बागवानी क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए NAAS का बड़ा सुझाव, आयातित बीजों पर ‘वन टाइम लाइसेंस’ की सिफारिश

संस्था ने इस बात पर जोर दिया है कि जिन बीजों के लिए हम विदेशों पर निर्भर हैं, उन्हें देश में ही विकसित किया जाना चाहिए. अगर भारत में ही बेहतर और उन्नत किस्में तैयार होंगी, तो न सिर्फ लागत कम होगी, बल्कि किसानों को स्थानीय परिस्थितियों के हिसाब से बेहतर उत्पादन भी मिलेगा.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 16 Apr, 2026 | 12:47 PM

one-time licensing seed policy: भारत में बागवानी खेती को और मजबूत बनाने के लिए कृषि वैज्ञानिकों की शीर्ष संस्था ने कुछ अहम सुझाव दिए हैं. नेशनल एकेडमी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज (NAAS) का मानना है कि अगर सही नीतियां अपनाई जाएं, तो देश में फल और सब्जियों का उत्पादन ही नहीं, बल्कि उनका निर्यात भी तेजी से बढ़ सकता है. संस्था ने सरकार को सलाह दी है कि जो बीज और हाइब्रिड किस्में विदेश से आती हैं, उनके लिए ‘वन टाइम लाइसेंस’ व्यवस्था लागू की जाए.

बार-बार आयात से बढ़ता है खर्च

बिजनेस लाइन की खबर के अनुसार, आज भी भारत कई बागवानी फसलों के बीजों के लिए विदेशों पर निर्भर है. गाजर, चुकंदर, खीरा, पपीता, सेब, अखरोट, कीवी, ऑलिव, खजूर और ब्लूबेरी जैसी फसलों के बीज बड़ी मात्रा में बाहर से मंगाए जाते हैं. इसके कारण किसानों को महंगे बीज खरीदने पड़ते हैं और कई बार रॉयल्टी भी देनी पड़ती है.

NAAS का कहना है कि अगर इन बीजों पर एक बार का लाइसेंस दे दिया जाए, तो किसानों को बार-बार भुगतान नहीं करना पड़ेगा और बीज आसानी से उपलब्ध हो सकेंगे.

देश में ही तैयार हों बेहतर बीज

संस्था ने इस बात पर भी जोर दिया है कि जिन बीजों के लिए हम विदेशों पर निर्भर हैं, उन्हें देश में ही विकसित किया जाना चाहिए. अगर भारत में ही बेहतर और उन्नत किस्में तैयार होंगी, तो न सिर्फ लागत कम होगी, बल्कि किसानों को स्थानीय परिस्थितियों के हिसाब से बेहतर उत्पादन भी मिलेगा. यह कदम आत्मनिर्भरता की दिशा में भी बड़ा कदम माना जा रहा है.

निर्यात बढ़ाने पर फोकस जरूरी

NAAS ने सुझाव दिया है कि फसलों की ऐसी किस्में विकसित की जाएं, जो विदेशों में ज्यादा पसंद की जाती हैं. जैसे कि फल और सब्जियों का स्वाद, उनकी पौष्टिकता और कितने दिन तक वे खराब नहीं होते, इन बातों को ध्यान में रखना जरूरी है.

अगर भारत इन बातों पर काम करता है, तो बागवानी उत्पादों का निर्यात काफी बढ़ सकता है और किसानों को बेहतर दाम मिल सकते हैं.

खेती के तरीके भी बदलने होंगे

आज के समय में सिर्फ उत्पादन बढ़ाना ही काफी नहीं है, बल्कि खेती के तरीके भी सुरक्षित और आधुनिक होने चाहिए. इसके लिए ‘भारत GAP’ जैसे मानकों को अपनाने की सलाह दी गई है, ताकि खेती से लेकर बाजार तक गुणवत्ता बनी रहे. साथ ही ऑर्गेनिक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए साफ नियम और प्रमाणन की व्यवस्था भी जरूरी बताई गई है.

हर उत्पाद की पूरी जानकारी जरूरी

विदेशों में अब यह जानना जरूरी होता है कि फल या सब्जी कहां और कैसे उगाई गई है. इसे ट्रेसबिलिटी कहा जाता है. NAAS ने कहा है कि भारत को इस दिशा में भी मजबूत व्यवस्था बनानी चाहिए, ताकि हमारे उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में भरोसेमंद बन सकें.

प्रोसेसिंग से बढ़ेगा मुनाफा

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बागवानी फसलों का सिर्फ कच्चा रूप बेचने के बजाय उनकी प्रोसेसिंग पर ध्यान देना चाहिए. जैसे टमाटर से सॉस या पेस्ट, आलू से चिप्स, प्याज से पाउडर और हल्दी से औषधीय उत्पाद बनाए जा सकते हैं. इसके लिए खाद्य, दवा और कॉस्मेटिक कंपनियों के साथ मिलकर काम करने की जरूरत बताई गई है.

भारत बन सकता है बीज उत्पादन का केंद्र

NAAS का मानना है कि भारत पहले से ही हाइब्रिड बीज उत्पादन में मजबूत स्थिति में है. अगर निर्यात नियम आसान किए जाएं, तो भारत दुनिया के कई देशों को बीज सप्लाई करने वाला बड़ा केंद्र बन सकता है.

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