सहकारी समितियों से मिनटों में पास होगा लोन, किसानों की सुविधा के लिए खर्च होंगे 5.11 लाख करोड़
NABARD की 5.11 लाख करोड़ रुपये की नई क्रेडिट योजना से किसानों, पशुपालकों और छोटे कारोबारियों को बड़ी राहत मिलेगी. योजना के तहत फसल ऋण, कृषि मशीनरी, बागवानी और मत्स्य पालन को बढ़ावा दिया जाएगा. सरकार का उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत करना और किसानों की आय बढ़ाना है, जिससे रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे.
NABARD Credit Plan: देश में किसानों की आय बढ़ाने, सहकारी समितियों को मजबूत करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ताकत देने के लिए बड़ी पहल शुरू की गई है. NABARD की ओर आंध्र प्रदेश के रायलसीमा और प्रकाशम जिलों के लिए 5.11 लाख करोड़ रुपये की विशाल क्रेडिट योजना लागू की गई है. इस योजना से किसानों को मिनटों लोन मिल जाएगा. इसका उद्देश्य खेती, पशुपालन, मत्स्य पालन, बागवानी और छोटे कारोबारों को आर्थिक मदद देकर गांवों में विकास को तेज करना है. सरकार का मानना है कि इस फंडिंग से किसानों को आसान ऋण मिलेगा, खेती आधुनिक बनेगी और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे. इसके साथ ही देशभर की सहकारी समितियों को डिजिटल बनाने पर भी जोर दिया जाएगा ताकि किसानों तक योजनाओं और ऋण की सुविधा तेजी से पहुंच सके.
सहकारी समितियों को डिजिटल बनाने की तैयारी
सरकार अब सहकारी व्यवस्था को तकनीक से जोड़ने पर तेजी से काम कर रही है. सरकार के मुताबिक आंध्र प्रदेश की सहकारी समितियों को डिजिटल किया जाएगा ताकि किसानों को ऋण, बीज, खाद और दूसरी सुविधाएं आसानी से मिल सकें. राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस (NCD) और PIB रिपोर्ट के अनुसार आंध्र प्रदेश में 17,885 से 18,194 प्राथमिक सहकारी समितियां (Primary Cooperative Societies) हैं. ये समितियां कृषि, डेयरी, मत्स्य पालन और ग्रामीण ऋण व्यवस्था को मजबूत बनाने में बड़ी भूमिका निभा रही हैं. सरकार का मानना है कि समितियों के डिजिटल होने से किसानों को पारदर्शी और तेज सेवाएं मिलेंगी. इससे गांवों में बैंकिंग और कृषि योजनाओं का लाभ भी आसानी से पहुंच सकेगा.
कृषि क्षेत्र को मिला सबसे बड़ा हिस्सा
इस बड़ी क्रेडिट योजना में सबसे ज्यादा राशि कृषि क्षेत्र के लिए तय की गई है. कुल 5.11 लाख करोड़ रुपये में से लगभग 2.55 लाख करोड़ रुपये खेती और उससे जुड़े क्षेत्रों पर खर्च किए जाएंगे. इसमें 1.66 लाख करोड़ रुपये फसल ऋण के लिए रखे गए हैं ताकि किसानों को समय पर खेती के लिए पैसा मिल सके. इसके अलावा 34,972 करोड़ रुपये पशुपालन, 8,265 करोड़ रुपये कृषि मशीनरी और 21,098 करोड़ रुपये मत्स्य पालन के लिए दिए जाएंगे. सरकार का कहना है कि इससे किसान आधुनिक खेती की ओर बढ़ सकेंगे और खेती की लागत कम करने में मदद मिलेगी. कृषि मशीनों के इस्तेमाल से खेती का काम तेजी से होगा और उत्पादन भी बढ़ेगा. विशेषज्ञों का मानना है कि आसान ऋण मिलने से छोटे और सीमांत किसानों को सबसे ज्यादा फायदा होगा.
बागवानी और मत्स्य पालन को मिलेगा बढ़ावा
योजना में बागवानी क्षेत्र पर भी खास ध्यान दिया गया है. इसके लिए 11,961 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. इनमें से 5,313 करोड़ रुपये खासतौर पर रायलसीमा और प्रकाशम जिलों के लिए रखे गए हैं. सरकार का लक्ष्य हर साल 450 लाख मीट्रिक टन बागवानी उत्पादन हासिल करना है. इसके साथ ही मत्स्य पालन और एक्वाकल्चर को भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था का बड़ा आधार माना जा रहा है. सरकार का कहना है कि इन क्षेत्रों में निवेश बढ़ने से किसानों और ग्रामीण युवाओं की आय में सुधार होगा. पारंपरिक खेती के साथ बागवानी और मत्स्य पालन अपनाने से किसानों को अतिरिक्त कमाई के नए अवसर मिलेंगे.
विशेषज्ञों का मानना है आने वाले समय में बागवानी और एक्वाकल्चर ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाएंगे.
छोटे कारोबार और ग्रामीण ढांचे को मिलेगा फायदा
इस योजना का फायदा सिर्फ किसानों तक सीमित नहीं रहेगा. सरकार ने छोटे और मध्यम उद्योग यानी MSME सेक्टर के लिए भी 1.64 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया है. इससे गांवों में छोटे कारोबारों को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के नए अवसर बनेंगे. इसके अलावा कृषि ढांचे को मजबूत करने के लिए 9,957 करोड़ रुपये और दूसरे कृषि सहयोगी कार्यों के लिए 12,687 करोड़ रुपये रखे गए हैं. इससे गोदाम, कोल्ड स्टोरेज और दूसरी जरूरी सुविधाओं का विकास किया जाएगा. अधिकारियों का कहना है कि मजबूत कृषि ढांचे से किसानों को फसल भंडारण और मार्केटिंग में राहत मिलेगी. साथ ही उन्हें अपनी उपज बेहतर दाम पर बेचने का मौका मिलेगा. सरकार का मानना है कि खेती, पशुपालन, मत्स्य पालन और छोटे कारोबारों को साथ लेकर चलने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और किसानों की आय लगातार बढ़ेगी. विशेषज्ञों के अनुसार यह योजना गांवों में बड़ा आर्थिक बदलाव ला सकती है और सहकारी व्यवस्था को नई मजबूती दे सकती है.