E20 फ्यूल इस्तेमाल से गाड़ी के इंश्योरेंस वैलिडिटी पर कोई असर नहीं, क्लेम रिजेक्ट नहीं करेंगी बीमा कंपनियां 

सरकार ने कहा है कि E20 पेट्रोल के लॉन्च के बाद से इथेनॉल ब्लेंडिंग से जुड़े इंजन फेल होने या गाड़ी खराब होने की कोई बड़ी खबर नहीं आई है. ऑटोमोबाइल बनाने वाली कंपनियों, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों और टेस्टिंग एजेंसियों के साथ मिलकर गाड़ियों की परफॉर्मेंस पर नजर रखी जा रही है.

रिजवान नूर खान
नोएडा | Updated On: 24 Jun, 2026 | 03:18 PM

केंद्र सरकार ने उन चिंताओं को खारिज कर दिया है कि E20 फ्यूल के इस्तेमाल से गाड़ी के इंश्योरेंस पॉलिसी की वैलिडिटी पर असर पड़ सकता है. सरकार का कहना है कि भारत का इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम सुरक्षित, ग्राहकों के लिए फायदेमंद और आर्थिक रूप से लाभकारी है. ऑयल मिनिस्ट्री ने बयान में कहा कि E20 फ्यूल के इस्तेमाल से इंश्योरेंस के अमान्य होने की बातों पर संबंधित स्टेकहोल्डर्स के साथ बातचीत की गई और ये बातें गलत पाई गईं.

वाहनों के इंश्योरेंस कवरेज या क्लेम अमान्य नहीं होंगे

सरकार का कहना है कि इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम सुरक्षित है. मंत्रालय के आधिकारिक बयान में कहा गया कि इथेनॉल ब्लेंडिंग दुनिया भर में अपनाई जाने वाली प्रक्रिया है और इसे अमेरिका, ब्राजील और जापान जैसे कई देशों में सफलतापूर्वक लागू किया गया है. मंत्रालय ने गाड़ी मालिकों को भरोसा दिलाया कि इथेनॉल-ब्लेंडेड पेट्रोल के इस्तेमाल से इंश्योरेंस कवरेज या क्लेम अमान्य नहीं होंगे.

सरकार ने यह भी बताया कि E20 पेट्रोल के लॉन्च के बाद से इथेनॉल ब्लेंडिंग से जुड़े इंजन फेल होने या गाड़ी खराब होने की कोई बड़ी खबर नहीं आई है. ऑटोमोबाइल बनाने वाली कंपनियों, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों और टेस्टिंग एजेंसियों के साथ मिलकर गाड़ियों की परफॉर्मेंस पर नजर रखी जा रही है.

गन्ना के रस, मक्का, चावल से इथेनॉल बनाने की प्रक्रिया पर सफाई

मंत्रालय ने गुमराह करने वाली बातों से सावधान किया, जिनमें कहा गया था कि गन्ने के रस को सीधे पेट्रोल में मिलाया जाता है. मंत्रालय ने साफ किया कि फ्यूल में इस्तेमाल होने वाला इथेनॉल फर्मेंटेशन और डिस्टिलेशन जैसी औद्योगिक प्रक्रियाओं से बनाया जाता है, ताकि ब्लेंडिंग से पहले यह कड़े क्वालिटी स्टैंडर्ड्स को पूरा करे. मंत्रालय ने कहा कि इथेनॉल गन्ने के रस, शीरे (मोलासेस), मक्का और टूटे हुए चावल जैसे फीडस्टॉक से बनाया जाता है, लेकिन प्रोसेसिंग के कारण इसके अंतिम गुण काफी अलग होते हैं.

E20 के चलते फ्यूल टैंक के पास चीटियां होने का दावा खारिज

गाड़ी के फ्यूल कैप के पास चींटियां दिखने वाले वायरल वीडियो पर भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) ने बताया कि फ्यूल ग्रेड इथेनॉल में बची हुई चीनी नहीं होती है. इसके अलावा इथेनॉल में ऐसे डीनेचुरेंट मिलाए जाते हैं जो कीड़ों को दूर रखते हैं, जिससे ऐसे दावे वैज्ञानिक रूप से गलत साबित होते हैं. मंत्रालय ने इस बात पर जोर दिया कि आधुनिक गाड़ियों में ऐसे सुरक्षा उपाय होते हैं जो फ्यूल टैंक में पानी मिलने जैसी समस्याओं को रोकते हैं. ग्राहकों से अपील की गई है कि वे बिना पुष्टि वाले दावों के बजाय सही जानकारी और वैज्ञानिक सबूतों पर भरोसा करें.

इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम का कृषि और ग्रामीण व्यवस्था में मजबूत योगदान

इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) के अनुसार इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम (EBP) ने कच्चे तेल के आयात पर भारत की निर्भरता कम करने में अहम भूमिका निभाई है, जिससे विदेशी मुद्रा में 1.4 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की बचत हुई है. इसने कृषि उत्पादों और फीडस्टॉक की लगातार मांग भी पैदा की है, जिससे किसानों को मदद मिली है और ग्रामीण आर्थिक विकास में योगदान मिला है. पर्यावरण के नजरिए से इथेनॉल मिलाने से कार्बन उत्सर्जन कम करने में मदद मिलती है और भारत के साफ-सुथरे ट्रांसपोर्टेशन समाधानों की ओर बढ़ने में सहयोग मिलता है.

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Published: 24 Jun, 2026 | 03:17 PM

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