Paddy Purchase: हरियाणा के धान खरीदी में फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है. कहा जा रहा है कि 2025- 26 के धान खरीद सीजन में एक बार फिर अनियमितता सामने आई है. आरोप है कि हैफेड ने करनाल जिले की नौ राइस मिलों को तय क्षमता से अधिक धान आवंटित कर दिया, जो कस्टम मिलिंग राइस (सीएमआर) नीति का उल्लंघन है. सूत्रों के अनुसार यह अतिरिक्त आवंटन जिला मिलिंग कमेटी (डीएमसी) की मंजूरी के बिना किया गया, जिसके बाद पांच अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई है.
द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, बताया जा रहा है कि हैफेड अधिकारियों ने इन मिलों को उनकी स्वीकृत सीमा से 67 हजार क्विंटल से ज्यादा अतिरिक्त धान दे दिया. इनमें जुंडला और नीलोखेड़ी की दो-दो मिलें शामिल हैं, जबकि असंध, घरौंडा, करनाल, कुंजपुरा और तरावड़ी की एक-एक मिल को भी लाभ मिला. द ट्रिब्यून को मिले आंकड़ों के मुताबिक, नीति के तहत इन मिलों को करीब 3.97 लाख क्विंटल धान मिलना था, लेकिन वास्तव में उन्हें लगभग 4.64 लाख क्विंटल धान आवंटित कर दिया गया.
पुलिस जांच के दौरान अनियमितताएं उजागर हुईं
हैफेड मुख्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस चूक की पुष्टि करते हुए कहा कि यह मामला उनके संज्ञान में आ चुका है और बिना अनुमति किए गए आवंटन में शामिल अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी. यह पहली बार नहीं है जब मौजूदा धान खरीद सीजन में ऐसी गड़बड़ियां सामने आई हों. इससे पहले भी 2025- 26 धान खरीद से जुड़े मामलों में दर्ज कई एफआईआर की पुलिस जांच के दौरान इसी तरह की अनियमितताएं उजागर हो चुकी हैं.
आईपी एड्रेस से फर्जी गेट पास बनाए गए
करनाल पुलिस ने अब तक ‘घोस्ट प्रोक्योरमेंट’ से जुड़े छह एफआईआर दर्ज की हैं. इन मामलों में शहर से बाहर के आईपी एड्रेस से फर्जी गेट पास बनाए गए, कागजों में ही धान की खरीद दिखाई गई, मिलों में स्टॉक की कमी पाई गई और बिना रिकॉर्ड तथा घटिया गुणवत्ता का चावल बरामद हुआ है. पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि कई मामलों में अलग-अलग खरीद एजेंसियों ने जिला मिलिंग कमेटी (डीएमसी) की मंजूरी के बिना राइस मिलरों को उनकी तय क्षमता से ज्यादा धान आवंटित किया.
डीएमसी की मंजूरी अनिवार्य होती है
वहीं, जांच के दौरान जीपीएस लोकेशन में गड़बड़ी, बाहर से जारी फर्जी गेट पास और मिलों को किए गए असमान व अनधिकृत धान आवंटन की भी पड़ताल की जा रही है. सीएमआर नीति के तहत धान का आवंटन मिल की स्वीकृत क्षमता और पिछले प्रदर्शन के आधार पर ही किया जाता है. इसके लिए जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक (डीएफएससी) द्वारा पंजीकरण और निरीक्षण के बाद ही डीएमसी की मंजूरी अनिवार्य होती है.