Veterinary Career: देश में डेयरी और पशुपालन का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है. अच्छी नस्ल की गाय और भैंस तैयार करने के लिए अब आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है. इसी वजह से पशुओं के प्रजनन और उपचार से जुड़े विशेषज्ञ डॉक्टरों की मांग भी लगातार बढ़ रही है. खासकर एनीमल गायनोकॉलोजी यानी पशुओं के प्रजनन उपचार के क्षेत्र में युवाओं के लिए नए अवसर तैयार हो रहे हैं. बरेली के एनीमल गायनोकॉलोजिस्ट डॉक्टर चिनमय ने किसान इंडिया से बातचीत में बताया कि आज के समय में पशु चिकित्सा केवल इलाज तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि इसमें आधुनिक तकनीकों के जरिए बेहतर नस्ल तैयार करने का काम भी तेजी से हो रहा है. उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में करियर बनाने वाले युवाओं के लिए सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में अच्छी संभावनाएं मौजूद हैं.
कैसे बनते हैं पशुओं के गायनोकॉलोजिस्ट डॉक्टर
डॉक्टर चिनमय ने बताया कि पशु चिकित्सक बनने के लिए सबसे पहले विद्यार्थियों को बीवीएससी एंड एएच यानी बैचलर ऑफ वेटरनरी साइंस एंड एनिमल हसबेंड्री का कोर्स करना होता है. ये कोर्स करीब साढ़े पांच साल का होता है. इसके बाद छात्र किसी विशेष विषय में स्नातकोत्तर पढ़ाई कर सकते हैं. उन्होंने बताया कि उन्होंने पशु गायनोकॉलोजी विषय में स्नातकोत्तर की पढ़ाई की. इसके लिए अखिल भारतीय स्तर की प्रवेश परीक्षा देनी होती है. परीक्षा में प्राप्त रैंक के आधार पर देश के बड़े संस्थानों में प्रवेश मिलता है. पढ़ाई के दौरान छात्रों को पशुओं के प्रजनन, गर्भधारण, बांझपन और आधुनिक तकनीकों से जुड़ी जानकारी दी जाती है.
एनीमल गायनोकॉलोजिस्ट डॉक्टर चिनमय ने बताया कि पशु प्रजनन क्षेत्र में इन विट्रो फर्टिलाइजेशन यानी आईवीएफ तकनीक का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है. इस तकनीक में अच्छी नस्ल वाली गायों से अंडाणु लेकर प्रयोगशाला में प्रक्रिया की जाती है. इसके बाद भ्रूण तैयार कर दूसरी गाय में प्रत्यारोपित किया जाता है. इससे कम समय में अधिक अच्छी नस्ल के पशु तैयार किए जा सकते हैं.
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एनीमल गायनोकॉलोजी क्षेत्र में युवाओं को मिल रहे बेहतर रोजगार अवसर.
फीस और पढ़ाई का खर्च कितना आता है
उन्होंने बताया कि पशु चिकित्सा की पढ़ाई सरकारी और निजी संस्थानों में उपलब्ध है. सरकारी संस्थानों में फीस अपेक्षाकृत कम होती है. स्नातकोत्तर स्तर पर कई संस्थानों में प्रति सेमेस्टर लगभग 18 से 20 हजार रुपये तक फीस लग सकती है. हालांकि ये फीस संस्थान के अनुसार अलग-अलग हो सकती है. पढ़ाई के दौरान विद्यार्थियों को प्रयोगशाला कार्य, पशु अस्पतालों में प्रशिक्षण और आधुनिक तकनीकों की जानकारी भी दी जाती है. यही वजह है कि यह क्षेत्र केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं रहता, बल्कि छात्रों को व्यावहारिक अनुभव भी मिलता है. उनका का मानना है कि देश में डेयरी उद्योग बढ़ने के साथ पशु चिकित्सकों की जरूरत भी बढ़ रही है. ग्रामीण क्षेत्रों में भी अब किसान बेहतर नस्ल और अधिक दूध उत्पादन के लिए आधुनिक तकनीकों का सहारा ले रहे हैं.
निजी क्षेत्र में शानदार करियर और बेहतर वेतन
डॉक्टर चिनमय ने बताया कि इस क्षेत्र में सरकारी नौकरियों के साथ निजी क्षेत्र में भी अच्छी संभावनाएं मौजूद हैं. आज कई डेयरी फार्म और पशुपालन कंपनियां आईवीएफ तकनीक और प्रजनन विशेषज्ञों की सेवाएं ले रही हैं. बड़ी डेयरी कंपनियां बेहतर नस्ल के पशु तैयार करने के लिए प्रशिक्षित विशेषज्ञों को प्राथमिकता दे रही हैं. उन्होंने कहा कि शुरुआती स्तर पर भी इस क्षेत्र में अच्छा वेतन मिल सकता है. अनुभव और विशेषज्ञता बढ़ने के साथ आय में तेजी से बढ़ोतरी होती है.
पशुपालन और डेयरी उद्योग के विस्तार के कारण आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र में रोजगार के अवसर और बढ़ने की संभावना है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि युवाओं की रुचि पशुपालन, विज्ञान और पशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में है, तो एनीमल गायनोकॉलोजी उनके लिए बेहतर करियर विकल्प साबित हो सकता है. आधुनिक तकनीकों के बढ़ते उपयोग के कारण यह क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ रहा है और भविष्य में इसकी मांग और अधिक बढ़ने की उम्मीद है.