जशपुर के किसानों की बढ़ी आमदनी! एक एकड़ से नाशपाती ने दिलाई 1.5 लाख तक की कमाई, पूरे देश में बढ़ी मांग

Jashpur Pear Farming: जशपुर में नाशपाती की खेती किसानों की आय बढ़ाने का बड़ा जरिया बन गई है. यहां 3500 से अधिक किसान लगभग 3500 हेक्टेयर में नाशपाती का उत्पादन कर रहे हैं. जशपुर की नाशपाती अपनी क्वालिटी और स्वाद के कारण दिल्ली, यूपी, ओडिशा समेत कई राज्यों में भेजी जाती है.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 18 May, 2026 | 07:22 PM

Pear Farming Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ का जशपुर जिला आज सिर्फ अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के लिए ही नहीं, बल्कि किसानों की बदलती किस्मत के लिए भी चर्चा में है. जहां पहले खेती का दायरा सीमित था, वहीं अब नाशपाती की बागवानी ने यहां के ग्रामीण जीवन में नई उम्मीद जगा दी है. खेतों में लहलहाते फलों ने किसानों की आमदनी को नई ऊंचाई दी है और जशपुर को फल उत्पादन के उभरते केंद्र के रूप में पहचान दिलाई है. अच्छे मौसम, सरकारी मदद और तकनीकी सहयोग की वजह से यह इलाका अब फल उत्पादन का एक उभरता हुआ केंद्र बनता जा रहा है.

3500 हेक्टेयर में फैलती नाशपाती की खुशबू

जशपुर जिले में अब 3500 से ज्यादा किसान करीब 3500 हेक्टेयर जमीन पर नाशपाती की खेती कर रहे हैं. यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि गांवों की अर्थव्यवस्था में हो रहे बड़े बदलाव को दिखाता है. यहां हर साल लगभग 1.75 लाख क्विंटल नाशपाती का उत्पादन होता है, जिससे हजारों किसानों और उनके परिवारों की आमदनी में स्थिरता आई है और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है.

किसानों की आय में बड़ा उछाल

नाशपाती की खेती अब किसानों के लिए काफी फायदेमंद साबित हो रही है. एक एकड़ जमीन से किसानों को औसतन 1 लाख से 1.50 लाख रुपये तक सालाना कमाई हो रही है. यह कमाई पारंपरिक फसलों की तुलना में ज्यादा स्थिर और बेहतर मानी जा रही है. इसी वजह से अब किसान तेजी से बागवानी की ओर आकर्षित हो रहे हैं और इसे अपनाने लगे हैं.

देशभर में जशपुर की नाशपाती की बढ़ती मांग

जशपुर की नाशपाती अपने बेहतरीन स्वाद, अच्छे आकार और उच्च क्वालिटी के लिए मशहूर है. यहां के सन्ना, पंडरापाठ, कंवई, महुआ, सोनक्यारी, मनोरा, धवईपाई और गीधा जैसे इलाकों से नाशपाती की बड़ी खेप दिल्ली, उत्तर प्रदेश, ओडिशा समेत कई राज्यों में भेजी जाती है. फलों को कैरेट में बहुत सावधानी से पैक किया जाता है. हॉर्टिकल्चर विभाग और नाबार्ड की मदद से किसानों को लगातार प्रशिक्षण दिया जा रहा है. उन्हें पौधरोपण, बाग की देखभाल, सिंचाई के आधुनिक तरीके और फसल बेचने (मार्केटिंग) से जुड़ी जरूरी जानकारी दी जा रही है.

इसके साथ ही राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत नाशपाती क्षेत्र विस्तार योजना भी चलाई जा रही है, जिसके जरिए किसानों को आर्थिक मदद (अनुदान) और तकनीकी सहयोग दोनों मिल रहे हैं.

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रही नई दिशा

रायपुर से चल रही राज्य सरकार की पहल और मुख्यमंत्री के नेतृत्व में जशपुर में बागवानी आधारित खेती को नई दिशा मिली है. नाशपाती की खेती न सिर्फ किसानों की आय बढ़ा रही है, बल्कि पूरे जिले को फल उत्पादन के एक उभरते केंद्र के रूप में भी पहचान दिला रही है.

जशपुर की नाशपाती की कहानी सिर्फ खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण समृद्धि की एक मिसाल बन चुकी है. सही तकनीक, सरकारी सहयोग और मेहनती किसानों की वजह से यह क्षेत्र आने वाले समय में देश के बड़े फल उत्पादन केंद्रों में अपनी मजबूत पहचान बना सकता है.

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Published: 18 May, 2026 | 07:22 PM

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