तर तक समितियों को सक्रिय किया जा रहा है. “धरती माता बचाओ आंदोलन समितियों” के जरिए खाद के सही वितरण और निगरानी की व्यवस्था मजबूत की जा रही है, जैसा कि पिछले साल भी किया गया था.

नई दिल्ली | Updated On: 2 Apr, 2026 | 08:00 AM

Kharif 2026: देश में खरीफ सीजन की तैयारियां तेज हो चुकी हैं और इसी के साथ किसानों की सबसे बड़ी चिंता बीज, खाद और दवाइयों की उपलब्धता को लेकर सरकार ने बड़ा भरोसा दिया है. हाल के दिनों में खाद की जमाखोरी और घबराहट में खरीद की खबरों के बीच केंद्र सरकार ने साफ कहा है कि इस बार किसानों को किसी तरह की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा. सरकार ने पहले से ही तैयारियां तेज कर दी हैं ताकि मानसून के साथ शुरू होने वाले इस अहम सीजन में खेती प्रभावित न हो.

बीज और खाद की पर्याप्त उपलब्धता का दावा

कृषि मंत्रालय के अनुसार, खरीफ 2026 के लिए बीजों की स्थिति काफी मजबूत है. इस साल कुल 166.46 लाख क्विंटल बीज की जरूरत आंकी गई है, जबकि उपलब्धता 185.74 लाख क्विंटल है. यानी करीब 19.29 लाख क्विंटल बीज अतिरिक्त मौजूद है. यह आंकड़ा बताता है कि बीजों की कोई कमी नहीं होगी, बल्कि जरूरत से ज्यादा स्टॉक मौजूद है.

अगर फसलों की बात करें तो धान, सोयाबीन, मूंगफली और मक्का जैसी प्रमुख फसलों के बीज भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं. धान के लिए करीब 80.9 लाख क्विंटल, सोयाबीन के लिए 35.7 लाख क्विंटल, मूंगफली के लिए 21.1 लाख क्विंटल और मक्का के लिए 11.9 लाख क्विंटल अतिरिक्त बीज मौजूद है.

मक्का बीज के लिए ईंधन की भी पक्की व्यवस्था

बिजनेस लाइन की खबर के अनुसार, सरकार ने सिर्फ बीज उपलब्ध कराने तक ही ध्यान नहीं दिया है, बल्कि उनकी प्रोसेसिंग को लेकर भी कदम उठाए हैं. मक्का बीज को सुखाने के लिए LPG और PNG की प्राथमिकता के आधार पर आपूर्ति सुनिश्चित की गई है. इससे यह तय किया गया है कि बीज तैयार करने की प्रक्रिया बिना किसी रुकावट के पूरी हो सके और किसानों तक समय पर गुणवत्तापूर्ण बीज पहुंच सके.

खाद का स्टॉक पिछले साल से ज्यादा

खाद की उपलब्धता को लेकर भी स्थिति संतोषजनक बताई गई है. खरीफ 2026 के लिए करीब 390.54 लाख टन खाद की जरूरत का अनुमान है. इसके मुकाबले शुरुआती स्टॉक 180 लाख टन है, जो पिछले साल के मुकाबले 46 प्रतिशत ज्यादा है. आमतौर पर सीजन शुरू होने से पहले यह स्तर करीब 33 प्रतिशत रहता है, लेकिन इस बार स्टॉक इससे काफी ज्यादा है.

सरकार का कहना है कि आने वाले समय में इस स्टॉक को और बढ़ाने के प्रयास जारी हैं ताकि किसी भी स्थिति में किसानों को खाद की कमी न झेलनी पड़े.

जमाखोरी और कालाबाजारी पर सख्ती

सरकार ने राज्यों को साफ निर्देश दिए हैं कि खाद की जमाखोरी, कालाबाजारी और गैर-कृषि उपयोग पर कड़ी निगरानी रखी जाए. इसके लिए पंचायत से लेकर जिला स्तर तक समितियों को सक्रिय किया जा रहा है. “धरती माता बचाओ आंदोलन समितियों” के जरिए खाद के सही वितरण और निगरानी की व्यवस्था मजबूत की जा रही है, जैसा कि पिछले साल भी किया गया था. साथ ही राज्यों से कहा गया है कि वे स्थानीय स्तर पर अभियान चलाकर यह सुनिश्चित करें कि किसानों को उनकी जरूरत के अनुसार सही समय पर खाद मिल सके.

कृषि रसायनों की भी कोई कमी नहीं

कीटनाशक, खरपतवारनाशी और फफूंदनाशी जैसी कृषि दवाइयों की उपलब्धता भी पर्याप्त बताई गई है. भारत खुद इन रसायनों का बड़ा उत्पादक है. 2025-26 में फरवरी तक देश में 2,61,099 टन एग्रो-केमिकल का उत्पादन हो चुका है, जबकि खरीफ सीजन के लिए करीब 42,000 टन की जरूरत है. इससे साफ है कि इस क्षेत्र में भी कोई कमी नहीं आने वाली.

राज्यों के साथ बैठक, योजनाओं की समीक्षा

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्यों के कृषि मंत्रियों के साथ वर्चुअल बैठक भी की. इस बैठक में किसान आईडी, खाद की उपलब्धता और विभिन्न योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई. सरकार ने बताया कि अब तक 19 राज्यों में 9.25 करोड़ किसान आईडी बनाई जा चुकी हैं. यह आईडी किसानों को उनकी जमीन, फसल और अन्य गतिविधियों से जोड़ने का एक अहम माध्यम है. लक्ष्य रखा गया है कि अगले 6 महीनों में इसे 100 प्रतिशत तक पहुंचाया जाए.

तकनीक के जरिए बेहतर वितरण पर जोर

सरकार ने राज्यों को यह भी सलाह दी है कि खाद के वितरण में तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाया जाए. इससे यह सुनिश्चित होगा कि हर किसान को उसकी जरूरत के अनुसार सही मात्रा में खाद मिल सके. साथ ही किसानों को जागरूक करने पर भी जोर दिया जा रहा है, ताकि वे संतुलित मात्रा में खाद का उपयोग करें और जैविक तथा प्राकृतिक खेती को बढ़ावा मिले.

क्षेत्रीय बैठकों से मजबूत होगी तैयारी

सरकार ने आने वाले दिनों में अलग-अलग क्षेत्रों के लिए कृषि सम्मेलनों का आयोजन भी तय किया है. पश्चिमी क्षेत्र के लिए 7 अप्रैल को जयपुर में, उत्तरी क्षेत्र के लिए 17 अप्रैल को लखनऊ में और पूर्वी क्षेत्र के लिए 24 अप्रैल को भुवनेश्वर में बैठक होगी. इसके बाद मई में उत्तर-पूर्व और दक्षिण भारत के लिए भी सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे. इन सभी बैठकों के बाद राष्ट्रीय स्तर पर खरीफ सम्मेलन होगा, जिसमें पूरे देश की तैयारियों की समीक्षा की जाएगी.

Published: 2 Apr, 2026 | 07:51 AM

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