Maharashtra Farmers News: एक किसान जो दिन-रात पसीना बहाकर देश का पेट भरता है, जब अपनी मेहनत की मजदूरी मांगने सरकारी दफ्तर के चक्कर काटकर थक जाता है, तो उसे उम्मीद होती है कि अधिकारी उसकी बात सुनेंगे. लेकिन, महाराष्ट्र के वाशिम जिले से ऐसी वीडियो सामने आई है, जो इंसानियत को शर्मसार कर दिया है. जहां एक तरफ सरकार किसानों की आय दोगुनी करने की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ एक जिम्मेदार पद पर बैठा अधिकारी एक गरीब किसान को बीच खेत में चप्पलों और थप्पड़ों से पीट रहा है. यह घटना सिर्फ एक मारपीट नहीं, बल्कि एक अन्नदाता के आत्मसम्मान पर गहरा घाव है.
मोबाइल निकाला तो खो दिया आपा, बरसाने लगे थप्पड़
मामला महाराष्ट्र के वाशिम जिले की मंगरूलपीर तहसील के गोगरी गांव का है. यहां के एक किसान ऋषिकेश पवार अपनी मनरेगा की मजदूरी (VB-G RAM G) न मिलने से परेशान थे. जब तहसील कृषि अधिकारी सचिन कांबले अपनी टीम के साथ खेत का सर्वे करने पहुंचे, तो ऋषिकेश वहां अपनी बात रखने गए. जैसे ही ऋषिकेश ने मोबाइल से वीडियो बनाना शुरू किया और अपने मुआवजे का हक मांगा, वैसे ही अधिकारी साहब का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया. कृषि अधिकारी ने आव देखा न ताव, पहले हाथ में पकड़े रजिस्टर से मोबाइल पर हमला किया और फिर किसान पर थप्पड़ों की बौछार कर दी. हद तो तब हो गई जब अधिकारी ने पैर से चप्पल निकालकर किसान को मारने की कोशिश की.
मजदूरी मांगी तो मिली पिटाई, अब इंसाफ नहीं मिला तो मर जाऊंगा
पीड़ित किसान ऋषिकेश पवार की आंखों में खौफ और बेबसी साफ देखी जा सकती है. ऋषिकेश का कहना है कि उसने कोई अपराध नहीं किया था, बस जिला कृषि अधिकारी दफ्तर में मनरेगा की रुकी हुई मजदूरी की शिकायत की थी. इसी बात की खुन्नस अधिकारी ने खेत में निकाली. टूटे मन से किसान ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि अगर उस दबंग अधिकारी को सस्पेंड नहीं किया गया, तो उसके पास आत्महत्या के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा. एक तरफ भूख की मार और दूसरी तरफ सरकारी सिस्टम का ये जुल्म, आखिर एक आम किसान कहां जाए?
वाशिममध्ये शेतकऱ्याला बुटाने मारहाण, कृषी अधिकाऱ्यांचा प्रताप; राज्यभरात संताप #viralvideo #Washimnews pic.twitter.com/weNAHKpgA1
— Ankita Shantinath Khane (@KhaneAnkita) January 14, 2026
दफ्तरों में हलचल, जांच की फाइल हुई तैयार
वीडियो के सोशल मीडिया पर आग की तरह फैलने के बाद विभाग की नींद टूटी है. जिला कृषि अधिकारी अनीसा महाबले ने खुद पीड़ित किसान से मुलाकात की और मामले की गंभीरता को समझा. खबर है कि आरोपी अधिकारी सचिन कांबले के खिलाफ एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर जॉइंट डायरेक्टर गणेश घोड़फडे को भेज दी गई है. अब गेंद बड़े अधिकारियों के पाले में है-क्या वे अपने साथी को बचाएंगे या एक गरीब किसान को न्याय दिलाएंगे? पूरा गांव और किसान संगठन अब इसी फैसले के इंतजार में हैं.
किसान संगठनों में भारी आक्रोश, निलंबन की मांग तेज
इस शर्मनाक घटना ने महाराष्ट्र के किसान संगठनों में गुस्से की लहर पैदा कर दी है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार किसान नेता किसान रविकांत तुपकर ने कड़े शब्दों में इस हरकत की निंदा की है. उन्होंने कहा कि जो अधिकारी अन्नदाता का सम्मान नहीं कर सकता, उसे सरकारी कुर्सी पर बैठने का कोई हक नहीं है. संगठन ने दो टूक शब्दों में कहा है कि अधिकारी का सिर्फ तबादला काफी नहीं होगा, उसे तुरंत सस्पेंड किया जाना चाहिए. अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो किसान सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे.