केंद्र ने तमिलनाडु की मांग ठुकराई, 17 प्रतिशत से अधिक नमी वाले धान की नहीं होगी खरीद

केंद्र सरकार ने तमिलनाडु की उस मांग को खारिज कर दिया है, जिसमें धान की खरीद के लिए नमी की सीमा को बढ़ाने का आग्रह किया गया था. सरकार का कहना है कि ज्यादा नमी वाला धान खरीदना न केवल भंडारण के लिए खतरनाक है, बल्कि इससे अनाज की गुणवत्ता और मिलिंग रिकवरी भी बुरी तरह प्रभावित होती है.

नई दिल्ली | Published: 12 Feb, 2026 | 08:16 AM

Paddy procurement: धान खरीद को लेकर केंद्र सरकार और तमिलनाडु सरकार के बीच चल रही मांग–बहस पर अब स्थिति साफ हो गई है. केंद्र सरकार ने तमिलनाडु की उस मांग को खारिज कर दिया है, जिसमें धान की खरीद के लिए नमी की सीमा को बढ़ाने का आग्रह किया गया था. सरकार का कहना है कि ज्यादा नमी वाला धान खरीदना न केवल भंडारण के लिए खतरनाक है, बल्कि इससे अनाज की गुणवत्ता और मिलिंग रिकवरी भी बुरी तरह प्रभावित होती है. यह जानकारी संसद में खुद केंद्र सरकार की ओर से दी गई है.

तमिलनाडु की क्या थी मांग

बिजनेस स्टैंडर्ड की खबर के अनुसार, तमिलनाडु सरकार ने केंद्र से अनुरोध किया था कि धान खरीद के लिए तय नमी सीमा को 17 प्रतिशत से बढ़ाकर 22 प्रतिशत कर दिया जाए. राज्य का तर्क था कि कटाई के समय मौसम और नमी की स्थिति को देखते हुए किसानों को राहत मिलनी चाहिए, ताकि ज्यादा से ज्यादा धान की सरकारी खरीद हो सके. इस मांग को लेकर मामला संसद तक पहुंचा, जहां केंद्र सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा गया.

संसद में क्या बोली केंद्र सरकार

लोकसभा में दिए गए लिखित जवाब में खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय की राज्य मंत्री निमुबेन जयंतिभाई बंभाणिया ने साफ कहा कि तमिलनाडु सरकार की यह मांग स्वीकार नहीं की गई है. उन्होंने बताया कि ज्यादा नमी वाला धान खरीदने से भंडारण के दौरान बड़े स्तर पर नुकसान का खतरा रहता है. नमी अधिक होने पर अनाज जल्दी खराब हो सकता है, उसमें फंगस लगने की आशंका बढ़ जाती है और रंग भी बदल सकता है.

ज्यादा नमी वाला धान क्यों है खतरे की घंटी

केंद्र सरकार के अनुसार, धान को मिलिंग से पहले सुखाया जा सकता है, लेकिन अगर बहुत अधिक नमी वाला धान सीधे खरीदा जाए तो इससे कई तरह की दिक्कतें खड़ी हो जाती हैं. भंडारण के दौरान अनाज के खराब होने, कीड़े लगने और स्टॉक के नुकसान का जोखिम बढ़ जाता है. इतना ही नहीं, ज्यादा नमी होने से चावल निकालने की प्रक्रिया यानी मिलिंग रिकवरी भी प्रभावित होती है, जिससे सरकारी एजेंसियों को नुकसान उठाना पड़ता है.

किसानों को आर्थिक नुकसान नहीं, इसलिए छूट नहीं

राज्य मंत्री निमुबेन बंभाणिया ने यह भी साफ किया कि नमी की सीमा में छूट देने से किसानों को कोई सीधा आर्थिक फायदा नहीं होता. सरकार के मुताबिक, इस तरह की छूट से किसानों की आमदनी में कोई बढ़ोतरी नहीं होती, बल्कि भंडारण और गुणवत्ता से जुड़ी समस्याएं बढ़ जाती हैं. इसी वजह से केंद्र सरकार ने यह तय किया है कि नमी की सीमा में किसी तरह की ढील अब नहीं दी जाएगी.

राज्य सरकारों को दी गई अहम सलाह

केंद्र सरकार ने राज्यों को यह सलाह भी दी है कि धान खरीद केंद्रों पर बेहतर जल निकासी की व्यवस्था की जाए. कई बार खेतों या मंडियों में पानी जमा होने से धान में नमी बढ़ जाती है. अगर खरीद केंद्रों पर सही इंतजाम हों, तो धान की नमी को तय मानकों के भीतर रखा जा सकता है और किसानों को भी परेशानी नहीं होगी.

धान खरीद का लक्ष्य भी तय

केंद्र सरकार ने खरीफ विपणन सीजन 2025-26 (जुलाई से जून) के लिए धान खरीद का लक्ष्य भी तय कर दिया है. इस सीजन में केंद्र ने 16 लाख टन चावल (धान के रूप में) की खरीद का लक्ष्य रखा है. सरकार का कहना है कि तय मानकों के तहत खरीद से ही सार्वजनिक वितरण प्रणाली और भंडारण व्यवस्था को सुरक्षित रखा जा सकता है.

फोर्टिफाइड राइस को लेकर भी बदलाव

धान और चावल से जुड़े नियमों में एक और अहम बदलाव की जानकारी भी संसद में दी गई. केंद्र सरकार ने फोर्टिफाइड राइस कर्नेल (FRK) के सैंपलिंग और पैकेजिंग नियमों में संशोधन किया है. अब FRK का सैंपल साइज 10 टन से बढ़ाकर 21 टन कर दिया गया है, जबकि पैकेजिंग साइज 25 किलो से बढ़ाकर 50 किलो कर दिया गया है. सरकार का मानना है कि इससे निगरानी और वितरण व्यवस्था और बेहतर होगी.

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