महिला एग्री-उद्यमियों ने बदली बिहार के गांवों की तस्वीर, 12 लाख किसानों को मिल रहा सीधा लाभ

JEEViKA Women Entrepreneurs: बिहार में महिला कृषि उद्यमी किसानों के लिए बदलाव की नई मिसाल बन रही हैं. राज्य में 4,600 से अधिक सक्रिय कृषि उद्यमी 12 लाख से ज्यादा किसानों को बीज, खाद, कृषि सलाह और बाजार से जुड़ी सेवाएं दे रहे हैं. इससे किसानों को फायदा मिल रहा है, वहीं महिलाओं और युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 22 Jun, 2026 | 08:24 AM

JEEViKA Bihar: बिहार में खेती-किसानी का तरीका धीरे-धीरे बदल रहा है. अब केवल किसान ही नहीं, बल्कि ग्रामीण महिलाएं भी कृषि क्षेत्र में नई पहचान बना रही हैं. राज्य में बड़ी संख्या में महिलाएं कृषि उद्यमी बनकर किसानों की मदद कर रही हैं और साथ ही अपनी आमदनी भी बढ़ा रही हैं. इसका फायदा न सिर्फ किसानों को मिल रहा है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिल रही है.

हाल ही में पटना में आयोजित एक समीक्षा बैठक में सामने आए आंकड़ों ने दिखाया कि बिहार में महिलाओं की अगुवाई वाला कृषि उद्यमी नेटवर्क तेजी से मजबूत हो रहा है. आज हजारों कृषि उद्यमी लाखों किसानों तक जरूरी कृषि सेवाएं पहुंचा रहे हैं.

हर जिले में तैयार हो रहे कृषि उद्यमी

राज्य के सभी 38 जिलों में कृषि उद्यमियों को तैयार करने का काम किया गया है. अब तक 5,500 से ज्यादा लोगों को इस कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षण दिया जा चुका है. खास बात यह है कि इनमें बड़ी संख्या महिलाओं की है. प्रशिक्षण के बाद हजारों उद्यमी सक्रिय रूप से किसानों को खेती से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध करा रहे हैं. इससे गांवों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा हुए हैं और महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत बन रही हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर किसानों को अच्छी गुणवत्ता के बीज, खाद और खेती से जुड़ी सही जानकारी समय पर नहीं मिल पाती.

कृषि उद्यमी इसी कमी को पूरा कर रहे हैं. कई उद्यमियों ने कृषि सेवा केंद्र शुरू किए हैं, जहां किसानों को बीज, उर्वरक और अन्य जरूरी कृषि सामग्री आसानी से मिल जाती है. इसके अलावा वे किसानों को खेती से जुड़ी सलाह भी देते हैं और उनकी उपज को बाजार तक पहुंचाने में मदद करते हैं. इस व्यवस्था से किसानों का समय और खर्च दोनों बच रहे हैं.

बढ़ रही है महिलाओं की आमदनी

कृषि उद्यमिता ने ग्रामीण महिलाओं के लिए कमाई के नए रास्ते खोले हैं. पहले जहां कई महिलाएं केवल घरेलू कार्यों तक सीमित थीं, वहीं अब वे अपना व्यवसाय चला रही हैं. आंकड़े बताते हैं कि पिछले एक साल में ऐसे उद्यमियों की संख्या तेजी से बढ़ी है जिनकी वार्षिक आय एक लाख रुपये से अधिक पहुंच चुकी है. इससे यह साफ है कि कृषि उद्यमिता महिलाओं के लिए आय का मजबूत साधन बनती जा रही है.

करोड़ों रुपये का कारोबार

कृषि उद्यमियों के जरिए बीज, खाद, नर्सरी और कृषि से जुड़े सामान की खरीद-बिक्री का बड़ा नेटवर्क तैयार हो गया है। इसके माध्यम से करोड़ों रुपये का कारोबार हो रहा है। इससे किसानों को अपने आसपास ही जरूरी कृषि सामग्री आसानी से मिल रही है और खेती से जुड़े कारोबार को भी बढ़ावा मिल रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे स्तर पर शुरू हुए ये प्रयास अब बड़े आर्थिक मॉडल का रूप लेते नजर आ रहे हैं, जिससे गांवों में रोजगार और आय के नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं।

किसानों और बाजार के बीच बन रहे मजबूत संबंध

कृषि उद्यमियों की एक बड़ी भूमिका किसानों को बाजार से जोड़ने की भी है. कई उद्यमी किसान उत्पादक कंपनियों और कृषि संगठनों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं. इससे किसानों को अपनी उपज बेचने के बेहतर अवसर मिल रहे हैं और उन्हें उचित दाम मिलने की संभावना भी बढ़ रही है. साथ ही खेती से जुड़ी नई तकनीकों और योजनाओं की जानकारी भी किसानों तक पहुंच रही है.

कार्यक्रम के दौरान बेहतर काम करने वाले कृषि उद्यमियों और किसान उत्पादक कंपनियों को सम्मानित भी किया गया. इसका उद्देश्य अन्य लोगों को भी कृषि उद्यमिता की ओर प्रेरित करना है.

ग्रामीण विकास का नया मॉडल

बिहार में महिला कृषि उद्यमियों की यह पहल अब ग्रामीण विकास का सफल मॉडल बनती जा रही है. इससे किसानों को बेहतर सेवाएं मिल रही हैं, महिलाओं की आय बढ़ रही है और गांवों में रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं. आने वाले समय में यह मॉडल कृषि क्षेत्र को और मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.

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