मध्य प्रदेश में किसानों के प्रस्तावित भोपाल मार्च से पहले पुलिस ने कई किसान नेताओं और कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई की है. किसान महापंचायत के मध्य प्रदेश अध्यक्ष राजेश धाकड़ को नर्मदापुरम पुलिस ने हाउस अरेस्ट कर दिया है. इसके अलावा कई अन्य किसानों को भी पुलिस ने हिरासत में लिया है. करीब 20 किसान संगठनों ने आज भोपाल मार्च का ऐलान किया था. किसानों का कार्यक्रम मुख्यमंत्री आवास का घेराव कर प्रदर्शन करने का है.
हालांकि, पुलिस हिरासत में लिए जाने के बाद भी किसानों का मनोबल कमजोर नहीं हुआ है. मध्य प्रदेश में किसानों के प्रस्तावित भोपाल मार्च को लेकर आंदोलन तेज होता जा रहा है. किसान महापंचायत के अनुसार, सतवासा गांव से किसानों का पहला जत्था भोपाल के लिए रवाना हो चुका है, जबकि अन्य किसान भी लगातार मार्च में शामिल होने के लिए निकल रहे हैं.ट
क्यों नाराज हैं किसान
किसान मूंग की खरीद, अमेरिका के साथ प्रस्तावित ट्रेड डील और अन्य किसान हितों से जुड़े मुद्दों को लेकर पैदल मार्च करते हुए भोपाल जा रहे थे. इससे पहले ही पुलिस ने कई जगह कार्रवाई कर मार्च को रोकने की कोशिश की है. वहीं, किसान संगठन ने आरोप लगाया है कि पिछले साल जहां 15 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की सीमा तक मूंग की खरीद की गई थी, वहीं इस साल इसे घटाकर 3 क्विंटल प्रति हेक्टेयर कर दिया गया है. किसानों का कहना है कि इससे एक एकड़ में 15,000 से 20,000 रुपये तक का नुकसान हो सकता है.
किसान आर्थिक संकट का सामना कर रहे
दरअसल, बीते दिनों किसान संगठन ने एक ज्ञापन सौंपा था. ज्ञापन में किसानों का कहना था कि प्रदेश में अधिकांश किसानों की मूंग की फसल तैयार हो चुकी है, लेकिन अब तक न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद शुरू नहीं होने से किसान आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं. किसान महापंचायत का कहना है कि खरीद में देरी के कारण किसानों को अपनी उपज कम कीमत पर बेचनी पड़ रही है.
किसान महापंचायत की प्रमुख मांगें
- मूंग की सरकारी खरीद तुरंत शुरू की जाए.
- मूंग खरीद की सीमा बढ़ाकर कम से कम 15 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की जाए.
- स्वामीनाथन आयोग की C2+50% सिफारिश लागू कर MSP तय किया जाए.
- MSP से कम कीमत पर कृषि उपज खरीदने को दंडनीय अपराध घोषित किया जाए.
- किसानों का संपूर्ण कृषि ऋण माफ किया जाए.
जल्द सकारात्मक फैसला नहीं लिया गया तो आंदोलन करेंगे
ज्ञापन में चेतावनी भी दी गई है कि यदि इन मांगों पर जल्द सकारात्मक फैसला नहीं लिया गया, तो किसान महापंचायत पूरे प्रदेश में आंदोलन तेज करेगी. संगठन ने कहा है कि आंदोलन के दौरान किसी भी अप्रिय स्थिति की जिम्मेदारी राज्य और केंद्र सरकार की होगी.