E20 पेट्रोल की अनिवार्य बिक्री के फैसले से कृषि सेक्टर को मिलेगा बूस्ट, गाड़ी और जलवायु पर कैसा होगा असर?
पेट्रोल कंपनियों को 20 फीसदी इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल की बिक्री अनिवार्य करने से मक्का और गन्ना किसानों को लाभ पहुंचने वाला है. क्योंकि, 95 फीसदी इथेनॉल इन्हीं दोनों कृषि उत्पादों से बनता है. देश का कुल इथेनॉल उत्पादन 1,039 करोड़ लीटर है. इसमें से गन्ना के शीरा, गुड़ से बनने वाला इथेनॉल 321 करोड़ लीटर है और मक्का से बनने वाला इथेनॉल 498 करोड़ लीटर है. ताजा फैसले के बाद अब इन दोनों कृषि उत्पादों का इस्तेमाल और बढ़ेगा, जो किसानों के लिए लाभकारी होगा.
केंद्र सरकार ने तेल और गैस कंपनियों को 1 अप्रैल 2026 से देशभर में पेट्रोल पंप पर 20 फीसदी इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल बेचने का आदेश दिया है. हालांकि, फ्यूल न्यूनतम 95 के रिसर्च ऑक्टेन नंबर (RON) को पूरा करता हो. केंद्र के इस फैसले से किसानों को भी लाभ मिलने वाला है. क्योंकि, गन्ना के साथ ही मक्का और अन्य मोटे अनाजों का इस्तेमाल इथेनॉल बनाने में किया जा रहा है. हालिया आंकड़े कहते हैं कि गन्ना की तुलना में मक्का से इथेनॉल बनाने का आंकड़ा नए रिकॉर्ड पर पहुंच गया है. वहीं, केंद्र के इस फैसले पर इंडस्ट्री ने सकारात्मक रुख दिखाया है और इसे बड़ी पहल करार दिया है.
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने नोटिफिकेशन जारी करते हुए कहा है कि तेल मार्केटिंग कंपनियों को 1 अप्रैल 2026 से सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 20 फीसदी तक इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल बेचना होगा. ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन (AIDA) ने 1 अप्रैल, 2026 से कम से कम RON 95 वाले E20 पेट्रोल की पूरे देश में बिक्री को जरूरी करने के सरकार के फैसले का स्वागत किया है. एसोसिएशन ने कहा है कि यह एक प्रोग्रेसिव और आगे की सोच वाला कदम है जो एनर्जी सिक्योरिटी, क्लीनर मोबिलिटी और सस्टेनेबल इकोनॉमिक ग्रोथ के प्रति भारत के कमिटमेंट को मजबूत करता है.
पेट्रोल बिक्री में RON-95 की शर्त क्यों रखी गई
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय ने 1 अप्रैल से जो ई20 पेट्रोल की अनिवार्यता के साथ ही यह शर्त भी लागू की है कि पेट्रोल न्यूनतम 95 के रिसर्च ऑक्टेन नंबर (RON) को पूरा करने वाला होना चाहिए. दरअसल यह RON-95 ईंधन की स्थिरता को मापता है और यह दर्शाता है कि ईंधन जलने से पहले कितना कंप्रेशन सहन कर सकता है. इसके साथ ही इसकी हाई क्वालिटी बढ़िया परफारमेंस को दिखाता है. जितना अधिक RON उतनी बेहतर इंजन में स्मूथ और नियंत्रित जलन शक्ति होती है. हाई परफॉर्मेंस या नए मॉडल के वाहनों में RON 95 जैसे उच्च ऑक्टेन ईंधन की सिफारिश की जाती है. RON 95 मतलब 95 ऑक्टेन रेटिंग वाला ईंधन जो बेहतर इंजन प्रदर्शन और कम नॉकिंग देता है. इथेनॉल मिलाने से पेट्रोल का RON बढ़ता है.
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क्या पॉवर पेट्रोल की बिक्री बंद हो जाएगी
अब यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या पॉवर पेट्रोल की बिक्री बंद हो जाएगी, तो यह नहीं होगा. यानी पॉवर पेट्रोल की बिक्री जारी रहेगी और इसे बंद नहीं किया जाएगा. एक्सपर्ट ने बताया कि पॉवर पेट्रोल का मतलब है हायर ऑक्टेन फ्यूल, यानी पॉवर पेट्रोल में 95 से 100 तक ऑक्टेन होता है. पॉवर पेट्रोल गाड़ी की हाई परफॉर्मेंस देता है. इसकी पॉवर पेट्रोल की बिक्री जारी रहेगी. पेट्रोलियम मंत्रालय ने अपने नोटीफिकेशन में पॉवर पेट्रोल को बंद करने की गाइडलाइन नहीं दी हैं. ऐसे में फिलहाल तो पॉवर पेट्रोल की बिक्री बंद नहीं होगी.
क्या इथेनॉल वाले पेट्रोल से गाड़ी का एवरेज कम हो जाता है या इंजन पर असर पड़ता है
चीनी उद्योग के शीर्ष निकाय इस्मा (ISMA) ने कहा है भारत का इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम वैज्ञानिक रूप से मान्य है और विश्व स्तर पर सही साबित हो चुका है. E20 ईंधन से वाहन इंजनों को नुकसान पहुचने के दावों के विपरीत तेल विपणन कंपनियों (OMCs) के परीक्षण और ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) के प्रमाणन ने भारतीय वाहनों के लिए E20 सही होने की पुष्टि की है. पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने पहले ही आधिकारिक आंकड़े और तकनीकी निष्कर्ष जारी कर दिए हैं जो इथेनॉल की बेहतर ईंधन विशेषताओं की पुष्टि करते हैं. इसलिए यह कहना कि ई20 ईंधन से गाड़ी का एवरेज कम मिलता है या इंजन पर बुरा असर पड़ता है ये पूरी तरह से गलत धारणा है.
ई20 के इस्तेमाल से गाड़ी के इंजन, ड्राइविंग एक्सपीरिएंस और जलवायु पर क्या असर होगा
ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन (AIDA) के प्रेसीडेंट विजेंद्र सिंह ने कहा है कि कंज्यूमर के नजरिए से रिसर्च ऑक्टेन नंबर (RON) 95 वाले E20 फ्यूल की शुरुआत खास तौर पर जरूरी है. ज्यादा ऑक्टेन रेटिंग से कंबशन एफिशिएंसी बेहतर होती है और कम्पैटिबल गाड़ियों में इंजन की परफॉर्मेंस बेहतर होती है. यह E20 फ्यूल के लिए डिजाइन की गई गाड़ियों में इंजन की आवाज को कम करता है, जिससे ऑपरेशन आसान होता है और ड्राइविंग का अनुभव बेहतर होता है. इथेनॉल-मिला हुआ फ्यूल भी ज्यादा साफ जलता है, जिससे कार्बन मोनोऑक्साइड और ग्रीनहाउस गैस का एमिशन कम होता है, और आखिर में हवा की क्वालिटी बेहतर होती है.
देश का कुल इथेनॉल उत्पादन और मक्का-गन्ना का इस्तेमाल कितना
भारत में इथेनॉल क्रांति ESY 2024-25 में मक्का मुख्य फीडस्टॉक के तौर पर उभरा है और कुल इथेनॉल सप्लाई का लगभग 50 फीसदी हिस्सा मक्का का है. इसके साथ ही इथेनॉल बनाने के लिए गन्ना की निर्भरता बहुत कम हो गई है. गन्ना के शीरा, गुड़ से बनने वाला इथेनॉल 321 करोड़ लीटर है और मक्का से बना इथेनॉल 498 करोड़ लीटर के पार पहुंच गया है. देश का कुल सालाना इथेनॉल उत्पादन 1,039 करोड़ लीटर के पार पहुंच गया है. डेटा से पता चलता है कि अनाज से बने इथेनॉल की हिस्सेदारी 718 करोड़ लीटर रही है. इसमें से मक्का से बना इथेनॉल 498 करोड़ लीटर है. जबकि गन्ने से बने इथेनॉल की हिस्सेदारी 321 करोड़ लीटर है.
मक्का, गन्ना का इस्तेमाल बढ़ेगा और किसानों को फायदा मिलेगा
यह कदम देशभर में इथेनॉल प्रोड्यूसर्स को लंबे समय तक डिमांड को पक्का करता है, जिससे अनाज से बनी डिस्टिलरी, मक्का प्रोसेसर और चीनी मिलों को फायदा होगा. यह बायोफ्यूल इकोसिस्टम में नए इन्वेस्टमेंट, कैपेसिटी बढ़ाने और टेक्नोलॉजिकल एडवांसमेंट को बढ़ावा देगा, साथ ही गन्ना, मक्का और दूसरे फीडस्टॉक्स की ज्यादा मांग से किसानों की इनकम भी मजबूत करेगा.
इस्मा के महानिदेशक दीपक बल्लानी ने कहा कि सरकार का ताजा फैसला आर्थिक नजरिए से देश के पांच करोड़ से अधिक गन्ना किसानों के लिए एक क्रांतिकारी बदलाव के रूप में उभरा है. इथेनॉल इकोसिस्टम के जरिए किसानों को 1.18 लाख करोड़ रुपये से अधिक ट्रांसफर किए गए हैं. इससे चीनी मिलों की वित्तीय स्थिति में सुधार हुआ है और किसानों को समय पर भुगतान पक्का हुआ है. जबकि, मक्का किसानों को तय एमएसपी से ज्यादा भाव मिलने का रास्ता साफ हुआ है और अधिक भाव किसानों को मिलता है और उनकी उपज बिकने में भी कम समय लगता है.