UP River Plantation Drive: उत्तर प्रदेश को हराभरा और स्वच्छ बनाने की दिशा में डबल इंजन सरकार एक बड़ा कदम उठा रही है. राज्य में पर्यावरण संरक्षण और नदी तटों के विकास को नई गति देने के लिए ‘कंटीन्यूअस फ्लो प्लांटेशन अभियान’ के तहत 4.35 करोड़ पौधे लगाए जाएंगे. इस अभियान के जरिए यमुना, गंगा, गोमती समेत कई प्रमुख नदियों के किनारों को हरित वन क्षेत्र के रूप में विकसित किया जाएगा. यह पहल न सिर्फ प्रकृति संरक्षण को मजबूती देगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ, सुरक्षित और ग्रीन उत्तर प्रदेश की मजबूत नींव भी तैयार करेगी.
‘अविरल धारा पौधरोपण’ योजना पर फोकस
राज्य सरकार की ‘अविरल धारा पौधरोपण’ योजना (Continuous Flow Plantation Campaign) के तहत अब नदियों के दोनों किनारों को हरा-भरा बनाया जाएगा. इसके लिए पूरे प्रदेश में 3,128 जगहों को चुना गया है, जहां बड़े स्तर पर पेड़ लगाए जाएंगे. करीब 22 हजार हेक्टेयर से ज्यादा इलाके में नए जंगल विकसित किए जाएंगे और कुल 4.35 करोड़ पौधे लगाए जाने की तैयारी है.
इस अभियान में नदियों के आसपास करीब 5 किलोमीटर तक पौधरोपण किया जाएगा, ताकि नदी किनारे मजबूत बने रहें और मिट्टी का कटाव कम हो. साथ ही ज्यादा पेड़ लगने से पानी बचाने और पर्यावरण को बेहतर बनाने में भी मदद मिलेगी. सरकार का लक्ष्य नदियों को सुरक्षित रखने के साथ प्रदेश को ज्यादा हराभरा बनाना है.
प्रमुख नदियों के किनारे पौधारोपण का लक्ष्य
| नदी | स्थल संख्या | क्षेत्रफल (हेक्टेयर) | पौधों की संख्या |
|---|---|---|---|
| यमुना | 723 | 6,503 | 1,20,74,904 |
| गंगा | 695 | 4,518 | 89,45,474 |
| बेतवा | 171 | 3,282 | 52,35,132 |
| गोमती | 453 | 1,496 | 47,64,963 |
| सरयू/घाघरा | 291 | 1,628 | 31,16,660 |
इसके अलावा सई नदी, राप्ती नदी, सोन नदी, केन नदी, छोटी गंडक नदी, रामगंगा नदी, हिंडन नदी और चंबल नदी जैसी प्रमुख नदियों के किनारों पर भी बड़े स्तर पर पौधरोपण किया जाएगा. सरकार का मानना है कि इन क्षेत्रों में हरित वन विकसित होने से जैव विविधता को बढ़ावा मिलेगा और पर्यावरणीय संतुलन मजबूत होगा.
पिछले सालों में भी चला अभियान
राज्य में बीते कुछ सालों से लगातार पौधरोपण अभियान चलाया जा रहा है.
| साल | पौधों की संख्या |
|---|---|
| 2023 | 2.50 करोड़ |
| 2024 | 3.72 करोड़ |
| 2025 | 4.35 करोड़ |
पर्यावरण संरक्षण के साथ रोजगार की उम्मीद
विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के बड़े पौधारोपण अभियान से केवल हरियाली ही नहीं बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे. पौधों की देखभाल, सिंचाई और रखरखाव में बड़ी संख्या में लोगों की जरूरत पड़ेगी. इसके अलावा हरित क्षेत्र विकसित होने से आसपास के गांवों और शहरों में तापमान नियंत्रित रखने में भी मदद मिल सकती है. गर्मी के बढ़ते असर और जल संकट को देखते हुए इस तरह की योजनाओं को भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
पर्यावरण संतुलन की दिशा में बड़ा कदम
नदियों के किनारे हरित वन विकसित करने की यह पहल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है. यदि योजना सही तरीके से लागू होती है, तो आने वाले समय में उत्तर प्रदेश की नदियों के आसपास हरियाली का नया स्वरूप देखने को मिल सकता है. इससे न केवल प्रकृति को फायदा होगा, बल्कि लोगों को स्वच्छ और बेहतर वातावरण भी मिल सकेगा.