Shivraj Singh Chouhan statement: देश में उत्पादन बढ़ाने की होड़ में किसान लंबे समय से रासायनिक खाद और पानी का ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन अब इसका असर मिट्टी की सेहत पर दिखने लगा है. केंद्र सरकार ने भी इस समस्या को गंभीरता से लिया है और टिकाऊ खेती की दिशा में कदम बढ़ा रही है.
राज्यसभा में इस मुद्दे पर जवाब देते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने साफ कहा कि देश के कई हिस्सों में ज्यादा खाद और पानी के इस्तेमाल से मिट्टी की उर्वरता प्रभावित हो रही है. अगर समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले समय में उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है.
क्यों घट रही है मिट्टी की उर्वरता?
बिजनेस स्टैंडर्ड की खबर के अनुसार, कृषि मंत्री ने बताया कि ज्यादा उत्पादन पाने के लिए किसान लगातार रासायनिक उर्वरकों का उपयोग कर रहे हैं. इसके साथ ही कई क्षेत्रों में जरूरत से ज्यादा सिंचाई भी की जा रही है. इसका नतीजा यह हो रहा है कि मिट्टी की प्राकृतिक गुणवत्ता धीरे-धीरे कमजोर होती जा रही है. मिट्टी में मौजूद जरूरी पोषक तत्व कम हो रहे हैं और उसकी उत्पादन क्षमता घट रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यही स्थिति बनी रही, तो भविष्य में खेती करना और भी मुश्किल हो सकता है.
सरकार का फोकस अब टिकाऊ खेती पर
सरकार अब खेती को ज्यादा संतुलित और टिकाऊ बनाने पर जोर दे रही है. इसके लिए फसल विविधीकरण (Crop Diversification) को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि किसान एक ही फसल पर निर्भर न रहें. इसी दिशा में सरकार ने कई योजनाएं शुरू की हैं, जिनमें मिलेट्स यानी मोटे अनाज को बढ़ावा देना प्रमुख है. मिलेट्स को कम पानी और कम खाद की जरूरत होती है, जिससे मिट्टी की सेहत बेहतर बनी रहती है.
मिलेट्स और दूसरी फसलों को मिल रहा बढ़ावा
केंद्र सरकार की योजना के तहत दाल, तिलहन और मिलेट्स की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है. हाल के वर्षों में इन फसलों का रकबा और उत्पादन दोनों बढ़े हैं. सरकार को उम्मीद है कि आने वाले समय में इनकी मांग और खपत भी बढ़ेगी, जिससे किसानों को बेहतर आय मिल सकेगी और खेती का दबाव भी संतुलित रहेगा.
पंजाब के किसानों की भूमिका की सराहना
कृषि मंत्री ने इस दौरान पंजाब के किसानों की भी सराहना की. उन्होंने कहा कि देश को खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने में पंजाब के किसानों का बड़ा योगदान रहा है. उन्होंने यह भी साफ किया कि प्रदूषण के लिए केवल किसानों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता. किसान फसल अवशेषों का बेहतर प्रबंधन करने की दिशा में भी काम कर रहे हैं.
योजनाओं के जरिए बढ़ाया जा रहा उत्पादन
कृषि मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन (NFSNM) के तहत देशभर में मिलेट्स (श्री अन्न) की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है. यह योजना 28 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों में लागू है. इसके तहत किसानों को बेहतर बीज, प्रशिक्षण, प्रदर्शन और आधुनिक तकनीकों की सुविधा दी जा रही है, ताकि उत्पादन बढ़ाया जा सके और खेती को टिकाऊ बनाया जा सके.
पंजाब जैसे राज्यों में भी इस योजना के तहत विशेष फोकस किया जा रहा है, जहां पारंपरिक धान की खेती से हटकर दूसरी फसलों की ओर किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है.
फसल विविधीकरण पर बड़ा निवेश
सरकार ने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (PM-RKVY) के तहत फसल विविधीकरण कार्यक्रम भी चलाया हुआ है. इसका उद्देश्य उन राज्यों में बदलाव लाना है, जहां पानी की ज्यादा खपत वाली फसलें उगाई जाती हैं. हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में किसानों को धान की जगह मिलेट्स, दाल और तिलहन की खेती के लिए प्रेरित किया जा रहा है.
साल 2025-26 के लिए पंजाब में इस योजना के तहत करीब 103.75 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है, जिससे किसानों को नई फसलों की ओर बढ़ने में मदद मिलेगी.