मिलावटी दूध पीने से 16 लोगों की मौत मामले में केंद्र सख्त, राज्य के मुख्य सचिव और डीजीपी को नोटिस जारी
Milk Adulteration: आंध्र प्रदेश में मिलावटी दूध पीने से 16 लोगों की मौत मामले में राज्य के मुख्य सचिव और डीजीपी को नोटिस जारी किया गया है. ज्यादातर पीड़ित लोगों में बच्चे और बुजुर्ग थे. यहां पर दूध में मिलावट की पहचान का आसान तरीका भी उपभोक्ताओं के लिए बताया जा रहा है...
How to Know Milk Adulteration : आंध्र प्रदेश में 23 मार्च को मिलावटी दूध पीने से 16 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि, 4 लोगों का अभी भी अस्पताल में इलाज चल रहा है. मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान लेते हुए राज्य के मुख्य सचिव और डीजीपी को नोटिस जारी किया है. आयोग ने कहा है कि दो सप्ताह के भीतर इस मामले पर विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करें. आयोग ने स्पष्ट किया है कि रिपोर्ट में मृतक के स्वास्थ्य की स्थिति, जांच और उनके परिजनों को यदि कोई मुआवजा दिया गया है तो उसकी डिटेल्स भी शामिल करें.
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने उस मीडिया रिपोर्ट का संज्ञान लिया है, जिसमें बताया गया है कि आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले के लालाचेरुवु, चौदेश्वरननगर और स्वरूपनगर क्षेत्रों में फरवरी के मध्य से अब तक मिलावटी दूध के सेवन से 16 लोगों की मौत हो चुकी है. कम से कम चार अन्य लोगों का भी इसी तरह के लक्षणों के साथ चिकित्सा उपचार चल रहा है.
नरसापुरम डेयरी का दूध पीकर बीमार हुए लोग
रिपोर्ट में बताया गया है कि दूध में एथिलीन ग्लाइकॉल नामक विषैला पदार्थ मिलाया गया था, जिसके कारण दूध का सेवन करने वाले लोगों के कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया. मिलावट का संदिग्ध स्रोत नरसपुरम गांव में स्थित एक डेयरी है, जो क्षेत्र के 100 से अधिक घरों को दूध की आपूर्ति करती है. इस डेयरी से आने वाले दूध पीकर लोगों को तबियत खराब हुई और देखते ही देखते कई लोग गंभीर हालत में चले गए.
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मृतकों के परिजनों को मुआवजा आदि की जानकारी मांगी
आयोग ने कहा है कि समाचार रिपोर्ट में दर्ज तथ्य यदि सत्य हैं तो यह पीड़ितों के मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन का मुद्दा बनता है. इसलिए आयोग ने मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर इस मामले पर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है. साथ ही कहा है कि रिपोर्ट में मृतकों की स्वास्थ्य स्थिति, जांच और मृतकों के परिजनों को यदि कोई मुआवजा दिया गया हो, तो उसका विवरण शामिल होना चाहिए.
पीड़ितों में बच्चे और बुजुर्गों की संख्या ज्यादा
दूध पीकर लोगों के बीमार पड़ने के मामले फरवरी 2026 के बाद 23 मार्च को भी सामने आए. जब पीडि़तों को पेट दर्द, उल्टी, पेशाब न आना और गुर्दे की गंभीर खराबी जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं होने लगीं. इन पीड़ितों में अधिकतर या तो बुजुर्ग व्यक्ति या छोटे बच्चे थे. आयोग ने कहा है कि राज्य सरकार ने मृतकों के परिजनों के लिए अब तक क्या कया है, इस बारे में भी रिपोर्ट में डिटेल्स दी जाएं.
दूध में मिलावट की पहचान करने के लिए लैक्टोमीटर टेस्ट करें
दूध में सबसे आम मिलावट पानी मिलाना है. पशुपालन विभाग के अनुसार दूध में मिलावट होने का पता लगाने का आसान तरीका है लैक्टोमीटर टेस्ट है. जांच के लिए सबसे पहले साफ कांच के जार में दूध डालें और उसमें लैक्टोमीटर डुबोएं और लैक्टोमीटर का रीडिंग देखें. शुद्ध दूध का सघनत्व (specific gravity) आमतौर पर 1.026 से 1.032 के बीच होता है. यदि रीडिंग इससे कम है तो दूध में मिलावट होगी.
अगर आपके पास लैक्टोमीटर नहीं है, तो आप घर पर भी एक साधारण लैक्टोमीटर बना सकते हैं. एक पतली शीशी या ट्यूब लें. उसमें थोड़े सीसे के छोटे टुकड़े या धातु की गोलियां डालें. दोनों सिरे अच्छी तरह बंद कर दें. इसे पहले शुद्ध दूध में टेस्ट करके जांच करें.