विधानसभा में गूंजा चीनी का MSP और इथेनॉल मूल्य बढ़ाने का मुद्दा, किसानों और मिलों का संकट दूर होगा?

Sugar MSP and Ethanol Purchase price: महाराष्ट्र सरकार ने केंद्र से चीनी की न्यूनतम बिक्री कीमत (MSP) बढ़ाने और इथेनॉल की कीमत और खरीद कोटा बढ़ाने का आग्रह किया है. सरकार का कहना है कि वह चीनी इंडस्ट्री और गन्ना किसानों को मदद देने के लिए इन मांगों पर जोर दे रही है.

रिजवान नूर खान
नोएडा | Updated On: 3 Jul, 2026 | 03:23 PM

महाराष्ट्र सरकार ने चीनी के लिए ज्यादा MSP और इथेनॉल मूल्य के साथ खरीद कोटा बढ़ाने लिए केंद्र सरकार से मांग की है, क्योंकि शुगर एक्सपोर्ट पर रोक से चीनी इंडस्ट्री को नुकसान हो रहा है. विधानसभा में चर्चा के दौरान सरकार ने कहा कि गन्ने के एफआरपी में बढ़ोत्तरी से किसानों को भुगतान की जाने वाली रकम बढ़ गई है. जबकि, चीनी का बिक्री मूल्य यानी एमएसपी 7 साल से नहीं बढ़ाया गया है. इस स्थिति ने निजी और सहकारी चीनी मिलों पर वित्तीय बोझ बढ़ा दिया है, जो बड़े संकट का खतरा है.

चीनी की एमएसपी और इथेनॉल खरीद बढ़ाने की मांग

महाराष्ट्र सरकार ने केंद्र से चीनी की न्यूनतम बिक्री कीमत (MSP) बढ़ाने और इथेनॉल की कीमत और खरीद कोटा बढ़ाने का आग्रह किया है. सरकार का कहना है कि वह चीनी इंडस्ट्री और गन्ना किसानों को मदद देने के लिए इन मांगों पर जोर दे रही है, क्योंकि चीनी एक्सपोर्ट पर लगी पाबंदियों से वे प्रभावित हुए हैं. सहकारिता मंत्री बाबासाहेब पाटिल ने विधान परिषद में कहा कि राज्य सरकार ने केंद्र से चीनी के लिए MSP में बढ़ोत्तरी और चीनी मिलों द्वारा उत्पादित इथेनॉल की कीमत बढ़ाने के साथ ही खरीद कोटा भी बढ़ाने का अनुरोध किया है. उन्होंने कहा कि सरकार इन मांगों पर लगातार कार्रवाई कर रही है.

200 से ज्यादा मिलों और गन्ना किसानों पर आर्थिक संकट

किसानों को समय पर भुगतान नहीं होने और बकाया राशि फंसी होने के साथ ही चीनी मिलों पर बढ़ते वित्तीय बोझ को दूर करने के लिए यह मुद्दा महाराष्ट्र विधान परिषद में MLC सदाशिव खोत, प्रवीण दरेकर, प्रसाद लाड, डॉ. परिणय फुके और उमा खापरे ने उठाया. विधायकों ने कहा कि 2025-26 के पेराई सीजन में रिकॉर्ड चीनी उत्पादन के बावजूद 200 से ज्यादा प्राइवेट और सहकारी चीनी मिलों और गन्ना किसानों को हो रही आर्थिक दिक्कतों पर चिंता जताई गई.

चीनी एक्सपोर्ट पर लगी रोक सितंबर के बाद भी बढ़ने की आशंका

विधायकों ने राज्य सरकार के प्रयासों पर भी सवाल उठाए क्योंकि ऐसी संभावना है कि एक्सपोर्ट पर लगी रोक को 30 सितंबर 2026 से भी आगे बढ़ाया जा सकता है. ऐसा होने पर चीनी इंडस्ट्री, गन्ना किसानों और राज्य की अर्थव्यवस्था पर विपरीत असर पड़ सकता है. विधायकों ने केंद्र की ओर से चीनी एक्सपोर्ट पर पाबंदियां लगाने के बाद राज्य सरकार की ओर से उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी.

राज्य के सहकारिता मंत्री ने लिखित जवाब में क्या कहा

सहकारिता मंत्री बाबासाहेब पाटिल ने अपने लिखित जवाब में कहा कि चीनी एक्सपोर्ट पॉलिसी केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आती है. उन्होंने बताया कि केंद्र ने 13 मई 2026 को जारी एक नोटिफिकेशन के जरिए 30 सितंबर 2026 तक या अगले आदेश तक चीनी एक्सपोर्ट पर तत्काल रोक लगा दी थी. पाटिल ने बताया कि चीनी सेक्टर के सामने आ रही चुनौतियों पर चर्चा करने के लिए 24 मार्च, 2026 को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में बैठक हुई थी. यह तय किया गया था कि राज्य का एक प्रतिनिधिमंडल केंद्र सरकार से मिलकर उन विभिन्न मांगों पर चर्चा करेगा जो उसके अधिकार क्षेत्र में आती हैं.

केंद्रीय मंत्री अमित शाह बोले- केंद्र सरकार जल्द निर्णय लेगी

सहकारिता मंत्री ने लिखित बयान में कहा कि इसके बाद मुख्यमंत्री के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने 27 मई 2026 को नई दिल्ली में केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह से मुलाकात की और सहकारी चीनी मिलों के सामने आ रही समस्याओं को विस्तार से उनके सामने रखा. केंद्रीय मंत्री ने सहमति जताई कि केंद्र सरकार उठाए गए मुद्दों पर जल्द से जल्द सकारात्मक निर्णय लेगी.

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Published: 3 Jul, 2026 | 02:39 PM

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